सुनने की हिम्मत रखो… यशस्वी जायसवाल और अशीथा फर्नांडो के विवाद में कूदे अजय जडेजा, भारतीय ओपनर को जमकर सुनाया

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सुनने की हिम्मत रखो! यशस्वी-अशीथा विवाद में कूदे जडेजा, ओपनर को ही जमकर सुनाया
Last Updated:August 24, 2026, 08:54 IST
Yashasvi Jaiswal-Asitha Fernando: भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो टेस्ट के पहले दिन यशस्वी जायसवाल और अशीथा फर्नांडो के बीच तीखी झड़प देखने को मिली. इस घटना के बाद भारतीय ओपनर यशस्वी की खूब आलोचना हो रही है. इस पूरे विवाद पर अब पूर्व अजय जडेजा ने यशस्वी को नसीहत देते हुए कहा कि अगर आप बैंटर करते हो तो सामने से सुनने की भी हिम्मत रखो.कोलंबो टेस्ट के पहले दिन यशस्वी और अशीथा के बीच हुई बहस
नई दिल्ली: कोलंबो टेस्ट के पहले दिन तब माहौल गर्म हो गया जब यशस्वी जायसवाल और असिथा फर्नांडो की झड़प गई. दोनों के बीच ये मामला सिर्फ जुबानी जंग तक ही नहीं रहा, वे इतने करीब आ गए कि दोनों में फिजिकल कॉन्टैक्ट हो गया. इस पूरे मामले को लेकर अब भारतीय टीम के ओपनर यशस्वी जायसवाल की जमकर आलोचना की जा रही है. यही कारण है कि पूर्व क्रिकेटर अजय जडेजा ने भी यशस्वी को इस तरह की हरकत से बचने की नसीहत दी है.
जडेजा ने यशस्वी को चेतावनी देते हुए कहा कि शारीरिक संपर्क एक खतरनाक सीमा को पार करने जैसा है. पूरा मामला यह था कि यशस्वी जायसवाल जब 45 रन बनाकर आउट हुए, तो असिथा फर्नांडो ने जश्न मनाते हुए उन पर कुछ कमेंट पास किया. इस पर भारतीय बल्लेबाज मुड़कर वापस आए और फिर दोनों में जुबानी जंग तेज हो गई. इस दौरान यशस्वी का हेलमेट फर्नांडो के माथे से टकराया और धक्का-मुक्की भी हुई. मामला गंभीर होते देख श्रीलंका के कप्तान धनंजय डी सिल्वा और अन्य खिलाड़ियों ने बीच-बचाव कर दोनों को अलग किया.
इस पूरे मामले पर अजय जडेजा ने क्या कहा?
यशस्वी और असिथा के बीच हुई झड़प पर अजय जडेजा ने अपनी प्रतिक्रिया दी. सोनी स्पोर्ट्स पर बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि यशस्वी को इस हद तक नहीं जाना चाहिए था. इसके साथ ही उन्होंने गॉल टेस्ट की याद दिलाते हुए कहा कि जब यशस्वी फील्डिंग कर रहे थे, तब उन्होंने निरोशन डिकवेला के साथ क्या किया था.
अजय जडेजा ने कहा, “यह एक खतरनाक दायरा है, इसमें कोई शक नहीं है. शारीरिक संपर्क एक बिल्कुल अलग बात है. पिछले मैच में जायसवाल दूसरी तरफ थे, वह फील्डिंग कर रहे थे और उन्होंने निरोशन डिकवेला से कुछ बातें कही थीं. तब हमने कहा था कि हल्की-फुल्की छींटाकशी तब तक अच्छी है जब तक भाषा में कुछ गलत न हो.”
छींटाकशी करते हो तो सुनने की हिम्मत रखो- जडेजा
इसके बाद उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जो खिलाड़ी मैदान पर दूसरों से छींटाकशी करते हैं, उन्हें खुद भी इसे सुनने के लिए तैयार रहना चाहिए. उन्होंने आगे कहा, “अब वही बात खुद उनके साथ हुई है. अगर कोई खुद पर नहीं हंस सकता, तो उसे दूसरों पर भी नहीं हंसना चाहिए. अगर आप पलटकर सुनना बर्दाश्त नहीं कर सकते, तो मैदान पर खड़े होकर दूसरों से भी कुछ न कहें.”
About the AuthorJitendra Kumar
जितेंद्र कुमार डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में बीते 10 सालों से सक्रिय हैं. वर्तमान में वह नेटवर्क 18 समूह के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हैं और हिंदी स्पोर्ट्स सेक्शन में अपनी…
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New Delhi,Delhi
First Published :
August 24, 2026, 08:54 IST



