3 साल से मुआवजे को तरसे 429 किसान, 3.35 करोड़ अटका, अब तहसील घेराव का अल्टीमेटम

डूंगरपुर. राजस्थान के डूंगरपुर जिले के सागवाड़ा उपखंड क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) 927ए के लिए अधिग्रहित की गई जमीन का मुआवजा तीन साल बाद भी सैकड़ों किसानों को नहीं मिल सका है. हाईवे का निर्माण पूरा होने के बावजूद 429 किसान करीब 3 करोड़ 35 लाख रुपये के भुगतान का इंतजार कर रहे हैं. इससे किसानों में भारी नाराजगी है और उन्होंने प्रशासन को एक सप्ताह का अल्टीमेटम देते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है.
एनएचआई की ओर से स्वरूपगंज-खेरवाड़ा-डूंगरपुर-सागवाड़ा-बांसवाड़ा-रतलाम तक राष्ट्रीय राजमार्ग 927ए का निर्माण कराया गया था. इस परियोजना के लिए सागवाड़ा क्षेत्र में 3,878 किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई. इनमें से 3,449 किसानों को उनकी जमीन के बदले 97 करोड़ 53 लाख 9 हजार 464 रुपये का मुआवजा दिया जा चुका है. हालांकि, 429 किसानों को अब तक भुगतान नहीं मिला है. प्रभावित किसान पिछले तीन वर्षों से सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं.
छोटे किसानों की अनदेखी का आरोप
भीलूड़ा गणेशपुरी निवासी किसान श्रीराम पाटीदार ने आरोप लगाया कि जिन किसानों की बड़ी मुआवजा राशि थी, उनका भुगतान कथित सेटिंग के जरिए पहले ही करा दिया गया, जबकि छोटे और गरीब किसानों के मामलों को लंबित छोड़ दिया गया. उनका कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद केवल आश्वासन मिलता है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो रहा.
रिकॉर्ड में नहीं था जमीन का नंबर
एक अन्य किसान देवीलाल पाटीदार ने बताया कि शुरुआत में उनकी अधिग्रहित जमीन का खसरा नंबर ही रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया था. कई बार तहसील और पटवारी कार्यालय के चक्कर लगाने के बाद रिकॉर्ड में सुधार हुआ, लेकिन इसके बावजूद आज तक मुआवजा नहीं मिला. उनका कहना है कि आसपास के किसानों को भुगतान हो चुका है, जबकि उनका मामला अब भी अटका हुआ है.
एक सप्ताह में भुगतान नहीं हुआ तो होगा तहसील घेराव
मुआवजे से वंचित भीलूड़ा और आसपास के गांवों के किसानों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर उनके खातों में मुआवजे की राशि ट्रांसफर नहीं की गई, तो सभी प्रभावित किसान सागवाड़ा तहसील कार्यालय का घेराव करेंगे और अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे. किसानों का कहना है कि आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी.
एसडीएम बोले- तकनीकी कारणों से अटके हैं कुछ मामले
सागवाड़ा उपखंड अधिकारी सुबोध सिंह चरण ने बताया कि करीब 90 प्रतिशत प्रभावित किसानों को मुआवजा दिया जा चुका है. शेष मामलों में तकनीकी कारणों से भुगतान लंबित है. उन्होंने बताया कि कुछ अधिग्रहित जमीनों पर निर्माण होने के कारण री-सर्वे जरूरी था. इसके लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, बांसवाड़ा को पत्र भेजा गया है. जिन किसानों के मामले लंबित हैं, उनके प्रकरण तैयार कर उच्च स्तर पर भेज दिए गए हैं.
बजट मिलते ही खातों में भेजी जाएगी राशि
एसडीएम के अनुसार, जैसे ही एनएचआई या उच्च स्तर से बजट प्राप्त होगा, बिना किसी देरी के लंबित किसानों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से मुआवजे की राशि ट्रांसफर कर दी जाएगी. प्रशासन का कहना है कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी पात्र किसानों को उनका भुगतान कर दिया जाएगा.
बढ़ सकता है आंदोलन
राष्ट्रीय राजमार्ग 927ए का निर्माण पूरा होने के तीन साल बाद भी 429 किसानों को मुआवजा नहीं मिलना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है. विकास परियोजना के लिए अपनी जमीन देने वाले किसान अब अपने ही अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं. यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो किसानों का प्रस्तावित आंदोलन प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है.



