नेहा झा के चरित्र हनन का दोषी कौन? बिहार पुलिस कैसे की इतनी बड़ी

Last Updated:September 13, 2026, 20:08 IST
Bihar Neha Jha Liquor Case: बिहार पुलिस का सिंघम वाला ड्रामा समस्तीपुर में पूरी तरह एक्सपोज होता नजर आ रहा है. स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस से 75 लीटर दारू मिली नहीं कि बिना TIP (टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड) करवाए नेहा झा का फोटो सोशल मीडिया पर ड्रग लॉर्ड बताकर वायरल कर दिया गया. अब ट्विस्ट यह है कि कोर्ट ने नेहा को बेल दे दी और दारू हरियाणा की निकली, जबकि आरोपी लड़की UP के बनारस से ट्रेन में चढ़ी थी. पुलिस पर आरोप है कि वाहवाही लूटने के चक्कर में उन्होंने महिला का कैरेक्टर असैसिनेशन कर डाला.पुलिस मामले की जांच कर रही है.
समस्तीपुर में स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस से 75 लीटर दारू क्या मिली, पुलिस ने तुरंत सिंघम वाला चश्मा चढ़ा लिया. बिना किसी ठोस जांच और बिना TIP (टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड) करवाए, नेहा झा नाम की लड़की का फोटो सोशल मीडिया पर ऐसे चिपका दिया जैसे वही पूरे राज्य की ड्रग लॉर्ड हो. अब ट्विस्ट यह है कि कोर्ट ने जमानत दे दी और प्राथमिक जांच में यह बात सामने आ रही है कि दारू हरियाणा से चढ़ी थी, जबकि नेहा UP से ट्रेन में बैठी थी. वाह भाई! वाह! बिहार पुलिस ने वाहवाही लूटने के चक्कर में एक लड़की का चरित्र हनन कर दिया, उसका क्या? अगर कल वो बेकसूर साबित हो गई तो इंटरनेट पर लगे इस दाग को मिटाने कौन आएगा? बिहार पुलिस का यह जल्दबाजी वाला सिंघम अंदाज कानून की धज्जियां उड़ाने और दोष साबित होने से पहले ही किसी को भी विलेन बनाने का नेक्स्ट लेवल नमूना है.
कानूनी कोण: TIP के नियमों की अनदेखी और मानवाधिकार का हननकानूनी दृष्टिकोण से देखा जाए तो किसी भी आपराधिक मामले में गिरफ्तारी के तुरंत बाद बिना टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड (TIP) पूरी किए आरोपी का चेहरा सार्वजनिक करना कानूनी प्रक्रियाओं का स्पष्ट उल्लंघन है. साक्ष्य की विश्वसनीयता पर चोट: भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 के तहत, अगर पुलिस किसी आरोपी की तस्वीर जांच और ट्रायल से पहले ही सार्वजनिक कर देती है तो अदालत में TIP का कानूनी महत्व खत्म हो जाता है. गवाहों के लिए आरोपी को पहचानना कोई बड़ी बात नहीं रह जाती, जिससे निष्पक्ष ट्रायल प्रभावित होता है. अनुच्छेद 21 का उल्लंघन: संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक को सम्मान के साथ जीने का अधिकार (Right to Dignity) और निजता का अधिकार (Right to Privacy) देता है. जब तक कोई व्यक्ति अदालत से दोषी साबित नहीं हो जाता, वह महज एक आरोपी होता है. बिना दोष सिद्धि के मीडिया के सामने तस्वीर परेड कराना एक तरह से ट्रायल बाय पुलिस है, जो किसी भी नागरिक के मौलिक अधिकारों का हनन है.
पब्लिसिटी स्टंट या निष्पक्ष जांच?बिहार में शराबबंदी कानून लागू है और इसे सख्ती से लागू कराने का दबाव पुलिस पर लगातार बना रहता है. लेकिन वाहवाही लूटने और अपनी त्वरित कार्रवाई की पीठ थपथपाने की होड़ में बिहार पुलिस अक्सर बुनियादी कानूनी प्रक्रियाओं को दरकिनार कर देती है. सिंघिया थाना क्षेत्र की रहने वाली नेहा झा के पारिवारिक बैकग्राउंड को आड़ बनाकर पुलिस ने जिस तरह पूर्वाग्रह से ग्रस्त होकर जांच को आगे बढ़ाया, वह पेशेवर पुलिसिंग पर बड़ा धब्बा है. यूपी के बनारस से सवार हुई महिला यात्री पर हरियाणा से आ रही हरियाणा मेड शराब का ठीकरा फोड़ देना और बिना तकनीकी जांच पूरी हुए तस्वीरें लीक कर देना, यह दर्शाता है कि पुलिस का मुख्य ध्यान असली सिंडिकेट और सप्लायरों तक पहुंचने के बजाय केस को जल्द से जल्द सॉल्व्ड दिखाने पर था.
चरित्र हनन का जिम्मेदार कौन?आज के डिजिटल युग में, एक बार इंटरनेट पर किसी व्यक्ति की तस्वीर शराब तस्कर के टैग के साथ वायरल हो जाए तो अदालत से बाइज्जत बरी होने के बाद भी समाज उस कलंक को नहीं धोता. नेहा झा के मामले में अगर पुलिस की ढीली जांच और पूर्वाग्रह से किसी की सामाजिक प्रतिष्ठा हमेशा के लिए धूलधूसरित होती है तो इसके लिए समस्तीपुर रेल पुलिस और जांच अधिकारी सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं. इस मामले में न सिर्फ कानूनी पहलुओं को देखा जाना चाहिए बल्कि बिना प्रक्रिया पालन किए तस्वीरें जारी करने वाले जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई तय करनी चाहिए. ताकि भविष्य में खाकी किसी के आत्मसम्मान के साथ इस तरह खेलने की जुर्रत न कर सके.
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पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का सुदीर्घ अनुभव रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर होम पेज पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. जटिल और सामरिक विषयों को बेहद सरल भाषा में पाठकों त…
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Samastipur,Bihar
First Published :
September 13, 2026, 20:08 IST



