‘बैंडिट क्वीन’ से ‘द ग्रेट इंडियन किचन’ तक, दकियानूसी सोच को चुनौती देतीं ये 6 दमदार फिल्में

Last Updated:October 01, 2026, 00:07 IST
कुछ फिल्में महिलाओं से जुड़े गंभीर मुद्दों और उनके स्ट्रगल को पर्दे पर मजबूती से उठाती हैं. इनमें फूलन देवी की जिंदगी पर बनी ‘बैंडिट क्वीन’ सहित कई यादगार फिल्में हैं, जो समाज की दकियानूसी सोच को चुनौती देती हैं. लिस्ट में ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ जैसी बेहतरीन फिल्में शामिल हैं.
साल 2001 में आई फिल्म ‘लज्जा’ में घरेलू हिंसा, दहेज, सामाजिक दबाव और शादी के बाद महिलाओं से जुड़ी उम्मीदों जैसे मुद्दों को दिखाया गया है. यह फिल्म इस सोच पर सवाल उठाती है कि परिवार को एक साथ रखने के लिए महिलाओं को बस अन्याय सह लेना चाहिए. (फोटो साभार: IMDb)
साल 2016 में आई ‘पिंक’ तीन युवा महिलाओं की कहानी है, जिनकी जिंदगी एक पार्टी में मिले एक आदमी से जुड़ी घटना के बाद बदल जाती है. फिल्म ‘सहमति’ और इस बात पर फोकस करती है कि कैसे महिलाओं को अक्सर उनके कपड़ों, लाइफस्टाइल, दोस्ती या पुराने रिश्तों के आधार पर आंका जाता है. (फोटो साभार: IMDb)
साल 2021 में आई ‘द ग्रेट इंडियन किचन’ एक शादीशुदा महिला की कहानी है, जो धीरे-धीरे घर पर अपनी रोजमर्रा के रुटीन से परेशान होने लगती है. फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे घर के बिना पैसे वाले काम को अक्सर हल्के में लिया जाता है और माना जाता है कि ये काम तो महिलाओं को करने ही हैं.
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फिल्म ‘द ग्रेट इंडियन किचन’ में शादी, जेंडर रोल और एक आदर्श पत्नी होने का असल मतलब क्या है, इस बारे में पारंपरिक सोच पर भी सवाल उठाती है. (फोटो साभार: IMDb)
साल 2016 में आई ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ अलग-अलग उम्र और बैकग्राउंड की चार महिलाओं की कहानी है, जो सभी अपनी-अपनी जिंदगी में थोड़ी आजादी पाने की कोशिश कर रही थीं. इसमें उनके रिश्तों, कामुकता और समाज के महिलाओं पर थोपे गए अलग-अलग नियमों को दिखाया गया है. (फोटो साभार: IMDb)
साल 2020 में आई ‘थप्पड़’ अमृता नाम की एक शादीशुदा महिला की कहानी है, जिसकी खुशहाल दिखने वाली शादी तब बदल जाती है, जब उसका पति उसे एक पार्टी में थप्पड़ मार देता है. फिल्म ने घरेलू हिंसा को शारीरिक हिंसा से आगे बढ़कर देखा और उन छोटे-मोटे समझौतों पर भी ध्यान दिया जो शादी में महिलाओं से करने की उम्मीद की जाती है. (फोटो साभार: IMDb)
साल 1994 में आई फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ फूलन देवी की कहानी है, जो गरीबी, जातिगत भेदभाव, बाल विवाह और हिंसा का सामना करते हुए बड़ी हुईं. आखिरकार, वे एक डकैत बन गईं.
फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ ने जाति, गरीबी और महिलाओं के खिलाफ हिंसा जैसे मुद्दों की ओर ध्यान खींचा और इस बात पर सवाल उठाए कि ऐसी स्थितियों का सामना करने वाली महिलाओं की कहानियों को स्क्रीन पर कैसे दिखाया जाता है. (फोटो साभार: IMDb)
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October 01, 2026, 00:07 IST



