10 साल बाद पलटा प्रत्युषा बनर्जी केस का रुख, राहुल राज सिंह को हाई कोर्ट से मिली बड़ी राहत

Last Updated:September 30, 2026, 22:00 IST
टीवी की मशहूर एक्ट्रेस प्रत्युषा बनर्जी की मौत के मामले में करीब 10 साल बाद बड़ा फैसला आया है. ‘बालिका वधू’ में आनंदी का किरदार निभाकर घर-घर में पहचान बनाने वाली प्रत्युषा की मौत के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने उनके पूर्व पार्टनर राहुल राज सिंह को आरोपमुक्त कर दिया है.
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10 साल बाद आया बड़ा अपडेट
नई दिल्ली. टीवी की जानी मानी एक्ट्रेस प्रत्युषा बनर्जी की मौत के मामले में एक बड़ा अपडेट आया है. ‘बालिका वधू’ में आनंदी के किरदार से वह रातोंरात स्टार बन गई थीं. प्रत्युषा की मौत के केस में बॉम्बे हाई कोर्ट ने उनके पूर्व पार्टनर राहुल राज सिंह पर अब 10 साल बाद फैसला सुनाया है और उन्हें आरोपमुक्त कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि मामले को ट्रायल तक ले जाने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं. ऐसे में इस फैसले के बाद एक बार फिर 2016 में हुई प्रत्युषा की मौत का मामला चर्चा में आ गया है.
बुधवार को जस्टिस एसजी डिगे की सिंगल बेंच ने इस मामले में अपना फैसला सुनाया. कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष के पास ऐसे पर्याप्त सबूत नहीं हैं, जिनके आधार पर मामले को ट्रायल तक ले जाया जा सके. कोर्ट के इस फैसले के बाद राहुल राज सिंह के खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई पर रोक लग गई है.
1 अप्रैल 2016 को फ्लैट में मिली थी प्रत्युषा की लाश
प्रत्युषा बनर्जी महज 24 साल की थीं, जब 1 अप्रैल 2016 को वह मुंबई के गोरेगांव वेस्ट स्थित अपने किराए के फ्लैट में फांसी पर लटकी मिली थीं. उनकी मौत की खबर सामने आने के बाद टीवी इंडस्ट्री में हड़कंप मच गया था. प्रत्युषा की मां सोमा बनर्जी की शिकायत के आधार पर बांगुर नगर पुलिस ने उनके पार्टनर राहुल राज सिंह के खिलाफ केस दर्ज किया था. राहुल पर आत्महत्या के लिए उकसाने के अलावा मारपीट, गाली-गलौज और धमकी देने जैसी धाराओं में मामला दर्ज किया गया था.परिवार की ओर से आरोप लगाया गया था कि राहुल ने प्रत्युषा को मानसिक, शारीरिक और आर्थिक तौर पर परेशान किया था. इसी वजह से पुलिस ने मामले की जांच की और बाद में राहुल के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की.
राहुल को पहले ही मिल चुकी थी अग्रिम जमानत
इस मामले में राहुल राज सिंह को जुलाई 2016 में बॉम्बे हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई थी. इसके बाद साल 2018 में पुलिस ने मामले में चार्जशीट दाखिल की. राहुल ने बाद में कोर्ट से उन्हें इस मामले से डिस्चार्ज करने की मांग की. हालांकि, अगस्त 2023 में डिंडोशी सेशन कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी. उस समय सेशन कोर्ट ने गवाहों के बयानों का हवाला देते हुए कहा था कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि आरोपी ने प्रत्युषा की जिंदगी को काफी मुश्किल बना दिया था.
राहुल के वकीलों ने कोर्ट में रखी ये दलील
राहुल राज सिंह की तरफ से सीनियर वकील आबाद पोंडा और श्रेयांश मिठारे ने हाई कोर्ट में उनकी ओर से कई दलीलें रखीं. वकीलों ने कहा कि एफआईआर जल्दबाजी में दर्ज की गई थी और मौके से कोई सुसाइड नोट भी बरामद नहीं हुआ था. उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि प्रत्युषा की आत्महत्या से करीब एक घंटे पहले की आखिरी फोन रिकॉर्डिंग में राहुल उन्हें ऐसा कोई कदम नहीं उठाने के लिए समझा रहे थे. वकीलों के मुताबिक, उस बातचीत में राहुल ने प्रत्युषा के प्रति अपने प्यार का भी इजहार किया था.राहुल के वकीलों ने यह भी दलील दी कि घटना के बाद राहुल ही वह व्यक्ति थे, जिन्होंने दरवाजा खुलवाया और प्रत्युषा को अस्पताल ले जाने की कोशिश की.
कोर्ट ने कहा- ट्रायल चलाने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं
हाई कोर्ट ने राहुल की तरफ से पेश की गई दलीलों और मामले में मौजूद सबूतों को देखते हुए कहा कि इसे आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला नहीं माना जा सकता. कोर्ट के मुताबिक, अभियोजन के पास मामले को ट्रायल तक ले जाने के लिए पर्याप्त सामग्री नहीं है.कोर्ट ने माना कि ऐसी स्थिति में राहुल के खिलाफ ट्रायल चलाना कानूनी प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल होगा. इसी आधार पर उन्हें मामले से डिस्चार्ज कर दिया गया.
About the AuthorMunish KumarSenior sub editor
न्यूज 18 हिंदी में एंटरटेनमेंट सेक्शन में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे मुनीष कुमार दिल्ली के रहने वाले हैं. डिजिटल मीडिया में उन्हें 10 साल का अनुभव है.राजधानी कॉलेज (DU) से पॉलिटिकल साइंस (ऑनर्स) की पढ…
New Delhi,New Delhi,Delhi
First Published :
September 30, 2026, 22:00 IST



