Pali News: 100 साल पुराना इतिहास, पीढ़ियों का हुनर…पाली की धान मंडी में रोजाना तैयार हो रहे 500 साफे ऑर्डर्स की आई बाढ़

Last Updated:July 11, 2026, 12:33 IST
राजस्थान की आन-बान और शान का प्रतीक पाली का साफा आज देश-विदेश में अपनी अलग पहचान बना चुका है. शादियों के सीजन के साथ ही पाली की ऐतिहासिक धानमंडी साफों की रंग-बिरंगी दुनिया से गुलजार हो गई है. करीब 100 साल पुरानी इस पारंपरिक कला को कारीगर पीढ़ियों से संभाल रहे हैं. यहां तैयार होने वाले शाही साफे आम दूल्हों से लेकर बड़े उद्योगपतियों, सेलिब्रिटीज और राजनेताओं तक के सिर की शोभा बढ़ा चुके हैं. इन दिनों बढ़ते ऑर्डर्स को पूरा करने के लिए कारीगर दिन-रात जुटे हैं और सैकड़ों साफे देश-विदेश तक भेजे जा रहे हैं.
<br />राजस्थान की आन, बान और शान का जब भी जिक्र आता है, तो सिर पर सजी बहुरंगी पगड़ी यानी ‘साफे’ की तस्वीर खुद-ब-खुद जेहन में उभर आती है. साफे के लिहाज से हमारा मारवाड़ न केवल देश में बल्कि सात समंदर पार विदेशों में भी अपनी एक अलग और अमिट पहचान रखता है. जब बात पाली जिले की हो, तो यहां के साफा व्यवसायियों ने इस पारंपरिक कला को वैश्विक स्तर पर एक नई ऊंचाई दी है.
<br />शादियों का सीजन शुरू होते ही इस बाजार में गजब की रौनक और हलचल देखने को मिल रही है. यहां की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां साफा बनाने का काम आज का नहीं, बल्कि पिछले 100 सालों से भी ज्यादा समय से चल रहा है. यहां के कारीगर पीढ़ियों से इस पारंपरिक कला को जिंदा रखे हुए हैं.
<br />पाली का धानमंडी एरिया इन दिनों पूरी तरह से साफों की रंगत से गुलजार है. शादियों का सीजन शुरू होते ही यहां पैर रखने तक की जगह नहीं है. यहां के बने साफे आम लोगों के सिर की शोभा तो बढ़ाते ही हैं, लेकिन आपको जानकर गर्व होगा कि देश के सबसे बड़े उद्योगपति मुकेश अंबानी से लेकर बॉलीवुड के दिग्गज सेलिब्रिटीज और राजनेताओं के सिर पर भी पाली का ही साफा सज चुका है.
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<br />जैसे ही शादियों के मांगलिक सीजन की शुरुआत हुई है, पाली का ऐतिहासिक धानमंडी एरिया पूरी तरह साफा मंडी के रूप में तब्दील हो चुका है. यहां सुबह से लेकर देर रात तक साफों की मैन्युफैक्चरिंग और पैकिंग का काम युद्धस्तर पर चल रहा है. स्थानीय बाजारों के अलावा देश के कोने-कोने और विदेशों से आ रहे बल्क ऑर्डर्स को पूरा करने के लिए कारीगर दिन-रात जुटे हुए हैं.
<br />हमारा यह काम आज का नहीं है, बल्कि हमारे पूर्वजों के समय से चलता आ रहा है. मेरे दादा और पिता भी यही कार्य करते आए हैं. लगभग 100 साल से हमारा परिवार इस परंपरा और कला को जिंदा रखे हुए है. अब शादियों का सीजन शुरू हो चुका है, इसलिए हम दुल्हों के विशेष साफे तैयार कर रहे हैं. हमारे पास देशभर से इतने ऑर्डर हैं कि हम प्रतिदिन 300 से 500 से ज्यादा साफे तैयार कर रहे हैं, जिन्हें बाद में देश के विभिन्न राज्यों सहित विदेशों में एक्सपोर्ट किया जा रहा है.
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