पड़ोसी हो या दोस्त, हर पुरुष बांधता है एक-दूसरे को राखी, गांव में कायम है अनोखा भाईचारा

Last Updated:August 28, 2026, 09:21 IST
Ochhdi Village Raksha Bandhan Tradition: चित्तौड़गढ़ के ओछड़ी गांव में रक्षा बंधन की एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है. यहां पुरुष एक-दूसरे की कलाई पर राखी बांधकर आपसी भाईचारे, सुरक्षा और सौहार्द का संकल्प लेते हैं. सदियों पुरानी यह प्रथा दिखाती है कि रक्षा का वचन सिर्फ खून के रिश्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि इंसानियत, दोस्ती और सामाजिक एकता पर आधारित हो सकता है. यह अनूठी परंपरा गांव के सामाजिक ताने-बाने को मजबूत बनाती है और पूरे देश के लिए प्रेरणादायक मिसाल पेश करती है.
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सदियों से चली आ रही अनोखी रस्म, पुरुष एक-दूसरे को राखी बांधकर लेते हैं सुरक्षा का संकल्प
चित्तौड़गढ़: चित्तौड़गढ़ जिले के ओछड़ी गांव में रक्षा बंधन का त्यौहार एक बिल्कुल अलग और प्रेरणादायक अंदाज में मनाया जाता है. जहां पूरे देश में यह पर्व बहनों द्वारा भाइयों की कलाई पर रक्षा का धागा बांधने और बदले में सुरक्षा का वचन लेने का प्रतीक है, वहीं ओछड़ी गांव में भाई-बहन के इस पारंपरिक स्वरूप के साथ-साथ एक अनूठी सामाजिक मिसाल देखने को मिलती है. इस गांव में पुरुष एक-दूसरे की कलाई पर राखी बांधकर आपसी सद्भाव, भाईचारे और गांव की सामूहिक सुरक्षा का संकल्प लेते हैं. यह सदियों पुरानी परंपरा केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक रस्म नहीं है, बल्कि समाज में एकता और अटूट विश्वास को मजबूत करने का एक माध्यम बनी हुई है.
ओछड़ी गांव में रक्षा बंधन के दिन एक विशेष नजारा होता है. गांव के सभी पुरुष एक स्थान पर एकत्रित होते हैं और बहुत ही सौहार्दपूर्ण माहौल में एक-दूसरे को राखी बांधते हैं. गांव के बुजुर्गों का कहना है कि यह प्रथा पीढ़ियों से चली आ रही है. इस रस्म के पीछे का मुख्य उद्देश्य यह संदेश देना है कि सुरक्षा और रक्षा का संकल्प केवल खून के रिश्तों तक सीमित नहीं होना चाहिए. जब एक व्यक्ति अपने पड़ोसी या मित्र को राखी बांधता है, तो वह उसके सुख-दुख में साथ खड़े रहने और हर संकट में उसकी रक्षा करने का दायित्व स्वीकार करता है. इस भावना ने गांव के सामाजिक ताने-बाने को बेहद मजबूत और एकजुट बनाया है.
आपसी भाईचारे और इंसानियत की मिसालवर्तमान समय में जब समाज में दूरियां बढ़ रही हैं, ओछड़ी गांव की यह परंपरा इंसानियत और सामुदायिक एकता का एक अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती है. मुश्किल समय में पूरा गांव एकजुट होकर एक-दूसरे की ढाल बनता है. यह परंपरा साबित करती है कि रक्षा बंधन का पर्व केवल पारिवारिक दायरों तक सीमित न होकर पूरे समाज को जोड़ने का सामर्थ्य रखता है. चित्तौड़गढ़ का यह छोटा सा गांव आज पूरे देश के लिए सामाजिक सौहार्द और परस्पर सहयोग की एक नई मिसाल बन चुका है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Chittaurgarh,Chittaurgarh,Rajasthan
First Published :
August 28, 2026, 09:21 IST



