बैलगाड़ी का पहिया टूटा, बदली जगह की पहचान, जानें 2300 साल पुरानी मूर्ति का इतिहास

Last Updated:September 17, 2026, 14:48 IST
Bhandavpur Jain Teerth: राजस्थान का भांडवपुर जैन तीर्थ अपनी प्राचीन धार्मिक विरासत और ऐतिहासिक मान्यताओं के लिए खास पहचान रखता है. मान्यता है कि बैलगाड़ी का पहिया टूटने के बाद इसी स्थान पर तीर्थ की स्थापना से जुड़ी कहानी सामने आती है. यहां भगवान महावीर की करीब 2300 साल पुरानी प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है. प्राचीन प्रतिमा, धार्मिक आस्था और इतिहास से जुड़ी यह कहानी भांडवपुर को खास बनाती है.
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जालौर: जालोर जिले की सायला तहसील के भुंडवा गांव में स्थित भांडवपुर जैन तीर्थ आस्था और इतिहास से जुड़ा एक प्राचीन जैन तीर्थस्थल है. भगवान महावीर स्वामी को समर्पित यह तीर्थ अपनी प्राचीन प्रतिमा और इससे जुड़ी मान्यताओं के कारण विशेष पहचान रखता है. जैन परंपरा के अनुसार यहां विराजमान भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा करीब 2300 वर्ष पुरानी मानी जाती है. यही प्राचीन प्रतिमा इस तीर्थ की सबसे खास पहचान में शामिल है. भांडवपुर की आस्था केवल जैन समाज तक सीमित नहीं मानी जाती, बल्कि यह तीर्थ 36 कौमों के लोगों की श्रद्धा से भी जुड़ा हुआ है.
भांडवपुर तीर्थ की स्थापना से जुड़ी कहानी भी बहुत ही रोचक है. मंदिर के इतिहास के अनुसार, एक समय भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा को पालजी संघ द्वारा बैलगाड़ी में ले जाया जा रहा था. प्रतिमा के साथ यह यात्रा आगे बढ़ रही थी, लेकिन भांडूक वन के क्षेत्र में पहुंचने के बाद बैलगाड़ी का पहिया टूट गया. इसके बाद इसी स्थान को प्रतिमा की स्थापना के लिए उपयुक्त माना गया और यहां मंदिर का निर्माण कराया गया. धीरे-धीरे यही स्थान भांडवपुर जैन तीर्थ के रूप में प्रसिद्ध हुआ और आज श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण आस्था स्थल बना हुआ है.
कथा भांडवपुर तीर्थ की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्साप्रतिमा को लेकर जुड़ी यह कथा भांडवपुर तीर्थ की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है. श्रद्धालुओं के लिए बैलगाड़ी का उस स्थान पर रुकना महज एक घटना नहीं, बल्कि भगवान महावीर की प्रतिमा के इसी स्थान पर विराजमान होने से जुड़ी धार्मिक मान्यता है. यही वजह है कि भांडवपुर आने वाले श्रद्धालु यहां भगवान महावीर स्वामी के दर्शन के साथ इस तीर्थ की स्थापना से जुड़ी परंपरा को भी याद करते हैं.
36 कौमों के लोग इस तीर्थ को श्रद्धा की नजर से देखतेजैन धर्म के अनुयायी सुजल मेहता ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि भांडवपुर तीर्थ की मान्यता और इतिहास लंबे समय से लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ है. उनके अनुसार, भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा को लेकर चली आ रही परंपरा और इस स्थान की धार्मिक मान्यताएं श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती हैं. भांडवपुर में अलग-अलग समुदायों के लोगों की आस्था जुड़ी हुई है और 36 कौमों के लोग इस तीर्थ को श्रद्धा की नजर से देखते हैं.
धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ भांडवपुर जैन तीर्थ की पहचान सिर्फ एक प्राचीन मंदिर के रूप में नहीं है, बल्कि यहां इतिहास, धार्मिक परंपरा और लोकमान्यता एक साथ दिखाई देती है. भगवान महावीर स्वामी की प्राचीन प्रतिमा, बैलगाड़ी के पहिए से जुड़ी स्थापना की कथा और 36 कौमों की आस्था इस तीर्थ को अपनी अलग पहचान देती है. जालोर के भुंडवा गांव में स्थित यह तीर्थ आज भी श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है और क्षेत्र की धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है.
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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Jalor,Rajasthan
First Published :
September 17, 2026, 14:48 IST



