Rajasthan

विश्व धरोहर और ऐतिहासिक खूबसूरती

Last Updated:November 20, 2025, 19:25 IST

रेगिस्तान की कठिन परिस्थितियों के बीच करीब नौ शताब्दी पहले निर्मित जैसलमेर का सोनार किला आज भी इंजीनियरिंग और स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण है. पीले बलुआ पत्थरों से बना यह किला सूर्यास्त के समय सोने जैसी चमक बिखेरता है, जिससे इसे “सोनार दुर्ग” नाम मिला। 1156 में रावल जैसल द्वारा स्थापित यह किला राजस्थान के सबसे पुराने और दुनिया के सबसे बड़े किलों में से एक है.यहां हजारों लोग निवास करते ह

रेगिस्तान की तपती धूप, असमान भूभाग और सीमित संसाधनों के बावजूद करीब नौ शताब्दी पहले बनाए गए इस दुर्ग का स्थापत्य आज भी इंजीनियरिंग का चमत्कार है. किले की दीवारें पीले बलुआ पत्थर से बनी हैं जो दिन में हल्की पीली और शाम ढलते-ढलते सोने की परत जैसी दिखने लगती हैं. यहां अमेरिका,जापान, इटली, इंडोनेशिया,लंदन सहित कई देशों से पर्यटक आते है.

इसकी खूबसूरती हर किसी को अपनी और आकर्षित करती है

लगभग 870 वर्ष पूर्व पीले बलुआ पत्थरों से रचा गया जैसलमेर का सोनार किला आज भी अपनी खूबसूरती और रहस्यमयी रौनक से दुनिया को आकर्षित करता है. सूर्यास्त के समय किले की दीवारें ठीक सोने जैसी चमकती हैं और इसी अनोखी चमक के कारण इसे सोनार दुर्ग कहा जाता है.

यहां किले की हवेलियां, मन्दिर को देखकर दंग रह जाते है पर्यटक

साल 2013 में यूनेस्को ने इस किले को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया था. पिछले कई वर्षों से हर साल 10 लाख से अधिक देशी-विदेशी पर्यटक यहां पहुंचते हैं और किले की गलियों, हवेलियों और इसके जीवंत बाज़ारों को देखकर दंग रह जाते हैं.

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राजस्थान का दूसरा सबसे पुराना किलो में शामिल है

जैसलमेर किला को ‘सोनार किला’ के नाम से भी जाना जाता है. ये दुनिया के सबसे बड़े किलों में से एक और राजस्थान का दूसरा सबसे पुराना किला है. बलुआ पत्थरों से बने इस किले को शहर का असली गहना माना जाता है. शाम के समय यहां से शहर का खूबसूरत नजारा देखने मिलता है.

इसमें राजपुताना और इस्लामी शैली की वास्तुकला देखने को मिलती है

यह किला 1500 फीट लंबा और 750 फीट चौड़ा और 250 फीट ऊंचे पर्वत पर बना हुआ है. किले में चार प्रवेश द्वार है जिनमें से हर एक द्वार पर तोपे भी लगी हुई हैं. इस किले में कुछ हवेलियां भी हैं जिनमें पटवाओं की हवेली, नथमल की हवेली, सलाम सिंह की हवेली शामिल हैं. इस किले में राजपुताना और इस्लामी शैली की शानदार वास्तुकला देखने को मिलती है. किले के अंदर कुछ खूबसूरत जैन मंदिर भी हैं जोकि 12-15 वीं शताब्दी के बीच निर्मित हैं.

कई लड़ाइयां हुई लेकिन इस किले पर नही फहरा सका जीत का पताका

12वीं शताब्दी में राजा रावल सिंह ने 1156 में सोनार किले की नींव रखी थी. इसे बाहरी आक्रमणों से राज्य की रक्षा के लिए बनाया गया था. जैसलमेर किले में भाटी राजपूतों और दुश्मन राज्यों के बीच कई लड़ाइयां हुई हैं. इस किले पर दुश्मनों ने कई बार कब्जा करने की कोशिश की लेकिन अपने पूरे इतिहास में इस किले को कोई जीत नहीं सका है.

इस समय जैसलमेर में विदेशी पर्यटकों का जमावड़ा रहता है

जैसलमेर किला घूमने के लिए अक्टूबर से फरवरी का समय सबसे अच्छा है. इस समय, तापमान 7 डिग्री सेल्सियस से 24 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है, जो किला घूमने और जैसलमेर की अन्य प्रसिद्ध जगहों पर घूमने के लिए शानदार है.

First Published :

November 20, 2025, 19:25 IST

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जैसलमेर सोनार किला: विश्व धरोहर और ऐतिहासिक खूबसूरती

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