मदिरापान करने वाली माता देती हैं ‘पाती’, राजा भी नहीं सुलझा सके मदिरा का रहस्य

Last Updated:October 11, 2026, 12:57 IST
Tonk Dunja Mata Temple: राजस्थान के टोंक जिले के दूनी कस्बे में स्थित दूणजा माता का मंदिर अपने चमत्कार के लिए प्रसिद्ध है. नवरात्रि में यहां भक्तों का तांता लगा रहता है. मान्यता है कि मन्नत पूरी होने पर माता को मदिरा का भोग लगाया जाता है और माता स्वयं मदिरापान करती हैं. जब भक्त कोई मुराद मांगते हैं, तो माता उन्हें ‘पाती’ यानी एक फूल की पंखुड़ी गिराकर आशीर्वाद देती हैं. तत्कालीन राजा ने भी मदिरापान का रहस्य जानने के लिए मंदिर के नीचे खुदाई करवाई थी, लेकिन चमत्कार का कोई सुराग नहीं मिल सका. यह आस्था का बड़ा केंद्र है.
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Dunja Mata Mandir: टोंक के इस मंदिर में कैसे मिलती है माता की पाती? शराब के भोग और अनोखी परंपरा की पूरी कहानी
टोंक: राजस्थान के टोंक जिले में आस्था और चमत्कार का एक ऐसा अनूठा केंद्र स्थित है, जिसके रहस्य को आज तक कोई नहीं सुलझा सका है. टोंक जिले के दूनी कस्बे में तालाब के किनारे स्थित दूणजा माता का मंदिर अपनी अद्भुत मान्यताओं के लिए देशभर में विख्यात है. शारदीय नवरात्रि के इस खास मौके पर हम आपको दूणजा माता के इस चमत्कारिक दरबार के दर्शन करा रहे हैं. यूं तो सालभर इस मंदिर में भक्तों की भीड़ लगी रहती है, लेकिन नवरात्रि के नौ दिनों में यहां का नजारा बिल्कुल अलग होता है. टोंक जिले के साथ-साथ राजस्थान के कई अन्य जिलों से श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर यहां पहुंचते हैं. माता का यह दरबार कभी किसी को खाली हाथ नहीं लौटाता.
दूणजा माता मंदिर की सबसे बड़ी और अनोखी मान्यता यह है कि यहां माता मदिरापान करती हैं. जी हां, सुनने में भले ही यह अटपटा लगे, लेकिन भक्तों का दावा है कि माता रानी मदिरा का भोग स्वीकार करती हैं. जब किसी भक्त की मुराद पूरी हो जाती है, तो वह श्रद्धापूर्वक माता के दरबार में आता है और उन्हें मदिरा यानी शराब की बोतल भेंट करता है. स्थानीय लोगों और पुजारियों के अनुसार, जैसे ही शराब की बोतल माता की मूर्ति के मुंह से लगाई जाती है, बोतल पल भर में ही खाली होने लगती है. माता के इस मदिरापान चमत्कार को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं. मनोकामना पूरी होने पर भक्त शराब के साथ-साथ मां को पोशाक भी चढ़ाते हैं और सवामणि का आयोजन करते हैं.
‘पाती’ मिलने पर पक्का हो जाता है काममदिरापान के अलावा, दूणजा माता मंदिर में ‘पाती’ मांगने की एक बहुत ही खास और प्राचीन परंपरा है. इस परंपरा पर लोगों का अटूट विश्वास है. जो भी भक्त मंदिर में पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ माता के दरबार में अपने किसी विशेष काम की अर्जी लगाता है, उसे माता पाती के रूप में अपना आशीर्वाद देती हैं. जिसे पाती मिल गई, यह मान लिया जाता है कि उसका काम शत-प्रतिशत पूरा हो जाएगा. पाती वास्तव में माता की पोशाक से गिरने वाली एक फूल की पंखुड़ी होती है. जब कोई भक्त अपने काम की पाती मांगता है, तो वह माताजी के सामने पुजारी के माध्यम से एक सादा कागज रख देता है. इसके बाद पुजारी माता से अरदास करता है. यदि उस भक्त का काम सफल होने वाला होता है, तो चमत्कारिक रूप से माता की पोशाक में जड़े हुए फूलों में से एक पंखुड़ी टूटकर सीधे उस कागज पर गिर जाती है. मां की पाती मिलने के बाद काम के सफल होने की संभावना पूरी तरह पक्की मानी जाती है.
राजा भी नहीं जान पाए मदिरापान का रहस्यदूणजा माता के मदिरापान करने का यह रहस्य आज का नहीं, बल्कि सदियों पुराना है. इस रहस्य ने विज्ञान और तर्कशास्त्र को भी हैरान कर रखा है. मंदिर के पुजारी बताते हैं कि सालों पहले इस इलाके के तत्कालीन राजा ने भी माता के मदिरापान करने के इस रहस्य को जानने की भरपूर कोशिश की थी. राजा को संदेह था कि शायद मूर्ति के अंदर कोई पाइप या नाली बनी हुई है, जिससे शराब जमीन के अंदर चली जाती है. इस शंका को दूर करने के लिए राजा के आदेश पर मंदिर के नीचे चारों ओर गहरी खाई खुदवाई गई. कई दिनों तक खुदाई और जांच-पड़ताल की गई, लेकिन राजा और उनके सैनिकों को माता के मदिरापान का कोई भी सुराग नहीं मिला. जमीन के नीचे शराब की एक बूंद भी नहीं मिली. इस घटना के बाद राजा ने भी माता के चमत्कार को स्वीकार कर लिया. आज भी नवरात्रि के पावन अवसर पर दूणजा माता का दरबार पूरी तरह से सजा हुआ है और भक्तों की भारी भीड़ माता के जयकारे लगा रही है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Tonk,Tonk,Rajasthan
First Published :
October 11, 2026, 12:57 IST


