सीकर के बेरी पशु मेले में ऊंट ‘बादल’ और घोड़ी ‘सोनूड़ी’ का धमाल, पंजाब-हरियाणा से पहुंचे पशुपालक

Last Updated:October 02, 2026, 08:12 IST
Sikar Beri Pashu Mela details: सीकर जिले में आयोजित प्रसिद्ध बेरी पशु मेले में लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है. यह मेला 5 अक्टूबर तक आयोजित किया जाएगा. मेले में राजस्थान के अलावा पंजाब, हरियाणा और यूपी से भी पशुपालक पहुंचे हैं. यहां ऊंट ‘बादल’ और घोड़ी ‘सोनूड़ी’ के शानदार नृत्य व करतब मुख्य आकर्षण बने हुए हैं. मेले में पशुओं की खरीद-फरोख्त के साथ-साथ रात में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं. नेकीराम छावसरी और मांगीलाल पचार के प्रशिक्षित पशुओं ने जमकर वाहवाही बटोरी. 5 अक्टूबर को समापन पर पशुपालकों को सम्मानित किया जाएगा.
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Sikar: सीकर जिले के प्रसिद्ध बेरी पशु मेले में इन दिनों भारी उत्साह और चहल-पहल देखने को मिल रही है. राजस्थान की पारंपरिक संस्कृति और पशुधन प्रेम का यह मेला एक बार फिर अपनी अलग पहचान दर्ज करा रहा है. इस मेले में न केवल पशुओं की खरीद-फरोख्त हो रही है, बल्कि प्रशिक्षित पशुओं के हैरतअंगेज करतब और नृत्य भी दर्शकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बने हुए हैं. मेले का आयोजन 5 अक्टूबर तक चलेगा. हर दिन यहां आसपास के गांवों सहित दूर-दराज के क्षेत्रों से हजारों लोग पहुंच रहे हैं. स्थानीय प्रतिनिधि मनोज गुर्जर के अनुसार बेरी पशु मेला शेखावाटी अंचल के सबसे प्रसिद्ध और ऐतिहासिक मेलों में गिना जाता है. यहां पशुओं के व्यापार के साथ-साथ पारंपरिक दुकानों, खान-पान के स्टॉल और मनोरंजन के साधनों की वजह से मेला परिसर पूरी तरह गुलजार नजर आ रहा है.
बेरी पशु मेले की साख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें भाग लेने के लिए केवल सीकर या राजस्थान के अन्य जिलों से ही लोग नहीं आए हैं. पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में पशुपालक अपने बेहतरीन पशुओं के साथ पहुंचे हैं. मेले में विभिन्न उन्नत नस्लों के ऊंट, घोड़े, घोड़ियां और अन्य मवेशी देखने को मिल रहे हैं. इसके अलावा मेले में आया एक विशालकाय भैंसा भी दर्शकों के बीच विशेष कौतुहल का विषय बना हुआ है. बाहरी राज्यों से आए पशुपालक अपने पशुओं के लालन-पालन और प्रशिक्षण के अनुभवों को स्थानीय लोगों के साथ साझा कर रहे हैं, जिससे मेले का माहौल बेहद जीवंत हो गया है.
‘बादल’ और ‘सोनूड़ी’ का हैरतअंगेज डांस बनी चर्चा का विषयइस बार मेले में सबसे ज्यादा ध्यान ऊंट ‘बादल’ और घोड़ी ‘सोनूड़ी’ ने अपनी ओर खींचा है. अपने-अपने मालिकों के इशारों पर जिस तरह से बादल और सोनूड़ी ने लयबद्ध अंदाज में नृत्य प्रस्तुत किया, उसे देखकर दर्शक दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हो गए. नेकीराम छावसरी के ऊंट और घोड़ी ने कई अद्भुत करतब दिखाए, जिन्हें देखकर पूरा मेला परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा. इसी प्रकार मांगीलाल पचार के ऊंट और घोड़ी ने भी अपनी विशेष प्रस्तुतियों से जमकर वाहवाही लूटी. पशुपालकों ने बताया कि इन पशुओं को कई महीनों तक कठिन अभ्यास कराया जाता है, तब जाकर ये इतने कुशल बनते हैं.
रात में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और समापन पर सम्मानदिन के समय पशुओं की गतिविधियों और व्यापार के बाद रात में भी मेले की रौनक कम नहीं होती. शाम ढलते ही मेला परिसर में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत होती है. स्थानीय और प्रांतीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत लोक नृत्य और संगीत दर्शकों का भरपूर मनोरंजन कर रहे हैं. यह मेला 5 अक्टूबर तक आयोजित किया जाएगा. मेले के अंतिम दिन भव्य समापन समारोह आयोजित होगा. इसमें शानदार प्रदर्शन करने वाले ऊंटों और घोड़ियों के साथ-साथ उनके पशुपालकों को प्रशासन और मेला समिति की ओर से विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Sikar,Sikar,Rajasthan
First Published :
October 02, 2026, 08:12 IST



