बाहर निकला पेट अंदर करना है तो रोज करें ये योगासन, जानें सही तरीका

आजकल ज्यादातर लोगों की दिनचर्या में बैठने का समय बढ़ गया है. ऑफिस का काम हो या घर से काम करना, कई घंटे एक ही जगह बैठे रहने से शरीर कम एक्टिव रहता है. इसका असर वजन और खासकर पेट के आसपास बढ़ती चर्बी के रूप में भी दिखाई दे सकता है. ऐसे में रोजाना कुछ समय योग के लिए निकालना शरीर को एक्टिव रखने में मदद कर सकता है. उत्तानपादासन भी ऐसा ही एक आसान योगासन है, जिसे पेट और पैरों की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए किया जाता है.
उत्तानपादासन में जमीन पर पीठ के बल लेटकर पैरों को ऊपर उठाया जाता है. इसमें शरीर का ऊपरी हिस्सा जमीन पर रहता है, जबकि पैरों को कुछ ऊंचाई तक उठाकर कुछ समय के लिए उसी स्थिति में रखा जाता है. इस आसन को करते समय पेट की मांसपेशियों पर जोर पड़ता है. साथ ही जांघों और पैरों की मांसपेशियां भी सक्रिय होती हैं. यही वजह है कि इसे पेट और शरीर के निचले हिस्से के लिए उपयोगी योगासन माना जाता है.
पेट के लिए कैसे काम करता है?
पैरों को हवा में उठाकर रखने के दौरान पेट की मांसपेशियों को शरीर को संभालने के लिए काम करना पड़ता है. इससे पेट का कोर मजबूत करने में मदद मिल सकती है. अगर आपका लक्ष्य पेट की चर्बी कम करना है, तो केवल इस आसन पर निर्भर न रहें. पेट की चर्बी पूरे शरीर में फैट कम होने के साथ घटती है. इसके लिए योग के साथ चलना, एक्सरसाइज करना, संतुलित खाना और पर्याप्त नींद लेना भी जरूरी है.
पैरों को भी मिलता है फायदा
इस आसन में पैरों को कुछ समय तक ऊपर रखने से जांघों और पैरों की मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं. इससे लोअर बॉडी की मांसपेशियों को मजबूत रखने में मदद मिल सकती है. जो लोग दिन का ज्यादातर समय बैठे रहते हैं, उनके लिए योग के साथ नियमित हल्की शारीरिक गतिविधि भी जरूरी है. हर थोड़ी देर में उठकर चलना भी शरीर को एक्टिव रखने का आसान तरीका है.
पाचन के लिए भी कर सकते हैं अभ्यास
उत्तानपादासन के दौरान पेट के आसपास की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं. नियमित योग अभ्यास शरीर को एक्टिव रखने में मदद करता है और कुछ लोगों को इससे पाचन से जुड़ी परेशानी में भी राहत महसूस हो सकती है. लेकिन अगर आपको लगातार कब्ज, गैस या पेट दर्द जैसी समस्या रहती है, तो इसे सिर्फ योग से ठीक करने की कोशिश न करें. ऐसी स्थिति में डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है.
उत्तानपादासन करने का सही तरीका
सबसे पहले योग मैट पर पीठ के बल लेट जाएं. पैरों को सीधा रखें और दोनों हाथों को शरीर के पास जमीन पर रखें. अब धीरे-धीरे सांस लेते हुए दोनों पैरों को एक साथ ऊपर उठाएं. पैरों को अपनी क्षमता के अनुसार ऊपर रखें और कुछ सेकंड इसी स्थिति में बने रहें. इस दौरान पेट को ज्यादा खींचने या सांस रोकने की कोशिश न करें. अब धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए पैरों को वापस जमीन की ओर लाएं. शुरुआत में कम समय तक करें. अभ्यास बढ़ने के साथ इसे धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है.
किन लोगों को नहीं करना चाहिए?
अगर आपको कमर, रीढ़ या पेट में गंभीर दर्द या चोट है, तो यह आसन करने से पहले डॉक्टर या योग विशेषज्ञ से सलाह लें. गर्भवती महिलाओं को भी बिना विशेषज्ञ की सलाह के यह आसन नहीं करना चाहिए. आसन करते समय दर्द, चक्कर या सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत रुक जाएं. (IANS से इनपुट के साथ)



