रविंद्र भाटी की EWS सरलीकरण यात्रा; जानें आरक्षण नियम बदलने को लेकर क्या मांग कर रहे?

बाड़मेर. शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS आरक्षण के नियमों में बदलाव और उन्हें आसान बनाने की मांग को लेकर पांच दिवसीय यात्रा पर निकले हैं. 25 सितंबर से बाड़मेर के आलोक आश्रम से शुरू हुई यह यात्रा पश्चिमी राजस्थान के अलग-अलग इलाकों से होकर जोधपुर में समाप्त होनी है. यात्रा के दौरान EWS प्रमाण-पत्र, पात्रता के नियम और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने जैसे मुद्दे उठाए जा रहे हैं.
भाटी की इस यात्रा को मीडिया और स्थानीय स्तर पर EWS सरलीकरण यात्रा के तौर पर देखा जा रहा है. उनका कहना है कि EWS व्यवस्था का फायदा वास्तविक रूप से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों तक पहुंचना चाहिए और इसके लिए मौजूदा नियमों में व्यावहारिक बदलाव की जरूरत है. यात्रा में सवर्ण समाज और आम लोगों के बीच सभाएं और जनसंवाद भी किए जा रहे हैं.
बाड़मेर से शुरू हुआ सफर, पश्चिमी राजस्थान में पड़ाव
25 सितंबर को बाड़मेर से शुरू हुई यात्रा का मकसद सिर्फ एक जगह सभा करना नहीं है. यात्रा के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों से EWS व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर बात की जा रही है. बाड़मेर के बाद यात्रा पाली और जालोर समेत पश्चिमी राजस्थान के कई इलाकों से होकर आगे बढ़ रही है और इसका समापन जोधपुर में प्रस्तावित है. यात्रा के दौरान बाड़मेर, फालना, सादड़ी, पाली के राजा पार्क और जालोर में सभाओं और जनसंवाद का कार्यक्रम रखा गया. इन जगहों पर सवर्ण समाज के लोगों के साथ आमजन भी भाटी की बात सुनने पहुंचे. स्थानीय स्तर पर यात्रा को लेकर लोगों में उत्सुकता भी देखी जा रही है.
EWS नियम आसान करने की मांग
रविंद्र सिंह भाटी का मुख्य जोर EWS आरक्षण के नियमों को सरल बनाने पर है. उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में ऐसे नियम हैं, जिनके कारण आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को भी इसका लाभ लेने में परेशानी आती है. भाटी ने EWS के लिए पांच एकड़ जमीन की शर्त पर भी सवाल उठाए हैं. पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर-जैसलमेर जैसे इलाकों में जमीन की स्थिति और उसकी आर्थिक उपयोगिता दूसरे क्षेत्रों से अलग है. भाटी का तर्क है कि केवल जमीन का क्षेत्रफल देखकर किसी परिवार की आर्थिक स्थिति तय करना ठीक नहीं है. कृषि उत्पादकता, सिंचाई और जमीन की वास्तविक उपयोगिता जैसे पहलुओं को भी देखा जाना चाहिए.
राज्य सरकार से EWS वैधता बढ़ाने की मांगउनकी ओर से EWS प्रमाण-पत्र की वैधता बढ़ाने और राज्य सरकार की ओर से जारी प्रमाण-पत्र को केंद्र की नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में मान्यता देने की मांग भी उठाई गई है. इसके अलावा आय तय करने की प्रक्रिया को आसान करने, प्रतियोगी परीक्षाओं में राहत और EWS वर्ग को पंचायती राज संस्थाओं में प्रतिनिधित्व देने की मांग भी सामने रखी गई है.
राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी साथभाटी की यात्रा में EWS वर्ग के लिए राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी प्रमुख है. उनका कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए सिर्फ नौकरी और शिक्षा में आरक्षण की बात काफी नहीं है, बल्कि पंचायत राज व्यवस्था में भी उन्हें उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए. इसी वजह से यात्रा में EWS वर्ग के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग को भी प्रमुखता से उठाया जा रहा है. भाटी ने चुनावों में बढ़ते खर्च का मुद्दा भी उठाया है. उनका तर्क है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए चुनाव लड़ना आसान नहीं है. ऐसे में सामान्य सीटों पर भी आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की भागीदारी कम रह जाती है. इसी बात को वह राजनीतिक प्रतिनिधित्व की अपनी मांग से जोड़ रहे हैं.
पंचायत चुनाव से पहले यात्रा के राजनीतिक मायनेरविंद्र सिंह भाटी की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब राजस्थान में पंचायती राज चुनाव की तैयारियां चल रही हैं. इसी वजह से उनकी EWS संबंधी पहल को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है. NDTV और अन्य रिपोर्टों ने भी यात्रा को पंचायत चुनाव से पहले पश्चिमी राजस्थान में भाटी की राजनीतिक सक्रियता से जोड़कर रिपोर्ट किया है. हालांकि भाटी लगातार इसे EWS व्यवस्था में सुधार और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को अधिकार दिलाने की पहल के रूप में पेश कर रहे हैं. उनका कहना है कि यह मुद्दा किसी एक जाति तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों से जुड़ा है.



