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OPINION: मैं उनसे मिला हूं… बस शो-बाजी हैं, कोई दम नहीं! PM मोदी के लिए राहुल गांधी की यह कैसी भाषा?

नई दिल्ली.राहुल गांधी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को दावा किया कि वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से कई बार मिल चुके हैं और उनमें कोई दम नहीं है. उन्होंने कांग्रेस ‘ओबीसी भागीदारी न्याय सम्मेलन’ में यह टिप्पणी की. राहुल गांधी ने अपने भाषण के दौरान जब यह सवाल किया कि देश में सबसे बड़ी समस्या क्या हैं तो वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने प्रधानमंत्री का नाम लिया. इस पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, “पीएम नरेन्द्र मोदी कोई बड़ी समस्या नहीं हैं. मीडिया वालों ने सिर्फ गुब्बारा बना रखा है. मैं उनसे मिल चुका हूं, उनके साथ कमरे में बैठा हूं. बस ‘शो-बाजी’ है, कोई दम नहीं है.” राहुल गांधी ना सिर्फ देश की सबसे पुरानी पार्टी के सांसद हैं, बल्कि लोकसभा में विपक्ष के नेता भी हैं. ऐसे में देश के प्रधानमंत्री के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कहां तक सही है?

यह पहली बार नहीं है कि राहुल गांधी ने पीएम मोदी के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया है. वे पहले भी ऐसा कर चुके हैं. राफेल फाइटर जेट सौदे को लेकर राहुल गांधी ने ‘चौकीदार चोर है’ कहा था. उन्होंने बार-बार इसे लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला था. हालांकि, बाद में उन्हें सुप्रीम कोर्ट में माफी भी मांगनी पड़ी थी. चीन के मुद्दे पर भी राहुल ने पीएम मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था और कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन को लेकर बोलने से डरते हैं. इतना ही नहीं, कांग्रेस नेता ने आर्थिक मुद्दों और हिंडनबर्ग मामले में भी गलत शब्दों से पीएम मोदी को संबोधित किया था.

‘ओबीसी वर्ग के हितों की जिस तरह से रक्षा करनी थी, वह मैं नहीं कर पाया’
दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में ‘भागीदारी न्याय सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने ओबीसी वर्ग के हितों के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया, लेकिन यह भी स्वीकार किया कि उन्हें और कांग्रेस को जिस तरह से इस वर्ग के हितों की रक्षा करनी थी, वह कार्य उस प्रकार से नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि वह अब ओबीसी के मुद्दों को गहराई से समझते हैं और उनके हितों को सुनिश्चित करने के लिए कार्य करेंगे. राहुल गांधी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ‘मैं 2004 से राजनीति में हूं और मुझे 21 साल हो गए. जब मैं पीछे देखता हूं और अपना आत्मविश्लेषण करता हूं, मैंने कहां-कहां सही काम किया और कहां कमी रही तो दो-तीन बड़े मुद्दे दिखाई देते हैं, जैसे जमीन अधिग्रहण बिल, मनरेगा, भोजन का अधिकार, ट्राइबल बिल, नियामगिरी की लड़ाई, ये सारे काम मैंने सही किए. जहां तक आदिवासियों, दलितों, महिलाओं के मुद्दे हैं, वहां मुझे अच्छे नंबर मिलने चाहिए. मैंने अच्छा काम किया.’

उन्होंने आगे कहा कि मैं थोड़ा पीछे की ओर देखता हूं तो एक बात बिल्कुल स्पष्ट दिखाई देती है कि एक विषय पर मुझसे कमी रही. कांग्रेस पार्टी और मेरे काम में एक कमी रह गई, मुझे ओबीसी वर्ग की जिस तरह से रक्षा करनी थी, मैंने नहीं की. इसका कारण था कि मुझे ओबीसी के मुद्दे उस वक्त गहराई से नहीं समझ आए थे. मैं मंच से कहता हूं 10-15 साल पहले दलितों के सामने जो कठिनाइयां थीं, वो मुझे अच्छी तरह समझ आ गई थीं. उनके मुद्दे सामने हैं, वो आसानी से समझ आ जाते हैं, लेकिन ओबीसी की मुश्किलें छुपी रहती हैं. मुझे अगर आपके मुद्दों और परेशानियों के बारे में उस वक्त पता होता तो मैं उसी वक्त जातिगत जनगणना करवा देता. वो मेरी गलती है, जिसे मैं ठीक करने जा रहा हूं. हालांकि, ये एक तरह से अच्छा ही हुआ, क्योंकि अगर उस समय मैंने जातिगत जनगणना करवा दी होती, तो वो आज जैसी नहीं होती.

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