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Agriculture News: लहसुन की बंपर पैदावार के लिए अपनाएं ये उन्नत तरीके, तीन गुना अधिक मिलेगा मुनाफा 

Last Updated:November 08, 2025, 07:27 IST

Garlic Cultivation Tips: लहसुन की खेती के लिए दोमट या मध्यम काली मिट्टी और अच्छी जल निकासी आवश्यक है. बुवाई से पहले खेत की गहरी जुताई और गोबर की खाद का उपयोग उत्पादन बढ़ाता है. उन्नत किस्में जैसे जी-41, जी-2820 और यमुना सफेद-3 उच्च उपज देती है. जैविक और रासायनिक खादों का संतुलित प्रयोग, समय पर सिंचाई और कीट नियंत्रण फसल की गुणवत्ता सुधारते हैं. वैज्ञानिक तकनीकों के प्रयोग से किसान आय में दोगुनी वृद्धि कर सकते हैं.लहसुन की खेती

वर्तमान समय में लहसुन की खेती किसानों के लिए एक मुनाफेदार फसल है, क्योंकि यह न केवल घरेलू उपयोग में बल्कि औषधीय और औद्योगिक क्षेत्रों में भी इसकी मांग बनी रहती है. इसी कारण यह एक नकदी फसल के रूप में जानी जाती है. ऐसे में यदि किसान वैज्ञानिक पद्धति से इसकी खेती करें तो पारंपरिक खेती की तुलना में तीन गुना अधिक मुनाफा कमा सकते हैं. इसके लिए सही मिट्टी, जलवायु, बीज और प्रबंधन का ध्यान रखना आवश्यक है.

लहसुन की खेती

एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ ने बताया कि लहसुन की बुवाई के लिए सबसे सही समय और मिट्टी का चुनाव बहुत जरूरी होता है. इसकी खेती के लिए दोमट या मध्यम काली मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है. इसके अलावा पानी की निकासी अच्छी होनी चाहिए. साथ ही खेत की गहरी जुताई कर भुरभुरा बनाने से इसके उत्पादन में बढ़ोतरी होती है. लहसुन की खेती की अंतिम जुताई में 20 से 25 टन प्रति हेक्टेयर सड़ी हुई गोबर की खाद डालना लाभकारी रहता है. इसके अलावा मिट्टी का पीएच मान 6.0 से 7.0 के बीच हो तो लहसुन की फसल तेजी से बढ़ती है.

लहसुन की खेती

लहसुन की खेती के दौरान, उन्नत किस्मों का चयन उत्पादन बढ़ाने का सबसे आसान तरीका है. इसके लिए किसान एग्रीफाउंड सफेद जी-41 किस्म की बुवाई कर सकते हैं, क्योंकि यह 160 से 165 दिनों में तैयार हो जाती है और इससे औसतन 125 से 130 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज प्राप्त की जा सकती है. इसके अलावा यमुना सफेद-2 जी-50 किस्म की उपज क्षमता 140 क्विंटल तक होती है. वहीं जी-2820 किस्म की गांठें आकार में बड़ी होती है और इससे 200 क्विंटल तक पैदावार मिल सकती है. यमुना सफेद-3 जी-282 भी लहसुन की अच्छी किस्म है, जिसकी उपज 175 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक रहती है.

लहसुन की खेती

एग्रीकल्चर एक्सपर्ट के अनुसार, किसानों को फसल के पोषण के लिए जैविक खाद के साथ रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग जरूरी है. गोबर की खाद मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है, जबकि रासायनिक खाद पौधों को तुरंत पोषक तत्व देती है. इसके अलावा, बुवाई से पहले मिट्टी परीक्षण करवाकर नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और सूक्ष्म पोषक तत्वों की मात्रा निर्धारित करनी चाहिए. इससे पौधे स्वस्थ रहते हैं और बल्ब का आकार बेहतर बनता है. इससे भाव अच्छे मिलते हैं.

लहसुन की खेती

इस खेती में सिंचाई का प्रबंधन करना बहुत जरूरी है. यह लहसुन की खेती में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. ऐसे में किसान अच्छे मुनाफे के लिए बुवाई के तुरंत बाद पहली हल्की सिंचाई करनी चाहिए ताकि कलिया अंकुरित हो सकें. इसके बाद हर 10 से 12 दिन के अंतराल पर सिंचाई करना फायदेमंद रहता है. इसके अलावा फसल की कटाई से 10 से 15 दिन पहले सिंचाई बंद कर देनी चाहिए ताकि बल्ब पूरी तरह से सूखकर मजबूत बन सकें.

लहसुन की खेती

एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ ने बताया कि, किसानों को फसल की देखरेख के दौरान खरपतवार नियंत्रण और कीट प्रबंधन पर भी ध्यान देना जरूरी है. समय-समय पर निराई-गुड़ाई करने से न केवल मिट्टी में वायु संचार बना रहता है बल्कि पोषक तत्वों की आपूर्ति भी बराबर होती है. किसान कीटों से बचाव के लिए नीम के जैविक घोलों का छिड़काव कर सकते हैं. इससे फसल सुरक्षित रहती है और मिट्टी का उपजाऊपन भी बना रहता है.

लहसुन की खेती

एग्रीकल्चर एक्सपर्ट के अनुसार, लहसुन की खेती में वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने से किसानों की आय में दोगनी से अधिक बढ़ोतरी होती है. उन्नत किस्में, जैविक खाद और नियंत्रित सिंचाई प्रणाली अपनाकर किसान बेहतर गुणवत्ता की पैदावार प्राप्त कर सकते हैं. इससे न केवल बाजार में ऊंचे भाव मिलते हैं, बल्कि उनका खेती भी दूसरी फसल के लिए उपजाऊ रहता है. इस तरह लहसुन की खेती किसानों के लिए एक स्थायी और मुनाफे का सौदा साबित हो सकती है.

First Published :

November 08, 2025, 07:27 IST

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लहसुन की खेती में अपनाएं ये तकनीक, बंपर पैदावार के साथ होगी नोटों की बारिश

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