चीन बनेगा नई महाशक्ति! ट्रंप बना रहे दुनिया को दुश्मन और ड्रैगन फैला रहा प्यार, जिनपिंग ने एकसाथ 53 देशों को साधा

अफ्रीका पर क्यों है नजरआप सोच रहे हैं कि जब दुनिया में इतने बड़े-बड़े देश हैं तो चीन ने अफ्रीकी देशों पर ही क्यों नजर जमाई. दरअसल, अफ्रीकी देशों के पास अकूत प्राकृतिक संपदा है, जिस पर अमेरिका की भी नजर है. लेकिन, राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले दिनों ज्यादातर अफ्रीकी देशों पर भी टैरिफ लगा दिया था. इससे अमेरिका को होने वाले व्यापार में गिरावट आई, जबकि चीन ने आयात शुल्क को खत्म करके अफ्रीकी देशों को न सिर्फ राहत दी है, बल्कि उनके प्राकृतिक स्रोत को अपने देश में खीचंने की पुख्ता तैयारी भी कर ली है.
छूट देकर भी चीन फायदे मेंचीन ने अफ्रीकी देशों को आयात शुल्क में छूट देकर भी अपने लिए विन- विन सिचुएशन बना ली है. साल 2025 के आंकड़े देखें तो चीन और अफ्रीकी देशों का कुल कारोबार रिकॉर्ड 348 अरब डॉलर यानी करीब 29 लाख करोड़ 2025 में चीन-अफ्रीका कुल कारोबार (bilateral trade) रिकॉर्ड $348 बिलियन (लगभग 33 लाख करोड़ रुपये) रहा है. इसमें से चीन का निर्यात 225 अरब डॉलर यानी करीब 21.37 लाख करोड़ रुपये और अफ्रीका का चीन को निर्यात 123 अरब डॉलर यानी करीब 11.65 लाख करोड़ रुपये रहा है. इस तरह देखा जाए तो अफ्रीका फिलहाल 102 अरब डॉलर के व्यापार घाटे में रहा है. पिछले साल यह घाटा 65 फीसदी के आसपास बढ़ गया है.
सबसे बड़ा पार्टनर है अफ्रीकाआपको जानकर हैरानी होगी कि पिछले 17 साल अफ्रीकी देश चीन के सबसे बड़े ट्रेड पार्टनर हैं. दोनों के बीच कारोबार का अंकाड़ा पिछले 2 दशक में करीब 28 गुना तक बढ़ गया है. अब अफ्रीकी प्रोडक्ट पर शून्य टैरिफ लगाकर चीन पूरी तरह फायदे में आ जाएगा और अफ्रीका ज्यादातर निर्यात पर कब्जा कर लेगा. आंकड़े साफ बताते हैं कि अफ्रीका पर टैरिफ खत्म करने से ज्यादा फायदा चीन को ही होने वाला है.

चीन ने सबसे तेज बढ़ती जीडीपी वाले देश भारत के साथ संबंध सुधारने शुरू कर दिए हैं.
क्यों है चीन के लिए भविष्य का मास्टर स्ट्रोकअफ्रीका से आने वाले प्रोडक्ट चीन के लिए अन्य देशों के मुकाबले सस्ते पड़ते हैं. चीन इन देशों से तेल, कॉपर, कोबाल्ट, लीथियम, रेयर अर्थ, कोको, कॉफी और फल का बड़ी संख्या में आयात करता है. टैरिफ हटने से यह प्रोडक्ट और भी सस्ते हो जाएंगे, जिससे चीन के विनिर्माण सेक्टर को मजबूती मिलेगी. चीन तो पहले से ही दुनिया की दुकान बना हुआ है. जब वह अफ्रीका से बड़ी मात्रा में कच्चा माल खरीदेगा तो उसका उत्पादन भी कई गुना बढ़ जाएगा. चीन ऐसे प्रोडक्ट पर अपना फोकस बनाए हुए है, जिसकी डिमांड आने वाले समय में सबसे ज्यादा रहने वाली है. जाहिर है कि अमेरिका यहां चूक गया और चीन ने बाजी मार ली.
क्यों खास है चीन की रणनीतिचीन पहले से ही रेयर अर्थ के उत्पादन मामले में काफी आगे है. दुनिया का 90 फीसदी से ज्यादा रेयर अर्थ चीन से ही सप्लाई होता है. अब अफ्रीका से कच्चा माल मंगाकर वह उत्पादन और बढ़ाएगा तो उसका कंट्रोल भी और ज्यादा मजबूत होगा. चीन के ईवी, बैटरी, रिन्यूवेबल एनर्जी जैसे सेक्टर के लिए रेयर अर्थ की सप्लाई काफी महत्वपूर्ण रहने वाली है. अमेरिका ने वैसे तो साली 2027 का लक्ष्य बनाया है कि वह रेयर अर्थ को लेकर अपनी निर्भरता चीन पर खत्म कर देगा. लेकिन, फिलहाल यह दूर की कौड़ी नजर आती है. अगर चीन से रेयर अर्थ की खरीदारी कम होती है तो अमेरिका के रक्षा क्षेत्र पर गंभीर असर पड़ेगा.
अफ्रीका के लिए भी फायदाचीन का यह कदम सिर्फ उसके लिए ही नहीं, अफ्रीकी देशों के लिए भी फायदे का सौदा साबित होगा. अभी चीन के साथ अफ्रीकी देशों का व्यापार घाटा काफी ज्यादा है. टैरिफ खत्म होने के बाद उसका निर्यात निश्चित रूप से बढ़ेगा तो चीन के साथ व्यापार घाटे में भी कमी आएगी. वैसे भी पिछले कुछ साल से चीन अपने कारोबार और गठजोड़ को अफ्रीकी देशों के साथ लगातार बढ़ा रहा है. दूसरी ओर, ट्रंप ने इन देशों पर टैरिफ लगाकर नुकसान पहुंचा दिया. इस तरह, दुनिया की दो महाशक्तियों ने एक ही क्षेत्र को विपरीत रणनीति बनाई है. इसका असर अभी जितना नहीं है, उससे कहीं ज्यादा आने वाले 5 साल में दिखेगा.

ट्रंप जहां टैरिफ लगाकार आज के नुकसान की भरपाई करने पर तुले हैं, वहीं जिनपिंग भविष्य में चीन को आगे ले जाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं.
कारोबार ही नहीं, राजनीतिक सफलता भीट्रंप को तो आप देख ही रहे हैं. जबसे दूसरी बार राष्ट्रपति पद पर बैठे हैं उन्होंने दुनिया को परेशान कर रखा है. अफ्रीकी देशों पर टैरिफ लगाकर उन्हें भी अपने खिलाफ कर लिया है. इससे व्यापार में तो गिरावट आएगी ही, राजनीतिक रूप से भी चीन को बढ़त मिल सकती है. अफ्रीकी देश संयुक्त राष्ट्र के सदस्य हैं और चीन के एक दांव से 53 देश कमोबेश उसकी तरफ रुझान रखने लगे हैं. अगर किसी मुद्दे पर यूएन में वोटिंग होती है तो यह बढ़त निश्चित रूप से चीन को ही मिलेगी. चीन को यह सफलता मिलती है तो अमेरिका की उसे रोकने की रणनीति और कमजोर पड़ जाएगी.

ट्रंप सिर्फ टैरिफ के बूते अपने घाटे की भरपाई पर नजर रख रहे, जबकि चीन व्यापार बढ़ाने और उत्पादन पर जोर दे रहा है.
अमेरिका और अफ्रीका का कितना कारोबारचीन के मुकाबले अमेरिका का अफ्रीका के साथ कारोबार पहले से ही कम रहा है. ट्रंप के टैरिफ लगाने के बाद इसमें और गिरावट आने की आशंका है. साल 2025 के आंकड़े देखें तो दोनों के बीच करीब 84 अरब डॉलर का कारोबार रहा, जो चीन के मुकाबले 5 गुना से भी कम है. ऊपर से अमेरिका से अफ्रीका को निर्यात 40 अरब डॉलर तो आयात 43 अरब डॉलर का है. इसका मतलब है कि अमेरिका फिलहाल व्यापार घाटा सह रहा है. यही वजह है कि ट्रंप टैरिफ लगाकर इसकी भरपाई करना चाहते हैं.
चहेते यूरोपीय यूनियन की भी नाराजगीट्रंप ने अपने सबसे बड़े कारोबारी साझेदारी यूरोपीय संघ को भी टैरिफ के लपेटे में लेकर नाराज कर लिया है. चीन ने जहां 1 मई को 53 अफ्रीकी देशों को शून्य टैरिफ का तोहफा दिया है तो ट्रंप ने इसी दिन ईयू के 27 देशों से आयात होने वाले वाहनों पर 25 फीसदी टैरिफ ठोक दिया है. यह फैसला तब किया है, जबकि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उनके टैरिफ को अवैध करार दे दिया है. साथ ही दोनों के बीच यह समझौता भी है कि कोई भी टैरिफ 15 फीसदी से ज्यादा नहीं होगा. ट्रंप ने इस दायरे को तोड़ते हुए उल्टा ईयू पर ही वादाखिलाफी का आरोप लगा दिया है.



