Rajasthan

FCI Procurement Quality Process | FCI अजमेर गेहूं खरीद गुणवत्ता मानक

Last Updated:May 02, 2026, 12:35 IST

FCI Ajmer News: अजमेर में भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा गेहूं की खरीद के लिए सख्त गुणवत्ता मानक लागू किए गए हैं, ताकि देश की खाद्य सुरक्षा और बफर स्टॉक के लिए केवल सर्वोत्तम अनाज का चयन हो सके. मंडल प्रबंधक राकेश कुमार के नेतृत्व में 14 केंद्रों पर तैनात टीम हर उपज की वैज्ञानिक जांच कर रही है, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण मानक 12 प्रतिशत नमी की सीमा है. इसके अलावा अनाज में क्षतिग्रस्त, टूटे या सिकुड़े हुए दानों की भी बारीकी से जांच की जाती है. भारत सरकार के इन मानकों पर खरा उतरने वाली फसल की ही सरकारी खरीद की जा रही है. इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए किसानों का भुगतान सीधे उनके जनाधार से लिंक बैंक खातों में भेजा जा रहा है, जिससे भुगतान प्रक्रिया तेज और सुरक्षित हो गई है. FCI का उद्देश्य न केवल किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाना है, बल्कि अनाज को लंबे समय तक सुरक्षित भंडारित करना भी है.

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FCI Ajmer Wheat Quality Check Standards: अन्नदाता की कड़ी मेहनत का सही मूल्य सुनिश्चित करने के लिए भारतीय खाद्य निगम (FCI) अजमेर मंडल ने एक बेहद पारदर्शी और तकनीकी रूप से उन्नत व्यवस्था लागू की है. मंडल प्रबंधक राकेश कुमार के नेतृत्व में अजमेर के 14 प्रमुख खरीद केंद्रों पर विशेष टीमें तैनात की गई हैं. इन केंद्रों पर केवल प्रशासनिक अधिकारी ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षित क्वालिटी इंस्पेक्टर्स और पेमेंट इंचार्ज भी मौजूद रहते हैं.

इनका मुख्य कार्य यह सुनिश्चित करना है कि किसान की फसल की जांच से लेकर उसके अंतिम भुगतान तक की प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर कोई मानवीय त्रुटि या देरी न हो. इस व्यवस्था की सबसे बड़ी खूबी यह है कि खरीद संपन्न होते ही भुगतान की राशि सीधे किसान के जनाधार से जुड़े बैंक खाते में पहुँच जाती है. इससे न केवल भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हुई है, बल्कि किसानों का सरकारी तंत्र पर भरोसा भी काफी बढ़ा है.

नमी और दानों की गुणवत्ता की कड़ी कसौटीFCI अजमेर के मंडल प्रबंधक राकेश कुमार के निर्देशन में काम कर रहे विशेषज्ञों और टेस्टिंग इंजीनियर्स ने बताया कि गेहूं की खरीद में सबसे पहला और अनिवार्य मानक ‘नमी’ (Moisture Content) है. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से गेहूं में नमी की मात्रा अधिकतम 12 प्रतिशत तक ही स्वीकार्य मानी जाती है. यदि नमी इससे अधिक हो, तो लंबे समय तक अनाज का भंडारण करना संभव नहीं होता, क्योंकि उसमें फफूंद या कीड़े लगने का खतरा बढ़ जाता है.

नमी की जांच के बाद क्वालिटी इंस्पेक्टर द्वारा फसल के रैंडम नमूने लिए जाते हैं. इन नमूनों का प्रयोगशाला और मैदानी स्तर पर विश्लेषण किया जाता है, जिसमें अन्य अनाजों की मिलावट, डैमेज दाने (क्षतिग्रस्त), स्लाइटली डैमेज दाने (आंशिक रूप से खराब) और सिकुड़े या टूटे हुए दानों की सूक्ष्म जांच की जाती है. भारत सरकार द्वारा तय किए गए इन कड़े मानकों पर जो फसल खरी उतरती है, उसे ही सरकारी गोदामों के लिए योग्य माना जाता है. यह पूरी प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि देश के अन्न भंडार में केवल सर्वोत्तम श्रेणी का अनाज ही संग्रहित हो.

बफर स्टोरेज और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षाFCI का मुख्य उत्तरदायित्व देश की खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ करना और ‘बफर स्टोरेज’ (आपातकालीन स्टॉक) बनाए रखना है. आपातकालीन स्थितियों, जैसे कि अकाल या अन्य आपदाओं के समय आम जनता को निर्बाध खाद्य आपूर्ति सुनिश्चित करना तभी संभव है, जब हमारे पास पर्याप्त और सुरक्षित अनाज भंडार मौजूद हो. इसके अलावा, जहाँ अनाज की पैदावार अधिक होती है, वहाँ से अनाज उठाकर उन क्षेत्रों तक पहुँचाना जहाँ कमी है, FCI की एक प्रमुख जिम्मेदारी है. लंबे समय तक भंडारण (Storage) के लिए अनाज की भौतिक और रासायनिक स्थिति का मजबूत होना अनिवार्य है. अजमेर में अपनाई जा रही यह सख्त जांच प्रक्रिया न केवल किसानों को उनकी फसल का उचित और लाभकारी मूल्य दिला रही है, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से देश की खाद्य सुरक्षा प्रणाली को भी अभेद्य बना रही है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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