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Doomsday Glacier Melting: Glacier Melting Rapidly| मोम सा पिघल रहा है कयामत का ग्लेशियर लील लेगा बड़े-बड़े शहर वैज्ञानिकों की नई रिपोर्ट ने दी टेंशन

Last Updated:October 16, 2026, 18:04 IST

Doomsday Glacier Melting Fast: कुदरत ने कुछ ऐसी चीजें बनाई हैं, जिन्हें हम समझ ही नहीं पाते और ये हमारे बड़ा खतरा बनते जाते हैं. एक ऐसी कुदरती आपदा बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है. ये कुछ और नहीं बल्कि वैसा ही ग्लेशियर है, जिसके टूटने से हमने नेपाल में तबाही देखी. ये ग्लेशियर इससे कहीं बड़ा है और असर इससे कहीं ज्यादा व्यापक. मोम सा पिघल रहा है कयामत का ग्लेशियर! वैज्ञानिकों की नई रिपोर्ट ने दी टेंशनZoomकयामत का ग्लेशियर पिघलने की रफ्तार ने वैज्ञानिकों को डराया. (AI जेनरेटेड तस्वीर)

Why Doomsday Glacier Melting: अंटार्कटिका में मौजूद थ्वाइट्स ग्लेशियर तेजी से पिघल रहा है और वैज्ञानिकों को आशंका है कि इसका असर समुद्र के बढ़ते जलस्तर पर पहले के अनुमान से कहीं ज्यादा हो सकता है. अंदाजा पहले ही लगाया जा रहा था कि ग्लेशियर पिघल रहा है और इसकी वजह से कई शहरों पर खतरा मंडरा रहा है लेकिन इसकी गति जितनी तेज है, इतनी नहीं सोची गई थी. इसका आकार भारत के तमिलनाडु और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों जितना विशाल है, यही वजह है कि इसे ‘डूम्सडे ग्लेशियर’ यानी कयामत का ग्लेशियर कहा जाता है.

इस ग्लेशियर के पूरी तरह ढहने से समुद्र का जलस्तर दो फीट से अधिक बढ़ सकता है. इसके अलावा यह अंटार्कटिका की विशाल बर्फ की चादर को भी थामे हुए है. इसके कमजोर पड़ने से दुनिया के तटीय शहरों पर गंभीर खतरा मंडरा सकता है. कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी और नासा की जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी से जुड़े वैज्ञानिकों ने बर्फ की चादर को समझने के लिए नया मॉडल तैयार किया है. इसी रिसर्च में खुलासा हुआ कि ग्लेशियर के नीचे समुद्र और जमीन के संपर्क वाले हिस्से में हो रहे बदलाव उसकी स्थिरता को तेजी से प्रभावित कर रहे हैं.

तेजी से पिघल रही बर्फ, वैज्ञानिकों ने जताई चिंता

दुनिया के सबसे बड़े और खतरनाक ग्लेशियरों में शामिल थ्वाइट्स ग्लेशियर को लेकर वैज्ञानिकों ने नई चेतावनी दी है. पश्चिमी अंटार्कटिका में स्थित यह विशाल ग्लेशियर उम्मीद से ज्यादा तेजी से पिघल रहा है. नए शोध के मुताबिक इसके पिघलने की प्रक्रिया को समझने में अब तक इस्तेमाल किए गए कुछ वैज्ञानिक मॉडल वास्तविक खतरे को कम करके आंक रहे हो सकते हैं. इसका मतलब है कि भविष्य में समुद्र का जलस्तर बढ़ने का खतरा पहले के अनुमानों से कहीं ज्यादा गंभीर हो सकता है.

तेजी से पिघल रहा है ग्लेशियर. (सांकेतिक तस्वीर)

आखिर क्यों कहते हैं इसे कयामत का ग्लेशियर?

थ्वाइट्स ग्लेशियर को ‘डूम्सडे ग्लेशियर’ नाम इसलिए दिया गया है, क्योंकि इसके बड़े हिस्से के ढहने से समुद्र के जलस्तर में भारी बढ़ोतरी हो सकती है. वैज्ञानिक बताते हैं कि इसमें इतनी बर्फ मौजूद है कि इसके पूरी तरह पिघलने से वैश्विक समुद्र स्तर दो फीट से ज्यादा बढ़ सकता है. इसका खतरा यहीं खत्म नहीं होता. यह ग्लेशियर अंटार्कटिका की विशाल बर्फ की चादर को समुद्र की ओर तेजी से खिसकने से रोकने में भी अहम भूमिका निभाता है. अगर यह सहारा कमजोर पड़ता है, तो आसपास की बर्फ भी समुद्र में पहुंच सकती है. कुछ अनुमानों के मुताबिक अगर बर्फ ज्यादा पिघले तो थोड़े ही समय में समुद्र का स्तर करीब 10 फीट तक बढ़ने का खतरा हो सकता है. यह कोई तत्काल नहीं होगा लेकिन भविष्य की संभावित स्थिति है.

समुद्र में डूबने के खतरे में आ सकते हैं तटीय शहर

समुद्र का जलस्तर बढ़ने से तटीय इलाकों में बाढ़, जमीन के कटाव और समुद्री तूफानों के दौरान पानी भरने का खतरा बढ़ जाएगा. मियामी से लेकर मनीला तक दुनिया के कई तटीय शहरों को इसका सामना करना पड़ सकता हैय समुद्र के स्तर में मामूली बढ़ोतरी भी तूफानी लहरों के प्रभाव को ज्यादा विनाशकारी बना सकती है. शोध में यह भी सामने आया कि ग्लेशियर के नीचे मौजूद एक प्रमुख चट्टानी उभार पर बर्फ की पकड़ कमजोर हो रही है, जिसके छूटने से हालात और ज्यादा खराब हो जाएंगे.

विशेषज्ञों का कहना है कि ग्लेशियर के नीचे की परिस्थितियों को जानने के लिए और रिसर्च की जरूरत है. इसके साथ ही साफ चेतावनी दी गई है कि जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान को सीमित करने के लिए ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में तेजी से कटौती जरूरी है. आज उठाए गए कदम आने वाले दशकों में तबाही की गंभीरता को कम कर सकते हैं.

About the AuthorPrateeti Pandey

में इंटरनेशनल डेस्क पर कार्यरत हैं. टीवी पत्रकारिता का भी अनुभव है और इससे पहले Zee Media Ltd. में कार्य किया. डिजिटल वीडियो प्रोडक्शन की जानकारी है. टीवी पत्रकारिता के दौरान कला-साहित्य के साथ-साथ अंतरर…

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October 16, 2026, 18:04 IST

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