मोटापा और डायबिटीज से है बचना, तो यहां न्यूट्रिशनिस्ट से समझें कैसी हो आपकी थाली

फरीदाबाद: भारत में आज पोषण की तस्वीर थोड़ी उलझी हुई है. एक तरफ बच्चों और महिलाओं में कुपोषण और पोषक तत्वों की कमी की समस्या है, तो दूसरी तरफ मोटापा, डायबिटीज और हाई BP जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं. कई लोग पेट भरकर खाना खाते हैं, लेकिन फिर भी शरीर को जरूरी प्रोटीन, विटामिन और मिनरल नहीं मिल पाते. इसकी बड़ी वजह हमारी बदलती खान-पान की आदतें हैं. ज्यादा तेल, नमक, चीनी और पैकेज्ड फूड हमारी थाली का हिस्सा बनते जा रहे हैं, जबकि फल, सब्जियां और दाल जैसी चीजें कम होती जा रही हैं. इसके साथ ही शारीरिक मेहनत भी पहले के मुकाबले कम हो गई है.पोषण माह आम लोगों के लिए क्यों जरूरी है.
Local18 से बातचीत में फरीदाबाद के अमृता अस्पताल की चीफ क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट और क्लिनिकल न्यूट्रिशन विभाग की प्रमुख डॉ. चारु दुआ ने बताया कि पोषण माह को समझने से पहले यह समझना जरूरी है कि न्यूट्रिशन क्या है. आम तौर पर लोग खाना खाने को ही पोषण समझ लेते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है. सिर्फ पेट भरना जरूरी नहीं है, बल्कि शरीर को सही मात्रा में जरूरी पोषक तत्व मिलना भी जरूरी है. बच्चों के लिए सही पोषण ग्रोथ और डेवलपमेंट के लिए जरूरी है, जबकि बड़ों के लिए यह शरीर को स्वस्थ रखने और कई बीमारियों से बचाने में मदद करता है.
सितंबर में मनाया जाता है राष्ट्रीय पोषण माह
डॉ. चारु दुआ बताते हैं कि पोषण जागरूकता की शुरुआत पहले एक दिन से हुई थी. इसके बाद 1982 में पहली सितंबर को पोषण सप्ताह के तौर पर मनाया गया. बाद में साल 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इसे एक सप्ताह से बढ़ाकर पूरे महीने का कार्यक्रम बनाया गया. तभी से हर साल सितंबर में राष्ट्रीय पोषण माह मनाया जाता है. इसका मकसद सिर्फ कुपोषण पर बात करना नहीं है, बल्कि ज्यादा वजन, मोटापा और गलत खान-पान से होने वाली समस्याओं के बारे में भी लोगों को जागरूक करना है. कोशिश यह है कि पोषण सिर्फ सरकार का कार्यक्रम न रहे, बल्कि जन आंदोलन बने और हर परिवार अपने खाने को लेकर जागरूक हो.भरपेट खाने के बाद भी हो सकती है पोषण की कमी.
डॉ. चारु दुआ बताती हैं कि पेट भरकर खाना खाने के बाद भी शरीर में पोषण की कमी हो सकती है. अगर किसी व्यक्ति ने कार्बोहाइड्रेट ज्यादा खाया, लेकिन प्रोटीन, विटामिन और मिनरल कम लिए, तो शरीर को पूरा पोषण नहीं मिलेगा. खासकर बच्चों के लिए प्रोटीन और दूसरे पोषक तत्व ग्रोथ और डेवलपमेंट के लिए बेहद जरूरी हैं. वहीं अगर खाने में जरूरत से ज्यादा कार्बोहाइड्रेट और कैलोरी हो, तो वजन बढ़ सकता है. वजन बढ़ने के साथ हाई BP, डायबिटीज और फैटी लिवर जैसी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है.
मोटापा और डायबिटीज क्यों बढ़ रही है
डॉ. चारु दुआ के अनुसार भारत में खान-पान की आदतों में बड़ा बदलाव आया है. पहले घर का बना खाना ज्यादा खाया जाता था, लेकिन अब बाहर का खाना और ऑनलाइन फूड ऑर्डर करने का चलन बढ़ गया है. खाने में फैट और कैलोरी बढ़ रही है, जबकि फल और सब्जियों की मात्रा कम होती जा रही है. इसके साथ शारीरिक गतिविधि भी घट गई है. पहले लोग बाजार तक पैदल चले जाते थे, लेकिन अब छोटी दूरी के लिए भी गाड़ी का इस्तेमाल करते हैं. यही बदलाव धीरे-धीरे मोटापा, डायबिटीज और हाई BP जैसी बीमारियों को बढ़ा रहे हैं.
रोज की थाली कैसी होनी चाहिए
डॉ. चारु दुआ बताती हैं कि हमारी रोज की थाली संतुलित होनी चाहिए. थाली का करीब आधा हिस्सा फल और सब्जियों का होना चाहिए. एक चौथाई हिस्से में प्रोटीन होना चाहिए, जिसमें दाल, पनीर और दूसरे अच्छे प्रोटीन स्रोत शामिल किए जा सकते हैं. बाकी एक चौथाई हिस्से में कार्बोहाइड्रेट यानी रोटी, चावल या अन्य अनाज रखे जा सकते हैं. इसके साथ रोज एक मुट्ठी नट्स भी लिए जा सकते हैं. दूध और दही को भी डाइट में शामिल किया जा सकता है.
तेल और जंक फूड पर भी रखना होगा ध्यान
डॉ. चारु दुआ कहती हैं कि खाने में तेल की मात्रा को भी नियंत्रित रखना जरूरी है. एक व्यक्ति के लिए महीने में करीब आधा किलो तेल पर्याप्त हो सकता है. अगर कोई व्यक्ति अपने खाने में तेल की मात्रा को सिर्फ 10 प्रतिशत भी कम कर देता है, तो यह अच्छी शुरुआत हो सकती है. इसके साथ ही जंक फूड, सोडा और जरूरत से ज्यादा मीठे खाद्य पदार्थों का सेवन कम करना जरूरी है. सही पोषण का मतलब कम खाना नहीं है, बल्कि सही मात्रा में सही चीजें खाना है.
पोषण सिर्फ पेट भरने का नाम नहीं
पोषण माह का सबसे बड़ा संदेश यही है कि खाना सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए खाना चाहिए. हमारी थाली में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, हेल्दी फैट, विटामिन और मिनरल का सही संतुलन होना जरूरी है. अगर आज हम अपनी थाली पर ध्यान देंगे और रोज थोड़ा चलने, व्यायाम करने और घर का संतुलित खाना खाने की आदत बनाएंगे…तो कई बीमारियों से बचाव में मदद मिल सकती है.



