पुलिस ने कहा सांप ने काटा, अस्पताल की रिपोर्ट में सिर में चोट; पुलिस कस्टडी में कैसे हुई रीतुराज की मौत?

जयपुर. जयपुर के मुहाना थाना पुलिस पर 19 साल के युवक रीतुराज लोहार को अवैध हिरासत में रखकर मारपीट करने और गंभीर हालत में पहुंचने के बाद इलाज में लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगे हैं. परिवार का आरोप है कि पुलिस की पिटाई के बाद रीतुराज की तबीयत बिगड़ी और वह 13 दिन तक वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत से जूझता रहा. सोमवार को उसकी मौत हो गई.
मामला सामने आने के बाद राज्य मानवाधिकार आयोग ने जयपुर पुलिस कमिश्नर और जयपुर जिला कलेक्टर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. आयोग ने मामले की जांच किसी आईपीएस अधिकारी से कराने को भी कहा है. दूसरी तरफ कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने भी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है.
22 सितंबर को थाने ले गई थी पुलिस
रीतुराज के पिता प्रकाश लोहार मध्यप्रदेश के मंदसौर के रहने वाले हैं और दुबई में काम करते हैं. परिवार के मुताबिक प्रकाश 17 सितंबर को दुबई से जयपुर लौटे थे. उनका कहना है कि दुबई से भीलवाड़ा के मनोज नाम के व्यक्ति के लिए सोने की एक चेन लानी थी. परिवार के मुताबिक चेन नहीं ला पाने के कारण पैसों को लेकर दोनों के बीच विवाद हो गया. प्रकाश का कहना है कि उन्होंने दो लाख रुपये दुबई से ही वापस भेज दिए थे और जयपुर लौटने के बाद 50 हजार रुपये भी लौटा दिए थे. इसके बाद भी करीब एक लाख रुपये को लेकर विवाद था.
परिवार का क्या आरोप
परिवार का आरोप है कि 17 सितंबर को जयपुर एयरपोर्ट के बाहर तीन पुलिसकर्मी खुद को क्राइम ब्रांच से बताकर प्रकाश को अपने साथ ले गए. पहले सामान की तलाशी ली गई और फिर एक होटल में भी तलाशी ली गई. प्रकाश ने आरोप लगाया कि होटल में उसके साथ मारपीट की गई. जब इसकी जानकारी उसके बेटे रीतुराज को मिली तो वह मंदसौर से जयपुर पहुंचा. परिवार का आरोप है कि इसके बाद पुलिस ने रीतुराज को भी अपने कब्जे में ले लिया.
पुलिस पर थाने में पिटाई का आरोप22 सितंबर को भीलवाड़ा के मनोज ने मुहाना थाने में शिकायत दी थी. शिकायत में आरोप लगाया गया कि प्रकाश लोहार ने दुबई से सस्ता सोना लाने के नाम पर उससे 22 लाख रुपये लिए थे. परिवार के मुताबिक इसी मामले में पुलिस 22 सितंबर की सुबह करीब 10.30 बजे मंदसौर से ललित और प्रहलाद तथा जयपुर से दिलीप नाम के लोगों को थाने लेकर आई थी. इसके करीब डेढ़ घंटे बाद रीतुराज को भी पुलिस थाने लेकर आई. परिवार का आरोप है कि थाने में रीतुराज के साथ मारपीट की गई. करीब साढ़े तीन बजे एक संतरी की नजर उस पर पड़ी तो वह बेसुध हालत में पड़ा था. इसके बाद पुलिस उसे आनन-फानन में मुहाना के लकी अस्पताल लेकर गई.
दो निजी अस्पतालों में कराया इलाजपरिवार का आरोप है कि रीतुराज की हालत खराब होने पर उसे सरकारी अस्पताल ले जाने के बजाय पहले एक निजी अस्पताल और फिर दूसरे निजी अस्पताल ले जाया गया. लकी अस्पताल के बाद उसे नारायणा अस्पताल में भर्ती कराया गया. नारायणा अस्पताल में हालत गंभीर होने के बाद उसे वेंटिलेटर पर रखा गया. इसके बाद अस्पताल ने उसे सवाई मानसिंह अस्पताल के लिए रेफर कर दिया. रीतुराज को SMS अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसने 13 दिन तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष किया. परिवार का दावा है कि दोनों निजी अस्पतालों में इलाज का करीब 98,500 रुपये का खर्च आया और यह राशि मुहाना पुलिस ने खुद चुकाई. परिवार इसी बात को लेकर भी सवाल उठा रहा है कि अगर रीतुराज को पुलिस ने नहीं पीटा था तो उसके इलाज का खर्च पुलिस ने क्यों उठाया.
परिवार से कहा- सांप ने काटा हैरीतुराज के परिवार का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें उसके घायल होने की असली वजह नहीं बताई. परिवार को फोन कर बताया गया कि रीतुराज की तबीयत खराब है और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है. जब परिवार अस्पताल पहुंचा तो उन्हें बताया गया कि रीतुराज को सांप ने काट लिया है. आरोप है कि अस्पताल में उसे एंटी वेनम के 10 इंजेक्शन भी लगाए गए. लेकिन बाद में नारायणा अस्पताल और सवाई मानसिंह अस्पताल की सीटी स्कैन रिपोर्ट में उसके सिर में चोट सामने आने की बात परिवार ने कही. इसी के बाद परिवार ने पुलिस के दावे पर सवाल उठाए.
मौत से पहले समझौते का दबाव डालने का आरोपरीतुराज के पिता प्रकाश और मां हेमा ने मौत से एक दिन पहले गंभीर आरोप लगाए थे. उनका कहना था कि मुहाना थाने के तीन पुलिसकर्मी अस्पताल पहुंचे और परिवार पर समझौता करने का दबाव बनाया. परिवार के मुताबिक पुलिसकर्मियों ने 10 लाख रुपये लेकर मामला खत्म करने की बात कही. मां हेमा का आरोप है कि उनसे दबाव डालकर एक एफआईआर पर भी हस्ताक्षर करवाए गए. उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने धमकी दी कि अगर उन्होंने बात नहीं मानी तो उनके बेटे जैसी हालत उनकी भी कर दी जाएगी. परिवार का कहना है कि वह लगातार अपने बेटे की हालत को लेकर परेशान था और उसी दौरान समझौते का दबाव बनाया गया.
13 दिन बाद वेंटिलेटर पर मौतरीतुराज को सवाई मानसिंह अस्पताल में भर्ती कराने के बाद 13 दिन तक वेंटिलेटर पर रखा गया. परिवार के मुताबिक इस दौरान उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ. सोमवार को उसने दम तोड़ दिया. पोस्टमार्टम के बाद मंगलवार को शव परिजनों को सौंप दिया गया. इसके बाद परिवार शव लेकर मंदसौर रवाना हो गया.
मानवाधिकार आयोग ने मांगी रिपोर्टरीतुराज की मौत के बाद मामला अब राज्य मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया है. आयोग ने जयपुर पुलिस कमिश्नर और जयपुर जिला कलेक्टर को नोटिस जारी कर पूरे मामले में जवाब मांगा है. साथ ही मामले की जांच किसी आईपीएस अधिकारी से कराने की बात कही गई है. अब जांच में यह सामने आना बाकी है कि रीतुराज को पुलिस किस आधार पर थाने लेकर आई थी, उसे कितनी देर हिरासत में रखा गया, उसके साथ क्या हुआ और गंभीर हालत में उसे समय पर इलाज क्यों नहीं मिला. परिवार का सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर रीतुराज पुलिस हिरासत में नहीं था और उसके साथ कोई मारपीट नहीं हुई थी तो उसे पुलिस अपने साथ क्यों लेकर आई, निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च पुलिस ने क्यों उठाया और परिवार को सांप काटने की बात क्यों बताई गई.
कांग्रेस ने दी आंदोलन की चेतावनीकांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने भी मामले को लेकर पुलिस पर सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि पूरे मामले की जानकारी सरकार तक थी और इसके बावजूद एक युवक की मौत हो गई. खाचरियावास ने कहा कि अगर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई और परिवार को न्याय नहीं मिला तो कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी और आंदोलन करेगी.



