Rajasthan

धरोहर: 1903 की बाढ़ से जन्मा यह बांध, तीन जिलों की है जीवनरेखा, इतिहास, इंजीनियरिंग और जीवन का अनूठा संगम

पाली. राजस्थान में राजा-महाराजाओं के समय सैकड़ों साल पहले बनी कई खास चीजें आज धरोहर के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए है. इन्हीं में से एक नाम जवाई बांध का भी है, जो पाली जिले में स्थित है. इस बांध का निर्माण जोधपुर के पूर्व महाराजा उम्मेद सिंह द्वारा करवाया गया था. इसका उद्देश्य जवाई नदी में आने वाली बाढ़ से प्रभावित होने वाले जिलों की सुरक्षा करना था. हालांकि समय के साथ यह बांध तीन जिलों की जीवनरेखा बन चुका है और 900 गांवों की प्यास बुझाने का बड़ा साधन भी है.

आज यह बांध 80 साल से अधिक पुराना होकर पाली की प्यास बुझाने के साथ-साथ किसानों को सिंचाई के लिए भी पानी उपलब्ध कराता है. एक समय ऐसा भी था, जब यही बांध जोधपुर की प्यास बुझाया करता था. 900 गांवों की प्यास बुझाने वाले जवाई बांध का निर्माण वर्ष 1903 में आई भयंकर बाढ़ के बाद करवाया गया था, जब पाली और जालोर जिलों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा. इसके बाद पूर्व महाराजा उम्मेद सिंह ने इस बांध को बनाने का निर्णय लिया. वर्ष 1946 में इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ और वर्ष 1957 में यह पूरा हुआ.

पश्चिमी राजस्थान का है सबसे बड़ा बांध

जवाई बांध के निकट बसे बिसलपुर गांव के रहने वाले कानाराम मेवाड़ा बताते हैं कि यह पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा बांध है और पाली, सिरोही तथा जालोर जिलों की लाइफ लाइन है. बारिश के मौसम में यह डैम अच्छी तरह भर जाता है. पाली सहित तीन जिलों के 900 गांवों की प्यास बुझाने के साथ-साथ किसानों को भी सिंचाई के लिए पानी यही डैम उपलब्ध कराता है. आस-पास के वाइल्ड लाइफ क्षेत्रों में भी इसी डैम का पानी उपयोग होता है.

तीन जिलों की जीवनरेखा है यह बांध

सिरोही के शिवगंज शहर के अलावा यह जालोर और पाली जिलों की भी जीवनरेखा है. हर साल बारिश के मौसम में गांव-गांव के लोग दुआ करते हैं कि यह बांध भर जाए. हालांकि अच्छी बारिश के बावजूद अब तक बांध पूर्ण क्षमता तक नहीं भरा है, लेकिन उपलब्ध पानी से किसानों को काफी लाभ मिलता है.

11 साल में 60 लाख रुपये में बना यह बांध

जवाई बांध का निर्माण कार्य लगभग 11 वर्ष तक चला. 13 मई 1946 को सुबह 11:30 बजे जोधपुर के पूर्व नरेश उम्मेद सिंह ने इसकी आधारशिला रखी थी और 1956 में यह पूरा होकर तैयार हुआ. इसे बनाने में उस समय लगभग 60 लाख रुपये की लागत आई थी, जबकि आज ऐसे बांध का निर्माण कल्पना से भी परे है.

उस समय की इंजीनियरिंग का है अद्भुत उदाहरण

जवाई बांध 20वीं सदी के मध्य की इंजीनियरिंग क्षमता का शानदार प्रतीक है. लगभग 3.5 किलोमीटर लंबा और 61 मीटर ऊंचा यह बांध राजस्थान की शुष्क जलवायु और समय की चुनौतियों का सामना करने के लिए बनाया गया है. यह बांध ईंट और मिट्टी की मिश्रित संरचना से निर्मित है, जो इसे मजबूती और लागत-प्रभावशीलता प्रदान करती है.

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