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Next CJI Justice Surya Kant News | CJI Justice Surya Kant 4 Comments- अगले CJI जस्टिस सूर्यकांत के सामने आए वो 4 केस, जिसने देश में मचाया था बवाल, क्या सुनाया था फैसला?

Last Updated:October 25, 2025, 23:59 IST

Next CJI Justice Surya Kant News: अगले CJI जस्टिस सूर्यकांत ने कई बार अपने सख्त और संवेदनशील फैसलों से देश को झकझोरा. रणवीर अल्लाहबादिया, जुबैर, नूपुर शर्मा और स्वाति मालीवाल केस में उनकी टिप्पणियों ने मचाया था बवाल. इस खबर में पढ़िए उनके इस 4 केस के बारे में जिसने देश में खूब हंगामा मचाया था. साथ ही पढ़िए उन्होंने इस केस में क्या फैसला सुनाया था.

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अगले CJI जस्टिस सूर्यकांत के सामने आए वो 4 केस, जिसने देश में मचाया था बवालजस्टिस सूर्यकांत अपने हर फैसले में कानून की आत्मा को केंद्र में रखते हैं. (फाइल फोटो PTI)

Next CJI Justice Surya Kant News: हरियाणा के हिसार से निकलकर भारत के सर्वोच्च न्यायिक पद तक पहुंचने जा रहे जस्टिस सूर्यकांत 24 नवंबर 2025 को देश के अगले मुख्य न्यायाधीश (CJI) बनेंगे. अपने न्यायिक करियर में उन्होंने कई ऐतिहासिक फैसले सुनाए हैं और कई बार ऐसी टिप्पणियां की हैं, जिन पर पूरे देश में बहस छिड़ गई. सादगी और ईमानदारी के लिए जाने जाने वाले जस्टिस सूर्यकांत का न्याय दर्शन हमेशा संवेदनशीलता और सख्ती के बीच संतुलन बनाए रखने का रहा है.

कानून की बारीकियों पर उनकी गहरी पकड़ और मानवीय दृष्टिकोण के चलते वे हर उस मामले में चर्चा में रहे, जिसने समाज में हलचल मचा दी. चाहे मामला हो धार्मिक भावनाओं का, महिला सुरक्षा का या अभिव्यक्ति की आजादी का हो जस्टिस सूर्यकांत की टिप्पणी हमेशा सीधी, सटीक और न्याय की मूल भावना को सामने रखती रही. आइए जानते हैं वे चार चर्चित केस जिनमें उनकी टिप्पणी और रुख सुर्खियों में रहा.

1. रणवीर अल्लाहबादिया केस-‘लोकप्रियता अश्लीलता की छूट नहीं देती’YouTuber रणवीर अल्लाहबादिया की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था, “इस व्यक्ति के दिमाग में कुछ गंदा है जो समाज में फैल गया है. वह माता-पिता का भी अपमान कर रहा है. अदालत क्यों उसका पक्ष ले?” हालांकि कोर्ट ने उसे गिरफ्तारी से राहत दी थी, लेकिन जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट कहा था कि लोकप्रियता किसी को समाजिक मर्यादाएं तोड़ने का अधिकार नहीं देती. उन्होंने यह टिप्पणी तब की थी जब अल्लाहबादिया पर आपत्तिजनक भाषा और गंदे कंटेंट फैलाने के आरोप लगे थे. इस केस ने सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम मर्यादा की नई बहस छेड़ दी थी.

2. मोहम्मद जुबैर केस- ‘गैग ऑर्डर नहीं चलेगा, हर नागरिक को राय रखने का हक’साल 2022 में फैक्ट-चेकर मोहम्मद जुबैर की जमानत याचिका पर जस्टिस सूर्यकांत ने स्वतंत्र अभिव्यक्ति के अधिकार की रक्षा की दिशा में ऐतिहासिक रुख अपनाया. उन्होंने कहा था कि “किसी नागरिक को अपनी राय रखने से रोकना असंवैधानिक है. सोशल मीडिया पर राय व्यक्त करने से रोकना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन होगा.” यह फैसला तब आया जब जुबैर पर कई राज्यों में धार्मिक भावनाएं भड़काने के आरोप में FIR दर्ज की गई थीं. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राय रखना अपराध नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा है.

3. नूपुर शर्मा केस- ‘शब्दों से भी भड़क सकती है हिंसा’
BJP प्रवक्ता नूपुर शर्मा के बयान के बाद देशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों के बीच जस्टिस सूर्यकांत ने अदालत में कहा था कि “वह देश में जो कुछ हो रहा है, उसकी अकेली जिम्मेदार हैं.” उन्होंने जोर देकर कहा था कि सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों को अपने शब्दों के असर को समझना चाहिए, क्योंकि एक गलत बयान समाज में बड़ा विभाजन पैदा कर सकता है. यह टिप्पणी उस समय आई थी जब नूपुर शर्मा के बयान के समर्थन में पोस्ट करने वाले एक दर्जी की राजस्थान में हत्या कर दी गई थी. जस्टिस सूर्यकांत ने अपने शब्दों से यह संदेश दिया कि अभिव्यक्ति की आजादी के साथ जवाबदेही भी जरूरी है.

4. स्वाति मालीवाल केस – ‘क्या सीएम हाउस गुंडों का ठिकाना है?’AAP सांसद स्वाति मालीवाल पर कथित हमले के मामले में जस्टिस सूर्यकांत ने दिल्ली के सत्ता गलियारों को झकझोर देने वाली टिप्पणी की थी. उन्होंने कहा था “क्या यह मुख्यमंत्री का आवास है या किसी गुंडे का अड्डा?” उन्होंने आरोपी विभव कुमार से सवाल किया कि “क्या उसे एक महिला के साथ ऐसा करने में शर्म नहीं आई?” अदालत में उन्होंने यह भी कहा कि “जब एक महिला रो रही थी और अपनी शारीरिक स्थिति बता रही थी, तब भी उसे नहीं रोका गया, यह निंदनीय है.” इस बयान ने सत्ता के अहंकार और महिला सुरक्षा पर नई बहस छेड़ दी थी.

न्याय और नैतिकता की नई पहचानजस्टिस सूर्यकांत अपने हर फैसले में कानून की आत्मा को केंद्र में रखते हैं. उनकी टिप्पणियां अक्सर समाज के मौजूदा हालातों को आईना दिखाती हैं. आने वाले समय में जब वे भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बनेंगे, तो न्यायपालिका में उनकी सादगी, सख्ती और संवेदनशीलता एक नई दिशा तय कर सकती है.

Sumit Kumar

Sumit Kumar is working as Senior Sub Editor in Hindi. He has been associated with the Central Desk team here for the last 3 years. He has a Master’s degree in Journalism. Before working in Hindi, …और पढ़ें

Sumit Kumar is working as Senior Sub Editor in Hindi. He has been associated with the Central Desk team here for the last 3 years. He has a Master’s degree in Journalism. Before working in Hindi, … और पढ़ें

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October 25, 2025, 16:55 IST

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