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तनाव, नींद और खान-पान… उम्र बढ़ने पर शरीर को कैसे रखें एक्टिव? वैज्ञानिक ने बताया तरीका

Last Updated:September 19, 2026, 18:54 IST

गाजीपुर: उम्र बढ़ना प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन लंबे समय तक स्वस्थ और सक्रिय रहने के लिए जीवनशैली पर ध्यान देना जरूरी है. जर्मनी में एजिंग रिसर्च पर काम कर रहे वैज्ञानिक डॉ. पीयूष गुप्ता ने हेल्दी एजिंग के लिए नींद, खान-पान, एक्सरसाइज, तनाव और मानसिक स्वास्थ्य को अहम बताया है.

गाजीपुर: उम्र बढ़ना हर इंसान की जिंदगी का हिस्सा है, लेकिन लंबे समय तक स्वस्थ और सक्रिय रहना हमारी जीवनशैली पर काफी हद तक निर्भर करता है. एजिंग रिसर्च पर काम कर रहे गाजीपुर के तुलसीसागर निवासी वैज्ञानिक डॉ. पीयूष गुप्ता का मानना है कि हेल्दी एजिंग के लिए किसी एक जादुई उपाय की जरूरत नहीं है. रोज की जीवनशैली, खान-पान, शारीरिक गतिविधि, नींद और मानसिक स्वास्थ्य मिलकर इसमें अहम भूमिका निभाते हैं. डॉ. पीयूष इन दिनों जर्मनी में एजिंग रिसर्च पर काम कर रहे हैं और उन्होंने उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को समझने और लंबे समय तक स्वस्थ रहने को लेकर अपनी सोच साझा की है.

डॉ. पीयूष का मानना है कि भारत की करीब 40 से 50 फीसदी युवा आबादी आने वाले वर्षों में तेजी से बुजुर्ग आबादी का हिस्सा बन सकती है. ऐसे में हेल्दी एजिंग को लेकर अभी से जागरूक होना जरूरी है. उन्होंने कम उम्र में बढ़ रही डायबिटीज और हार्ट अटैक जैसी समस्याओं का भी जिक्र किया. उनके मुताबिक युवाओं में कम उम्र में ऐसी बीमारियां बढ़ते देख उनके मन में एजिंग रिसर्च को लेकर रुचि पैदा हुई.

डॉ. पीयूष के अनुसार आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में काम, परिवार और पैसों से जुड़ा तनाव बढ़ गया है. लगातार तनाव का असर सिर्फ दिमाग पर ही नहीं, बल्कि शरीर की सेहत पर भी पड़ सकता है. लंबे समय तक स्वस्थ और सक्रिय रहने के लिए तनाव को समय रहते पहचानना और उसे संभालना जरूरी है. उनका कहना है कि स्ट्रेस मैनेजमेंट को रोज की जिंदगी का हिस्सा बनाना चाहिए. तनाव को नजरअंदाज करने के बजाय उसकी वजह समझना और उसे कम करने के तरीके अपनाना बेहतर रहता है. अच्छी नींद को लेकर डॉ. पीयूष का कहना है कि सिर्फ सात से आठ घंटे सोना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि नींद की क्वालिटी भी अच्छी होनी चाहिए. सोने के दौरान शरीर और दिमाग को सही आराम मिलना जरूरी है. अगर कोई व्यक्ति तनाव या लगातार ओवरथिंकिंग के बीच सोता है, तो आठ घंटे की नींद के बाद भी उसे पर्याप्त आराम महसूस नहीं हो सकता. इसलिए नींद के घंटे गिनने के साथ यह भी ध्यान देना चाहिए कि नींद कितनी सुकून वाली रही.

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डॉ. पीयूष ने नियमित शारीरिक गतिविधि को हेल्दी एजिंग का अहम हिस्सा बताया है. उनका कहना है कि शरीर को लगातार सक्रिय रखने से फिटनेस बेहतर बनी रहती है. इसके लिए हर व्यक्ति अपनी उम्र और क्षमता के अनुसार रोज वॉक, एक्सरसाइज या वर्कआउट कर सकता है. उनका जोर इस बात पर है कि शरीर को लंबे समय तक सुस्त और निष्क्रिय रखने के बजाय एक्टिव लाइफस्टाइल अपनाई जाए. उम्र बढ़ने की प्रक्रिया में खान-पान की भी अहम भूमिका होती है. इसलिए डाइट में पर्याप्त प्रोटीन और शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व होने चाहिए. उन्होंने लगातार ज्यादा तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड खाने से बचने की सलाह दी है. उनका कहना है कि किसी एक ‘सुपरफूड’ पर निर्भर रहने के बजाय ऐसी संतुलित डाइट लेनी चाहिए, जिसमें शरीर की जरूरत के हिसाब से सभी जरूरी पोषक तत्व मिल सकें.

हेल्दी एजिंग के लिए मानसिक सेहत को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. डॉ. पीयूष ने माइंडफुलनेस, योग और ध्यान जैसी गतिविधियों को भी जरूरी बताया है. उनके मुताबिक जब व्यक्ति अपने तनाव को संभालना सीखता है और मानसिक रूप से शांत रहने की कोशिश करता है, तो इसका फायदा पूरी सेहत पर पड़ता है. योग, ध्यान और माइंडफुलनेस जैसी आदतें वर्तमान समय पर ध्यान लगाने और मन को शांत रखने में मदद कर सकती हैं.

डॉ. पीयूष बताते हैं कि कम उम्र में डायबिटीज और दिल की बीमारियों जैसे मामले बढ़ते देख उनके मन में एजिंग रिसर्च को लेकर रुचि पैदा हुई. उनके लिए सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कोई व्यक्ति कितने साल तक जीता है, बल्कि यह भी है कि वह अपनी जिंदगी के कितने साल स्वस्थ और सक्रिय रहकर जीता है. इसी सोच के साथ उन्होंने एजिंग और रिवर्स एजिंग से जुड़े वैज्ञानिक शोध के क्षेत्र में कदम बढ़ाया. उनका फोकस उम्र बढ़ने के साथ शरीर में होने वाले बदलावों को बेहतर तरीके से समझने और लोगों को लंबे समय तक स्वस्थ व सक्रिय जीवन जीने के तरीकों को समझने पर है.

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September 19, 2026, 18:54 IST

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