मुर्गियां क्यों कम दे रही हैं अंडे? लगातार घटते प्रोडक्शन की वजह आखिर क्या है, मौसम वाला फैक्टर क्या

मलेशिया की गिनती दुनिया के उन देशों में होती है, जहां अंडों का प्रोडक्शन बड़ी तादाद में होता है. हालांकि बीते कुछ समय से वहां पर अंडों का उत्पादन लगातार घटता जा रहा है. देश में मुर्गियों के अंडे देने की क्षमता में अचानक आई गिरावट और पोल्ट्री पक्षियों की बढ़ती मौत से किसान तो परेशान हैं हीं. इसने सरकार और प्रशासन सभी को हैरत में डाल दिया है. इसकी वजह पर बात होने लगी है. मलेशिया में एक तो भीषण गर्मी पड़ रही है और तो और पड़ोसी देश इंडोनेशिया के जंगलों में आग लगी हुई है. इससे धुंध जैसा हेज (Haze) मौसम हो गया है, जिसको जहरीला बताया जा रहा है. इस अजीबोगरीब धुंध ने पोल्ट्री इंडस्ट्री को संकट में डाल दिया है. आखिर ऐसा क्यों है, आइए वजह पर गौर फरमाते हैं.
अंडे के प्रोडक्शन में गिरावट हुई है. भीषण गर्मी और धुंध के प्रभाव की वजह से मुर्गियां कम खा रही हैं, जिससे उनके अंडा देने की क्षमता प्रभावित हुई है. इसका असर ब्रॉयलर मुर्गियों पर दिख रहा है. मांस के लिए पाली जाने वाली मुर्गियों को अपना तयशुदा वजन हासिल करने में सामान्य से एक हफ्ता अधिक का समय लग रहा है.
इसकी सबसे ज्यादा मार छोटे किसानों पर पड़ी है. खुले दड़बों यानी ओपन शेड वाले छोटे किसान सबसे अधिक प्रभावित हैं, जबकि मॉडर्न क्लाइमेट-कंट्रोल पोल्ट्री फार्म्स स्थिति को बेहतर तरीके से संभाल पा रहे हैं. इसका असर कीमतों पर भी पड़ा है. सप्लाई चेन प्रभावित होने के कारण स्थानीय बाजारों में अंडों के दाम बढ़ने की खबरें आ रही हैं.
धुंध और भीषण गर्मी की दोहरी मारमलेशिया और इंडोनेशिया में इस साल गर्मी के मौसम के साथ-साथ अगस्त से इंडोनेशिया के जंगलों में लगी आग से निकला हुआ धुआं सीमा पार करके मलेशिया पहुंच गया है. हवा में मौजूद प्रदूषक के कणों PM 2.5 और अत्यधिक तापमान के कारण जानवरों के हेल्थ पर विपरीत असर पड़ा है.
मलेशियाई पोल्ट्री एसोसिएशन के प्रमुख जैफुल जकारिया ने बताया कि छोटे और पारंपरिक नस्ल पालने वाले किसानों ने बड़ी संख्या में मुर्गियों के नुकसान की सूचना दी है. खुले दड़बों में हवा के खराब बहाव और जहरीले धुएं के कारण पक्षियों को सांस लेने और खुद को ठंडा रखने में भारी परेशानी हो रही है.
मुर्गियों में ‘हीट स्ट्रेस’ और वैज्ञानिक रिसर्चएक्सपर्ट्स के अनुसार जब तापमान और एयर पल्यूशन बढ़ता है, तो मुर्गियां खाना कम कर देती हैं. भोजन कम मिलने से उनके शरीर में अंडे बनाने के लिए जरूरी ऊर्जा और पोषक तत्वों की कमी हो जाती है. इसके अलावा कॉर्टिकोस्टेरॉन नामक तनाव से हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है, जिससे उनका इम्यून सिस्टम और अंडा देने की प्रक्रिया पर असर पड़ता है.
इसको लेकर रिसर्च भी की गई है. इसके आंकड़े बताते हैं कि थाइलैंड की चांग माई राजभट यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स की तरफ से की गई स्टडी के अनुसार मुर्गियों को अगर 150 µg/m³ (माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर) के PM 2.5 लेवल में 3 दिनों तक रखा जाए, तो उनके डेली के वजन में 5.2 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है.
धुंध और गर्मी से क्यों घट रहा अंडों का उत्पादन?
मुर्गियों में स्ट्रेस: तापमान में बहुत अधिक बढ़ोत्तरी और हवा में धुंध की परत जमने के कारण मुर्गियों में ‘हीट स्ट्रेस’ बढ़ गया है. इसके चलते मुर्गियां भोजन कम खा रही हैं. भोजन की मात्रा में गिरावट आने से शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो जाती है, जिसका सीधा असर उनके अंडा देने के साइकल पर पड़ता है.
सांस लेने में तकलीफ और बीमारियां: हवा की क्वालिटी खराब होने और धुंध के कणों की वजह से मुर्गियों के सांस लेने वाले तंत्र पर असर पड़ा है. इससे मुर्गियां कमजोर हो रही हैं और उनके अंडे देने की क्षमता घटने के साथ-साथ अंडों के छिलके यानी एग शेल की क्वालिटी भी प्रभावित हो रही है.
मुर्गियों की मौत: एक्सपर्ट्स का ऐसा कहना है कि अत्यधिक गर्मी और धुंध का यह दोहरा संकट ना केवल अंडों के आकार और संख्या को कम कर रहा है, बल्कि मुर्गियों की मृत्यु दर को भी बढ़ा रहा है.
पोल्ट्री किसानों की बढ़ी लागतबढ़ते तापमान और धुंध से पोल्ट्री फार्म्स को बचाने के लिए किसानों को अतिरिक्त इंतजाम करने पड़ रहे हैं. फार्म को ठंडा रखने के लिए कूलिंग पैड, बड़े पंखे, जनरेटर और पानी के छिड़काव के सिस्टम को लगातार चलाना पड़ रहा है, जिससे बिजली और मेंटेनेंस की लागत काफी बढ़ गई है. कई फार्मों में दोपहर के समय बर्फ का उपयोग कर तापमान को कंट्रोल किया जा रहा है.
सप्लाई चेन और बाजार पर असरफिलहाल एक्सपर्ट्स का ऐसा मानना है कि कुछ समय की गर्मी या धुंध से तुरंत पूरे देश में अंडों की भारी किल्लत नहीं होगी. हालांकि अगर धुंध और एलब्रिनो के प्रभाव से तापमान लंबे समय तक बढ़ा रहता है, तो पूरे साउथ ईस्ट एशिया में अंडों की सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है, जिससे बाजार में अंडों के दाम बढ़ने की पूरी संभावना है.
मलेशिया सरकार ने भी पुष्टि की है कि मंत्रालय को अत्यधिक गर्म मौसम की वजह से मुर्गियों की मृत्यु दर में बढ़ोत्तरी और अंडे के उत्पादन में कमी की रिपोर्ट मिली है. डिमांड में बदलाव ना होने और सप्लाई कम होने से अंडों की कीमतों पर दबाव बना हुआ है. हालांकि प्रशासन का कहना है कि स्थिति फिलहाल कंट्रोल में है.
किसानों के उपाय और चुनौतियां
प्रशंसक और वेंटिलेशन: किसान अपने दड़बों में वेंटिलेशन फैन लगा रहे हैं और हवा का फ्लो सुधारने के लिए कंस्ट्रक्शन में बदलाव कर रहे हैं.
साफ पानी की उपलब्धता: एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि किसानों को पशुओं के लिए साफ और ठंडे पानी की लगातार आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए.
लागत में बढ़ोतरी: वेंटिलेशन और पानी के इंतजाम के चलते छोटे किसानों की उत्पादन लागत काफी बढ़ गई है. इसका असर साफ तौर पर नजर में आ रहा है.



