‘मेरा अपहरण नहीं हुआ’, फिर भी निर्दलीय को ले जाने पर अड़ी पुलिस, अलवर में रिसॉर्ट के बाहर हंगामा

अलवर. नगर निकाय चुनाव की मतगणना से पहले बोर्ड बनाने के लिए पार्षद प्रत्याशियों को अपने पाले में रखने की कोशिश तेज हो गई है. अलवर के रामगढ़ नगर पालिका क्षेत्र में कांग्रेस की बाड़ेबंदी के दौरान अकबरपुर के धवाला रिसॉर्ट में हंगामा हो गया. अकबरपुर और रामगढ़ थाना पुलिस की टीम वार्ड 10 से निर्दलीय प्रत्याशी योगेश मिश्रा को अपने साथ ले जाने पहुंची. पुलिस का कहना था कि योगेश के अपहरण की शिकायत मिली है. हालांकि योगेश ने पुलिस के सामने स्पष्ट कर दिया कि उसका कोई अपहरण नहीं हुआ है और वह अपनी मर्जी से कांग्रेस की बाड़ेबंदी में आया है
. पुलिस उसे साथ ले जाने की कोशिश करती रही, जबकि कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता विरोध करते रहे. इस दौरान दोनों पक्षों में नोकझोंक और खींचतान हुई. कभी पुलिस योगेश को अपनी ओर खींचती नजर आई तो कभी कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता उन्हें अपनी ओर खींचते रहे. करीब एक घंटे तक चले हंगामे के बाद पुलिस योगेश को साथ ले जाने में सफल नहीं हो सकी और लौट गई. कांग्रेस ने कार्रवाई को लेकर सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाए.
पुलिस बोली- अपहरण की शिकायत मिली, प्रत्याशी ने किया इनकार
पुलिस की टीम जब धवाला रिसॉर्ट पहुंची तो उसने वार्ड 10 के निर्दलीय प्रत्याशी योगेश मिश्रा को अपने साथ ले जाने की कोशिश की. पुलिस के अनुसार योगेश के अपहरण की शिकायत मिली थी. हालांकि मौके पर योगेश ने पुलिस के सामने ही कहा कि उसका कोई अपहरण नहीं हुआ है. वह अपनी इच्छा से कांग्रेस की बाड़ेबंदी में आया है और यहीं रहना चाहता है. इसके बाद भी पुलिस योगेश को अपने साथ ले जाने का प्रयास करती रही. कांग्रेस नेता और कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया. इस दौरान पुलिस और कांग्रेस नेताओं के बीच काफी देर तक बहस और खींचतान होती रही. करीब एक घंटे तक चले घटनाक्रम के बाद पुलिस योगेश को अपने साथ नहीं ले जा सकी और वापस लौट गई.
राजस्थान में नहीं चलेगी किसी की तानाशाही
टीकाराम जूली ने भी उठाया बाड़ेबंदी और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया. टीकाराम जूली ने भी इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस की ओर से पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि सरकार पुलिस और प्रशासन के जरिए तानाशाही कर रही है, जो कतई उचित नहीं है. राजस्थान के अंदर कभी ऐसी परंपरा नहीं रही है. अलवर में महिला प्रत्याशी को ले जाने आई पुलिस पीटते-पीटते रह गई. अलवर और करौली के अलावा पूर प्रदेश से इस तरह की कार्रवाई की सूचना आ रही है. उन्होंने भाजपा सरकार पर चुनाव में चोरी करने का आरोप लगाया. ईवीएम में वीवीपैट नहीं लगाने का भी मुद्दा उठाया. साथ ही मतदान के दौरान फर्जीवाड़े का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि तानाशाही के साथ गुंडागर्दी नहीं चलेगी.
आर्यन जुबेर खान बोले- सरकार के दबाव में काम कर रहा प्रशासन
रामगढ़ से कांग्रेस के पूर्व विधानसभा प्रत्याशी आर्यन जुबेर खान ने पुलिस और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के साथ रह रहे निर्दलीय प्रत्याशियों पर दबाव बनाया जा रहा है. उनका आरोप है कि पुलिस और प्रशासन सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं और किसी भी तरह भाजपा का बोर्ड बनवाने की कोशिश की जा रही है. आर्यन जुबेर खान ने कहा कि यदि कोई पार्षद प्रत्याशी अपनी इच्छा से कांग्रेस के साथ रह रहा है तो पुलिस द्वारा उसे वहां से ले जाने की कोशिश करना गलत है. उन्होंने कहा कि प्रत्याशी अपनी इच्छा से कांग्रेस के साथ हैं और उन्हें किसी तरह का दबाव नहीं है.
जयपुर के बाद अलवर में फिर सामने आया बाड़ेबंदी विवाद
नगर निकाय चुनाव में बाड़ेबंदी को लेकर यह दूसरा बड़ा मामला है. शुक्रवार को जयपुर के तुंगा स्थित एक रिसॉर्ट में कांग्रेस की बाड़ेबंदी में वन विभाग के अधिकारी, पुलिसकर्मी और भाजपा से जुड़े लोगों के पहुंचने का मामला सामने आया था. वहां से एक निर्दलीय प्रत्याशी को अपने साथ अलवर लाया गया था. इसके बाद अब अकबरपुर के धवाला रिसॉर्ट में कांग्रेस की बाड़ेबंदी के दौरान पुलिस के पहुंचने और निर्दलीय प्रत्याशी को ले जाने की कोशिश से फिर हंगामा हो गया. लगातार सामने आ रहे इन घटनाक्रमों से साफ है कि नगर निकाय चुनाव में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बेहद अहम हो गई है.
14 सितंबर को आएंगे निकाय चुनाव के नतीजे
राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के नतीजे 14 सितंबर को घोषित होने हैं. इससे पहले कांग्रेस और भाजपा दोनों अपने-अपने समर्थन वाले पार्षदों को एकजुट रखने में जुटी हैं. बोर्ड बनाने के लिए निर्दलीय पार्षदों का समर्थन निर्णायक साबित हो सकता है. इसी वजह से चुनाव परिणाम से पहले बाड़ेबंदी और प्रत्याशियों को अपने पाले में रखने को लेकर राजनीतिक खींचतान लगातार बढ़ती जा रही है.



