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सात साल बाद भारत आए शी जिनपिंग, पीएम मोदी ने 3 शर्तों पर चीन को टेबल पर घेरा, जानिए इनसाइड स्टोरी

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सात साल बाद भारत आए जिनपिंग, PM मोदी ने 3 शर्तों पर चीन को घेरा, इनसाइड स्टोरी

Last Updated:September 12, 2026, 19:49 IST

नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स समिट के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हाई लेवल द्विपक्षीय बातचीत हुई. गलवान तनाव के बाद सात साल में पहली बार भारत आए जिनपिंग के सामने पीएम मोदी ने साफ कर दिया कि सीमा पर शांति के बिना रिश्ते आगे नहीं बढ़ सकते. भारत ने आपसी सम्मान, आपसी संवेदनशीलता और आपसी हित के तीन फॉर्मूलों पर रिश्ते चलाने की दो टूक बात कही. (Photos : PTI)

18वें ब्रिक्स समिट के दौरान भारत और चीन के शीर्ष नेताओं की सीधी मुलाकात हुई. गलवान झड़प के बाद पिछले सात सालों में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का यह पहला भारत दौरा है. पीएम नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच हुई इस द्विपक्षीय वार्ता में विदेश मंत्री एस जयशंकर और एनएसए अजित डोभाल भी मौजूद रहे. दोनों नेताओं ने अगस्त 2025 में तियानजिन में हुई पिछली मुलाकात के बाद रिश्तों की प्रगति की समीक्षा की. पीएम मोदी ने साफ शब्दों में चीन को संदेश दिया कि दोनों देशों के मतभेद किसी भी हाल में विवाद नहीं बनने चाहिए. भारत ने दो टूक रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि जब तक बॉर्डर पर पूरी शांति और मौजूदा समझौतों का पालन नहीं होगा, तब तक रिश्ते सामान्य नहीं हो सकते. दोनों देशों ने लंबे समय के रणनीतिक नजरिए पर फोकस करने की बात कही.

पीएम नरेंद्र मोदी ने वार्ता के दौरान द्विपक्षीय रिश्तों को पटरी पर लाने के लिए तीन बुनियादी नियमों का जिक्र किया. उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देशों को आपसी सम्मान, आपसी संवेदनशीलता और आपसी हित के रास्ते पर चलना होगा. जब तक चीन भारत की चिंताओं का सम्मान नहीं करेगा, तब तक भरोसा बहाल होना मुश्किल है. पीएम मोदी ने कहा, ‘दोनों देशों को अपने रिश्तों को लंबे समय के रणनीतिक नजरिए से देखना चाहिए.’ उन्होंने साफ किया कि पड़ोसी होने के नाते टकराव से किसी का भला नहीं होने वाला है. भारत ने साफ कर दिया कि सहयोग का रास्ता बराबरी की शर्तों पर ही तय होगा.

मोदी-जिनपिंग की मुलाकात में भारत और चीन के रिश्तों को मजबूत करने के लिए तीन ‘Mutuals’ यानी पारस्परिक सिद्धांतों पर जोर दिया गया है. इनमें Mutual Respect यानी पारस्परिक सम्मान, Mutual Sensitivity यानी पारस्परिक संवेदनशीलता और Mutual Interest यानी पारस्परिक हित शामिल हैं. इन तीनों सिद्धांतों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ाना है. भारत का मानना है कि रिश्तों में एक-दूसरे की चिंताओं और हितों का सम्मान जरूरी है. इससे सीमा समेत अन्य मुद्दों पर बातचीत का माहौल बेहतर हो सकता है.

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सीमा विवाद पर चर्चा के दौरान भारत का रुख बेहद सख्त और स्पष्ट नजर आया. पीएम मोदी ने जोर दिया कि बॉर्डर इलाकों में शांति और स्थिरता ही रिश्तों के विकास की मुख्य नींव है. दोनों पक्षों को पहले से तय सभी समझौतों और नियमों का पूरी ईमानदारी से पालन करना होगा. दोनों नेताओं ने सीमा से जुड़े जटिल मसलों का निष्पक्ष और दोनों पक्षों को स्वीकार्य समाधान निकालने पर सहमति जताई. बातचीत में यह तय हुआ कि राजनीतिक स्तर पर समझ बनाकर ही सीमा पर स्थायी शांति लाई जा सकती है. भारत ने दोहराया कि जब तक सीमा पर तनाव रहेगा, दोनों मुल्कों के रिश्ते सहज नहीं हो सकते.

सिर्फ सीमा ही नहीं, दोनों नेताओं के बीच आर्थिक और कारोबारी रिश्तों पर भी गंभीर चर्चा हुई. भारत ने चीन के साथ बढ़ते ट्रेड असंतुलन का मुद्दा काफी आक्रामकता से उठाया. भारतीय सामानों को चीनी बाजार में बेहतर और आसान पहुंच देने की मांग मजबूती से रखी गई. इसके साथ ही ग्लोबल सप्लाई चेन में आ रही रुकावटों को दूर करने पर भी बात हुई. दोनों पक्षों ने माना कि व्यापार में एकतरफा फायदा रिश्तों को नुकसान पहुंचाता है. आर्थिक सहयोग को टिकाऊ बनाने के लिए एक-दूसरे की बाजार से जुड़ी चिंताओं को तुरंत दूर करना जरूरी है.

गलवान घाटी की घटना के बाद यह पहला मौका है जब चीनी राष्ट्रपति ने भारत की धरती पर कदम रखा है. ब्रिक्स सम्मेलन की मेज पर जिनपिंग ने भी माना कि क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए दोनों देशों को साझा जमीन तलाशनी होगी. चीनी राष्ट्रपति ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की सराहना की और सम्मेलन की सफलता में समर्थन देने की बात कही. भारत ने पश्चिम एशिया के संकट और आतंकवाद जैसे गंभीर मुद्दों पर भी कड़ा संदेश दिया. साझा बयान में साफ किया गया कि आतंकवाद को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और टेरर फंडिंग पर पूरी दुनिया को एकजुट होकर प्रहार करना होगा.

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September 12, 2026, 19:41 IST

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