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मेवाड़ की वीरांगना हाड़ी रानी : प्रेम के लिए नहीं, सम्मान के लिए दिया सिर का बलिदान 

Last Updated:December 02, 2025, 19:13 IST

love story of Hadi Rani : मेवाड़ की धरती वीरता और त्याग की अनगिनत कहानियों से भरी है, लेकिन हाड़ी रानी की कथा आज भी दिलों को झकझोर देती है. पति-पत्नी के प्रेम के बीच राष्ट्र की प्रतिष्ठा को सर्वोपरि रखकर दिया गया यह अद्भुत बलिदान, इतिहास में त्याग और साहस की अनुपम मिसाल है. हाड़ी रानी आज भी मेवाड़ के शौर्य और सम्मान का प्रतीक बनी हुई हैं.

उदयपुर : मेवाड़ की धरती अपने शौर्य और त्याग की कहानियों के लिए जानी जाती है, लेकिन इनमें से एक कथा आज भी लोगों की भावनाओं को झकझोर देती है – हाड़ी रानी की प्रेम और बलिदान से भरी कहानी. इतिहास के पन्नों में दर्ज यह प्रसंग पति-पत्नी के अटूट प्रेम के साथ-साथ राज्य के सम्मान की रक्षा के लिए किए गए असाधारण त्याग का प्रतीक है. हाड़ी रानी, साल उमराव की सुपुत्री थीं, जिनका विवाह मेवाड़ के वीर सरदार राव चूड़ावत से हुआ था. विवाह के कुछ समय बाद ही मेवाड़ पर मुगलों के आक्रमण का खतरा मंडराने लगा, जिसके चलते महाराणा राज सिंह ने राव चूड़ावत को युद्ध के लिए तत्काल बुलावा भेजा.

राव चूड़ावत नवविवाहिता पत्नी को छोड़कर रणभूमि में जाने को लेकर असमंजस में थे. पति की यह दुविधा हाड़ी रानी से देखी नहीं गई. उन्होंने समझ लिया कि उनका प्रेम कहीं न कहीं चूड़ावत की वीरता को रोक रहा है, जो मेवाड़ की प्रतिष्ठा के लिए उचित नहीं था. इसके बाद हाड़ी रानी ने ऐसा निर्णय लिया, जिसने इस कहानी को सदियों तक अमर कर दिया. उन्होंने अपने पति को प्रेरित करने और कर्तव्य के मार्ग पर अडिग करने के लिए स्वयं का बलिदान चुन लिया.

हाड़ी रानी के बलिदान से गूंजा मेवाड़कहा जाता है कि उन्होंने अपना सिर एक थाल में मंगवा कर राव चूड़ावत के पास भेज दिया. इस दृश्य को देख राव चूड़ावत स्तब्ध रह गए, लेकिन साथ ही यह बलिदान उनके भीतर असाधारण साहस भर गया. उन्होंने युद्धभूमि में प्रवेश करते समय सिर को अपनी ढाल से बांधा और दुश्मनों का सामना किया. वीरता से लड़े इस युद्ध में अंततः वे भी रणभूमि में वीरगति को प्राप्त हुए, लेकिन मेवाड़ का सम्मान बना रहा.

प्रेम और त्याग की प्रतीक वीरांगना हाड़ी रानीहाड़ी रानी की यह कथा आज भी मेवाड़ की संस्कृति, लोकगीतों और जनमानस में जीवित है. इतिहासकारों का मानना है कि यह सिर्फ एक त्याग की गाथा नहीं, बल्कि प्रेम की ऐसी मिसाल है, जहां व्यक्तिगत भावनाओं को राष्ट्र और सम्मान के आगे समर्पित कर दिया जाता है. इसीलिए हाड़ी रानी का नाम आज भी मेवाड़ के पराक्रम और त्याग की प्रतीक के रूप में आदर से लिया जाता है.

About the AuthorRupesh Kumar Jaiswal

रुपेश कुमार जायसवाल ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के ज़ाकिर हुसैन कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस और इंग्लिश में बीए किया है. टीवी और रेडियो जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएट भी हैं. फिलहाल नेटवर्क18 से जुड़े हैं. खाली समय में उन…और पढ़ें

Location :

Udaipur,Rajasthan

First Published :

December 02, 2025, 19:13 IST

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मेवाड़ की हाड़ी रानी: प्रेम और त्याग की अमर कथा, जिसने इतिहास को नया मोड़ दिया

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