Khatu Shyam Ji Mandir | Khatu Shyam Ji Mandir Closed

Last Updated:September 17, 2026, 10:58 IST
Khatu Shyam Ji Mandir Closed: खाटूश्याम जी मंदिर को विशेष पूजा और तिलक श्रृंगार के लिए लगभग 19 घंटे के लिए भक्तों के लिए बंद कर दिया गया है. बुधवार रात 10 बजे से बंद हुए कपाट आज शाम 5 बजे संध्या आरती के समय खुलेंगे. मंदिर कमेटी के अनुसार, अमावस्या पर बाबा श्याम का तिलक श्रृंगार उतारकर स्नान कराया जाता है, जिससे वे अपने मूल शालिग्राम स्वरूप में आ जाते हैं. इसके बाद नए सिरे से तिलक श्रृंगार किया जाता है. महाभारत कालीन बर्बरीक ही कलयुग में भगवान श्रीकृष्ण के वरदान से बाबा श्याम के रूप में पूजे जाते हैं.
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Sikar: देश के प्रसिद्ध और प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटूश्याम जी मंदिर के कपाट भक्तों के लिए अस्थाई रूप से बंद कर दिए गए हैं. इस विशेष अवधि के दौरान श्रद्धालु अपने आराध्य बाबा श्याम के दर्शन नहीं कर पाएंगे. दरअसल, विशेष पूजा-अर्चना और परंपरा के अनुसार किए जाने वाले तिलक श्रृंगार के चलते बुधवार रात 10 बजे शयन आरती के बाद खाटूश्याम जी मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए पूरी तरह बंद कर दिए गए. मंदिर बंद रहने की पूर्व सूचना श्री श्याम मंदिर कमेटी द्वारा आधिकारिक रूप से जारी की गई थी.
अक्सर भक्तों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर मंदिर के कपाट इतने समय के लिए क्यों बंद किए जाते हैं और अंदर क्या धार्मिक प्रक्रियाएं निभाई जाती हैं. श्री श्याम मंदिर कमेटी के कोषाध्यक्ष रवि सिंह चौहान ने इस रहस्य और परंपरा के बारे में विस्तार से जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि मंदिर की वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार अमावस्या के पावन अवसर पर बाबा श्याम को विशेष स्नान कराया जाता है. इस स्नान की प्रक्रिया के दौरान बाबा श्याम का प्रसिद्ध और आकर्षक तिलक श्रृंगार पूरी तरह उतार दिया जाता है. जब तिलक श्रृंगार उतरता है, तब बाबा श्याम अपने मूल स्वरूप यानी शालिग्राम रूप में आ जाते हैं. महीने में कुछ विशेष दिन ही ऐसे होते हैं, जब मंदिर के पुजारियों को बाबा श्याम के इस मूल शालिग्राम स्वरूप के दुर्लभ दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त होता है. इसके पश्चात शालिग्राम स्वरूप पर पुनः संपूर्ण विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ नया तिलक श्रृंगार करने की प्रक्रिया संपन्न की जाती है. इस पूरी धार्मिक प्रक्रिया में काफी लंबा समय लगता है. यही कारण है कि मंदिर के कपाट भक्तों के लिए बंद रखे जाते हैं. इस गोपनीय और पवित्र पूजा में केवल मंदिर के अधिकृत पुजारी ही शामिल होते हैं.
19 घंटे तक बंद रहेंगे कपाट, शाम 5 बजे से होंगे दर्शनमंदिर कमेटी द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 16 सितंबर (बुधवार) की रात 10 बजे शयन आरती के बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए हैं. आज 17 सितंबर (गुरुवार) को पूरे दिन मंदिर के पट बंद रहेंगे. लगभग 19 घंटे की लंबी प्रक्रिया के बाद आज शाम 5 बजे संध्या आरती के पावन समय पर बाबा श्याम के मंदिर के कपाट पुनः श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु खोल दिए जाएंगे. मंदिर प्रशासन ने सभी दूर-दराज से आने वाले श्याम भक्तों से अपील की है कि वे समय सारणी का ध्यान रखें और पट बंद रहने के दौरान मंदिर परिसर न पहुंचें, ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े.
जानिए कौन हैं ‘हारे के सहारे’ बाबा श्यामखाटूश्याम जी को देश-विदेश में ‘हारे का सहारा’ कहा जाता है और उन्हें भगवान श्रीकृष्ण का ही कलयुगी अवतार माना जाता है. पौराणिक कथा और महाभारत काल के अनुसार, बाबा श्याम पांडव पुत्र भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक हैं. महाभारत युद्ध के समय बर्बरीक कौरवों की ओर से युद्ध में भाग लेने जा रहे थे, क्योंकि उन्होंने अपनी माता को हारे हुए पक्ष का साथ देने का वचन दिया था.
जब भगवान श्रीकृष्ण को बर्बरीक की असीम शक्तियों और धनुर्विद्या का ज्ञान हुआ, तो वे एक ब्राह्मण का वेश धरकर बर्बरीक के पास पहुंचे और उनसे दान में उनका शीश (सिर) मांग लिया. बर्बरीक ने बिना किसी हिचकिचाहट या संकोच के तुरंत अपना शीश काटकर भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में समर्पित कर दिया. उनकी इस अनन्य भक्ति और त्याग से अति प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलयुग में वे उनके स्वयं के नाम ‘श्याम’ से पूजे जाएंगे. श्रीकृष्ण ने उन्हें यह भी आशीर्वाद दिया कि जो भी व्यक्ति अपने जीवन में हताश और निराश होकर उनके पास आएगा, वे उसके सबसे बड़े मददगार बनेंगे. यही वजह है कि आज करोड़ों श्रद्धालु उन्हें ‘हारे के सहारे’ के रूप में पूजते हैं.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Sikar,Sikar,Rajasthan
First Published :
September 17, 2026, 10:58 IST



