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चेहरा निखारेगा, भरेगा घाव…सिर्फ छांव ही नहीं देता नरसुत का पेड़, गोंडा के वैद्य से जानिए

Last Updated:July 12, 2026, 16:54 IST

Narsut Tree Benefits : नरसुत के पेड़ को आमतौर पर लोग केवल छांव देने वाला पेड़ समझते हैं, लेकिन आयुर्वेद में इसे चमत्कारी गुणों वाला बताया गया है. नरसुत के पेड़ की पत्तियां, छाल और दूसरे हिस्सों का उपयोग आयुर्वेद में सदियों से होता आया है. लोकल 18 से गोंडा के वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति बताते हैं कि इस पेड़ में सूजन कम करने, घाव भरने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाने वाले गुण भरे पड़े हैं. पुराने समय में गांवों में लोग नरसुत की छाल का लेप बनाकर छोटे-मोटे घावों पर लगाते थे. नरसुत की पत्तियों का उपयोग कुछ त्वचा संबंधी समस्याओं में भी होता आया है. वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति का कहना है कि हर औषधीय पौधे की तरह नरसुत का भी सही मात्रा में और सही तरीके से उपयोग करना जरूरी है.

गांवों और शहरों में आज भी कई ऐसे पेड़ मिल जाते हैं, जिनके बारे में लोग ज्यादा जानकारी नहीं रखते. ऐसा ही एक पेड़ है नरसुत का. आमतौर पर लोग इसे केवल छांव देने वाला पेड़ समझते हैं, लेकिन आयुर्वेद में इसके कई औषधीय गुण बताए गए हैं. नरसुत के पेड़ की पत्तियां, छाल और दूसरे हिस्सों का उपयोग कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं में किया जाता है. हालांकि, इसका इस्तेमाल हमेशा किसी आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए.

लोकल 18 से बातचीत में गोंडा के वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति बताते हैं कि नरसुत का पेड़ लंबे समय तक हरा-भरा रहता है और वातावरण को भी स्वच्छ रखने में मदद करता है. यही वजह है कि इसे कई जगहों पर सड़क किनारे, खेतों और बगीचों में लगाया जाता है, लेकिन इसे औषधीय गुण कम ही लोग जानते हैं.

वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति बताते हैं कि नरसुत के पेड़ में ऐसे प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर को कई तरह से लाभ पहुंचा सकते हैं. इसकी छाल और पत्तियों का उपयोग पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में वर्षों से किया जाता रहा है. माना जाता है कि इसमें सूजन कम करने, घाव भरने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाने वाले गुण मौजूद होते हैं.

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वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति बताते हैं कि पुराने समय में गांवों में लोग नरसुत की छाल का लेप बनाकर छोटे-मोटे घावों पर लगाते थे. इससे घाव जल्दी भरने में मदद मिलती थी. हालांकि, किसी भी गहरे या गंभीर घाव का इलाज डॉक्टर की सलाह से ही कराना चाहिए.

आयुर्वेद में नरसुत की पत्तियों का उपयोग कुछ त्वचा संबंधी समस्याओं में भी बताया गया है. इसकी पत्तियों से तैयार लेप का इस्तेमाल खुजली, हल्की जलन और त्वचा की कुछ सामान्य परेशानियों में किया जाता रहा है. लेकिन बिना विशेषज्ञ की सलाह के इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए.

वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति के मुताबिक, नरसुत में ऐसे गुण पाए जाते हैं जो शरीर की सूजन को कम करने में सहायक होते हैं. आयुर्वेदिक उपचार में इसकी छाल का उपयोग कुछ विशेष औषधियों को बनाने में भी किया जाता है. ऐसा पुराने समय से होता आया है.

आयुर्वेद विशेषज्ञ विष्णु दत्त प्रजापति का कहना है कि हर औषधीय पौधे की तरह नरसुत का भी सही मात्रा में और सही तरीके से उपयोग करना जरूरी है. गलत तरीके से इस्तेमाल करने पर नुकसान भी हो सकता है. इसलिए किसी भी बीमारी के इलाज के लिए इसका प्रयोग करने से पहले आयुर्वेद चिकित्सक या डॉक्टर की सलाह जरूर लें.

वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति का कहना है कि आज लोग दवाओं के साथ-साथ प्राकृतिक उपचार की ओर भी ध्यान दे रहे हैं. ऐसे में औषधीय पेड़ों की सही जानकारी होना जरूरी है. लेकिन इंटरनेट या सुनी-सुनाई बातों के आधार पर किसी भी पौधे का सेवन करना ठीक नहीं है. सही पहचान और सही सलाह के बाद ही इसका उपयोग करना चाहिए.

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