मारवाड़ की व्यापारिक लाइफलाइन है सुमेरपुर, अनाज और तिलहन कारोबार में मंडी की भूमिका, जानें खासियत

पाली. मारवाड़ की पावन धरा केवल शूरवीरों की गाथाओं और ऐतिहासिक किलों के लिए ही नहीं जानी जाती, बल्कि व्यापार और दूरदर्शिता की भी एक बड़ी मिसाल है. बात जब पाली जिले के सुमेरपुर की आती है, तो जेहन में सबसे पहले मारवाड़ की सबसे बड़ी कृषि मंडी की तस्वीर उभरती है. पश्चिमी राजस्थान के व्यापारिक नक्शे पर सुमेरपुर का नाम काफी अहम है. यहाँ स्थित महाराजा उम्मेद सिंह कृषि उपज मंडी पूरे मारवाड़ क्षेत्र में अनाज और तिलहन के व्यापार का सबसे बड़ा केंद्र मानी जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पश्चिमी राजस्थान का यह प्रमुख व्यापारिक हब कभी जोधपुर के दूरदर्शी महाराजा सुमेर सिंह के सपनों का शहर हुआ करता था? 20वीं सदी की शुरुआत में जोधपुर रियासत के महाराजा सुमेर सिंह ने इस इलाके के व्यापारिक और सामरिक महत्व को भांपते हुए इसे बसाने की नींव रखी थी. उन्हीं के नाम पर इस शहर का नाम ‘सुमेरपुर’ पड़ा.
तत्कालीन महाराजा सुमेर सिंह का सपना था कि मारवाड़ और मेवाड़ के सीमावर्ती क्षेत्र में एक ऐसा आधुनिक व्यापारिक केंद्र बने, जो पूरे अंचल के किसानों और व्यापारियों की किस्मत बदल दे. उनके बाद तत्कालीन महाराजा उम्मेद सिंह ने इस सोच को आगे बढ़ाया और यहां ‘महाराजा उम्मेद सिंह कृषि उपज मंडी’ की स्थापना की, जो आज पूरे पश्चिमी राजस्थान के अनाज और तिलहन व्यापार की लाइफलाइन बन चुकी है.
किसानों के उत्पादों को सही बाजार देना उद्देश्यपाली जिले के दक्षिण-पश्चिमी छोर पर स्थित सुमेरपुर का नाम जोधपुर रियासत के 34वें शासक महाराजा सुमेर सिंह (1911–1918 ई.) के नाम पर पड़ा है. 20वीं सदी की शुरुआत में जब मारवाड़ में रेल नेटवर्क और व्यापारिक मार्गों का विस्तार हो रहा था, तब महाराजा सुमेर सिंह ने मेवाड़ (उदयपुर), सिरोही और मारवाड़ की सीमाओं के संगम पर स्थित इस रणनीतिक स्थान को चुना. उनका उद्देश्य एक ऐसा व्यवस्थित शहर बसाना था जो स्थानीय किसानों के उत्पादों को सही बाजार दे सके और मारवाड़-मेवाड़ व्यापार का मुख्य पड़ाव बन सके.
महाराजा उम्मेद सिंह कृषि उपज मंडी’ का जन्ममहाराजा सुमेर सिंह के निधन के बाद जोधपुर की बागडोर संभालने वाले महाराजा उम्मेद सिंह ने अपने पूर्वज की सोच को धरातल पर उतारा. सुमेरपुर में व्यापार को संगठित रूप देने के लिए विशाल कृषि मंडी की नींव रखी गई, जिसका नाम ‘महाराजा उम्मेद सिंह कृषि उपज मंडी’ रखा गया.
सुमेरपुर कृषि मंडी की खासियत और राष्ट्रीय स्तर पर पहचानगेहूं, सरसों और जीरे का प्रमुख हब: सुमेरपुर मंडी पूरे मारवाड़ (पाली, जालौर, सिरोही, बाड़मेर) के साथ-साथ पड़ोसी राज्य गुजरात के सीमावर्ती क्षेत्रों के किसानों के लिए सबसे बड़ा बिक्री केंद्र है. यहां का ‘सुमेरपुरिया गेहूं’, सरसों, जीरा, अरंडी और तिलहन राष्ट्रीय स्तर पर अपनी गुणवत्ता के लिए जाने जाते हैं.
गुजरात और मेवाड़ से कनेक्टिविटी: रेलवे लाइन और फोरलेन हाईवे से जुड़ा होने के कारण यहां से खाद्यान्न सीधे गुजरात के बंदरगाहों और दक्षिण भारत के राज्यों तक सप्लाई होता है.
घी, मर्चेंट और ऑटोमोबाइल हब: कृषि मंडी के अलावा सुमेरपुर शुद्ध देशी घी के व्यापार, किराना-मर्चेंट और ऑटोमोबाइल पार्ट्स के बहुत बड़े थोक बाजार के रूप में भी पूरे राजस्थान में प्रसिद्ध है.
जवाई बांध का वरदानमहाराजा उम्मेद सिंह ने ही मारवाड़ को अकाल से उबारने के लिए ‘जवाई बांध’ का निर्माण कार्य शुरू कराया था. जवाई बांध से सिंचाई की सुविधा मिलते ही सुमेरपुर और आसपास के क्षेत्रों में कृषि उत्पादन में जबरदस्त उछाल आया, जिसने इस कृषि मंडी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया.



