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285 Year Old Temple India | 53 Stones Worship Temple | Nazar Dosh Ritual Rajasthan | Good Harvest Belief Temple | Ancient Temples of India | Unique Temple Traditions

Last Updated:November 03, 2025, 11:34 IST

Dharohar: राजस्थान के एक छोटे से गांव में स्थित 285 वर्ष पुराना मंदिर आज भी आस्था का प्रतीक है. यहां 53 शिलाओं की पूजा की जाती है. लोग बच्चों की सुरक्षा, नजर दोष से बचाव और अच्छी फसल की कामना के लिए झाड़ा लगवाने आते हैं. यह मंदिर लोक परंपराओं और आस्था का संगम है.

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जयपुर: जयपुर अपने प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिरों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं जहां अनोखी परम्पराएं और मान्यताएं आज भी प्रसिद्ध हैं. ऐसे ही जयपुर के चांदपोल बाजार के पुरानी बस्ती, जयलाल मुंशी का रास्ता में स्थित 285 वर्ष पुराना प्रेम बिहारीजी मंदिर जो जयपुर शहर में एक मात्र ऐसा मंदिर है जहां 53 शिलाओं की पूजा होती हैं प्रेम बिहारी जी मंदिर में राधा-कृष्ण को समर्पित अष्टधातु की 2-2 प्रतिमाएं और शालिग्रामजी की इन 53 शिलाओं की सेवा के लिए प्रसिद्ध है. मंदिर में शालिग्राम की 53 शिलाएं स्थापित हैं, जिनकी नियमित पूजा-अर्चना और सेवा की जाती है. इस मंदिर की विशेष परंपरा और मान्यताएं यह भी हैं कि यहां हर सेवा दो बार की जाती है. जैसे अगर मंदिर में कोई श्रद्धालु कार्तिक माह में 108 परिक्रमा करने आता है, तो उसे 216 के रूप में डबल परिक्रमा करनी पड़ती है.

इसी प्रकार कोई भी वस्तु चढ़ानी हो या कोई प्रण लेना हो, तो वह भी दो-दो बार ही लिया जाता है. इसलिए यह जयपुर का एकमात्र ऐसा मंदिर हैं जो इस अनोखी परम्परा के लिए जाना जाता हैं. अगर मंदिर की वास्तुकला की बात करें तो मंदिर 300 वर्ष पुराने मकान में बना हुआ हैं जिसकी वास्तुकला वर्षों पुरानी हैं.

बच्चों में नजर दोष निवारण के लिए आते हैं भक्त लोकल-18 ने 285 वर्ष पुराना प्रेम बिहारीजी मंदिर में पहुंच कर यहां मंदिर के महंत पवन कुमार से बात की तो वह बताते हैं कि प्रेम बिहारीजी मंदिर में भगवान कृष्ण का अनोखा और अद्भुत स्वरूप विराजमान है, वह मंदिर में लगातार आठवीं पीढ़ी से जो अपने परिवार की परम्परा को आगे बढ़ाते हुए इस मंदिर में पूजा करते आ रहे हैं. पवन बताते हैं कि प्रेम बिहारीजी के इस मंदिर में प्राचीन समय से ख़ासतौर पर बच्चों में नजर दोष निवारण करने की अनोखी परम्परा और मान्यता चली आ रही हैं हैं जिसमें छोटे बच्चों में बोलने, खेलने, खाने-पीने, मन चीड़चीड़ा होने, अन्य बिमारियों जैसी परेशानियां के लिए विशेष रूप से ठाकुर जी का झाड़ा लगवाया जाता हैं. यहां ठाकुर जी के सामने बैठाकर कर ही बच्चों को गुप्त मंत्रों के माध्यम से नजर का झाड़ा लगाया जाता हैं. मंदिर में हर दिन सुबह-शाम दो बार नजर दोष निवारण का झाड़ा लगाया जाता है.

इस सेवा के लिए मंदिर भक्तों की लंबी कतार लगती है और लोग दूर-दूर से लोग अपने बच्चों को लेकर यहां मंदिर में पहुंचते हैं. मंदिर में हर दिन नजर दोष निवारण की सेवा सुबह 8:30 से 11 बजे तक और शाम को 6:30 से 8:30 बजे तक की जाती है.

खेत को बुरी नज़र से बचाने के लिए यहां मांगी जाती हैं मन्नत लोकल-18 से बात करते हुए महंत पवन कुमार बताते हैं बच्चों में झाड़ा लगाने के अलावा मंदिर में पुराने समय से ही किसानों के लिए भी अनोखी परम्परा और मान्यता प्रसिद्ध हैं जिसमें वर्षों पहले जयपुर के आसपास के गांवों से लोग जब खेती की शुरुआत होती थी, तो किसान खेत को बुरी नजर से बचाने के लिए यहां मन्नत मांगने आते थे और जब फसल तैयार होती थी, किसान भगवान ठाकुर जी को अन्न चढ़ाकर अर्पित करते थे. इसलिए आज भी मंदिर में दूर-दूराज से किसान यहां अन्य चढ़ाने पहुंचते हैं.

प्रेम बिहारी जी का यह मंदिर जयपुर की चांदपोल बाजार के मुख्य इलाके में हैं इसलिए जयपुर में आने वाले पर्यटक भी मंदिर में भगवान राधा कृष्ण के अनोखे अवतार को देखने और दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

Jagriti Dubey

With more than 6 years above of experience in Digital Media Journalism. Currently I am working as a Content Editor at News 18. Here, I am covering lifestyle, health, beauty, fashion, religion, career, politica…और पढ़ें

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Location :

Jaipur,Rajasthan

First Published :

November 03, 2025, 11:34 IST

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Dhrohar: राजस्थान का रहस्यमयी मंदिर! जहां पत्थर बोलते हैं और नजर दोष भाग जाता

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