Lumpy Virus: राजस्थान में लंपी का बढ़ा खतरा, 2 बड़े पशु मेले रद्द, गोवंश की आवाजाही पर सख्ती

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राजस्थान में लंपी का बढ़ा खतरा, 2 बड़े पशु मेले रद्द, गांव-गांव होगा सर्वे
Last Updated:September 17, 2026, 10:57 IST
Lumpy Skin Disease Prevention Advisory: राजस्थान में गोवंश में लंपी स्किन डिजीज के खतरे को देखते हुए पशुपालन विभाग ने संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए सख्ती बढ़ा दी है. गोवंश के अंतर-जिला और अंतर-राज्यीय आवागमन को नियंत्रित करने के साथ प्रदेशभर में पशु मेलों और हाट बाजारों पर तत्काल रोक लगाई गई है. संक्रमण के खतरे को देखते हुए सीकर और झुंझुनूं के बेरी और टोडपुरा के वार्षिक पशु मेले भी रद्द कर दिए गए हैं. इन मेलों में हर साल 20 हजार से ज्यादा पशु पहुंचते हैं. विभाग ने संक्रमित पशुओं को अलग रखने, कीटनाशक छिड़काव, सैनिटाइजेशन और फॉगिंग पर जोर दिया है. घर-घर सर्वे के साथ रैपिड रेस्पॉन्स टीमों का गठन किया जा रहा है. बीमारी से निपटने के लिए राज्य स्तर पर 2.50 करोड़ रुपए का बजट भी जारी किया गया है.
राजस्थान में गोवंश पर मंडरा रहे लंपी स्किन डिजीज के खतरे को देखते हुए पशुपालन विभाग ने संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए सख्ती बढ़ा दी है. गोवंश के अंतर-जिला और अंतर-राज्यीय आवागमन को नियंत्रित करने के साथ प्रदेशभर के बड़े-छोटे पशु मेलों और हाट बाजारों पर तत्काल रोक लगाने का निर्णय लिया गया है. इसका उद्देश्य संक्रमित पशुओं के एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने की आशंका को कम करना है.
लंपी संक्रमण की रोकथाम के लिए लिए गए इस निर्णय का असर शेखावाटी अंचल के प्रमुख पशु मेलों पर भी पड़ा है. सीकर और झुंझुनूं जिले में भादवा महीने में आयोजित होने वाले बेरी और टोडपुरा के वार्षिक पशु मेले रद्द कर दिए गए हैं. विभाग के अनुसार दोनों मेलों में हर साल 20 हजार से अधिक पशु पहुंचते हैं. राजस्थान के अलावा पंजाब और हरियाणा से भी पशुपालक और पशु व्यापारी यहां आते हैं.
पशुपालन विभाग ने संक्रमण रोकने के लिए गांव और ब्लॉक स्तर पर दो-स्तरीय रणनीति तैयार की है. इसमें संक्रमित पशुओं को तत्काल स्वस्थ पशुओं से अलग रखना और मच्छर-मक्खियों की संख्या नियंत्रित करना प्रमुख है. संक्रमित गोवंश के लिए अलग आइसोलेशन सेंटर तैयार किए जा रहे हैं. गोशालाओं और पशु बाड़ों में कीटनाशक छिड़काव, सैनिटाइजेशन और फॉगिंग करवाने की तैयारी भी की जा रही है.
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बीमारी की पहचान जल्द हो सके, इसके लिए पशुपालन विभाग की टीमें घर-घर जाकर गोवंश का सर्वे करेंगी. पशु चिकित्सा अधिकारियों को बीमार पशुओं की पहचान कर उनका डेटाबेस तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं. वहीं, किसी पशु में लंपी के लक्षण मिलने पर तत्काल उपचार उपलब्ध कराने के लिए ब्लॉक स्तर पर रैपिड रेस्पॉन्स टीमों का गठन किया जा रहा है. राज्य और जिला स्तर पर 24 घंटे नियंत्रण कक्ष भी संचालित किए जा रहे हैं.
सीकर जिले में भी पशुपालकों की सहायता के लिए नियंत्रण कक्ष की सुविधा शुरू की गई है. विभाग की ओर से 9829531178 और 9460836035 नंबर जारी किए गए हैं. पशुपालक गोवंश में लंपी के लक्षण दिखाई देने पर इन नंबरों पर सूचना दे सकते हैं. विभाग का फोकस बीमारी की सूचना मिलने के बाद तेजी से मौके पर पहुंचने, संक्रमित पशु को अलग करने और आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर रहेगा.
लंपी से निपटने के लिए सरकार ने दवाइयों और आपातकालीन व्यवस्थाओं के लिए विशेष बजट भी जारी किया है. पशुपालन विभाग को प्रदेश स्तर पर 2.50 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया है. प्रत्येक जिले को दवाइयों की खरीद और आपातकालीन जरूरतों के लिए पांच लाख रुपए दिए गए हैं. दवाओं के स्टॉक और उनके वितरण की रोजाना मुख्यालय स्तर से निगरानी की जाएगी, ताकि जरूरत के समय दवाइयों की कमी न रहे.
पशुपालन विभाग ने पशुपालकों से संक्रमित पशुओं को तुरंत अलग रखने और लक्षण दिखने पर पशु चिकित्सा केंद्र या नियंत्रण कक्ष को सूचना देने की अपील की है. शरीर पर गांठें, बुखार और नाक से पानी आना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह दी गई है. पशुओं को खुले या सार्वजनिक चरागाहों में नहीं चराने, संक्रमित पशु की खरीद नहीं करने और बाहर से पशु नहीं लाने पर भी जोर दिया गया है. विभाग ने पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए हल्दी, गिलोय, काली मिर्च और आंवला जैसे चीजों के उपयोग की सलाह दी है.
First Published :
September 17, 2026, 10:57 IST



