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Ajmer Dargah Vs Shiva Temple: विवाद अब दरगाह में पेश होने वाली VIP चादर तक पहुंचा, जानें क्या है इसके पीछे वजह

Last Updated:December 18, 2025, 14:36 IST

Ajmer Dargah Vs Shiva Temple: अजमेर के ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह में संकट मोचन शिव मंदिर होने के दावे से जुड़ा विवाद अब वीआईपी चादर की परंपरा तक पहुंच गया है. अजमेर सिविल न्यायालय में सुनवाई के दौरान वादी विष्णु गुप्ता ने उर्स के दौरान प्रधानमंत्री और अन्य वीआईपी की चादर पेश न करने की मांग की. अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर फैसला सुरक्षित रखा. वादी का कहना है कि चादर पेश होने से उनके मामले में निष्पक्ष सुनवाई प्रभावित हो सकती है, जबकि अल्पसंख्यक विभाग के अधिवक्ता ने धार्मिक परंपरा के पक्ष में दलील दी.विवाद अब दरगाह में पेश होने वाली VIP चादर तक पहुंचा, जानें इसके पीछे की वजहअजमेर दरगाह विवाद मामले में कोर्ट ने सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा

अजमेर. ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह में संकट मोचन शिव मंदिर होने का दावा लेकर चल रहे विवाद में अब नया मोड़ सामने आया है. अजमेर सिविल न्यायालय में इस मामले से जुड़ी सुनवाई में वादी विष्णु गुप्ता ने दरगाह में उर्स के दौरान पेश होने वाली वीआईपी चादर पर रोक लगाने की मांग की. सुनवाई के दौरान न्यायालय ने वादी विष्णु गुप्ता के वकील और अल्पसंख्यक विभाग से जुड़े अधिवक्ता की दलीलें सुनीं. वादी की ओर से कहा गया कि अजमेर दरगाह में संकट मोचन शिव मंदिर होने का मामला कोर्ट में लंबित है.

ऐसे में दरगाह में उर्स के दौरान प्रधानमंत्री और अन्य संवैधानिक पदों पर उपस्थित वीआईपी की चादर चढ़ाई जाती है, जिससे उनके मामले को प्रभावित किया जा सकता है. वादी विष्णु गुप्ता की तरफ से यह भी कहा गया कि अगर चादर पेश की जाती है, तो इसे उनके मामले में साक्ष्य के रूप में नहीं लिया जाए. वहीं, अल्पसंख्यक विभाग के अधिवक्ता ने चादर पेश करने की परंपरा और धार्मिक आयोजन की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए अपनी दलीलें रखीं.

दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद कोर्ट ने निर्णय सुरक्षित रखा

अजमेर जिला न्यायालय ने दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद मामले पर निर्णय सुरक्षित रखा है और फिलहाल कोई अंतिम आदेश नहीं दिया गया. सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि अदालत इस मामले में सभी कानूनी और धार्मिक पहलुओं का गंभीरता से मूल्यांकन करेगी. उर्स के दौरान चादर पेश करने की परंपरा सालों से चली आ रही है और इसमें प्रधानमंत्री सहित अन्य वीआईपी भी शामिल होते हैं. वादी का तर्क है कि इस परंपरा के चलते उनके केस की निष्पक्ष सुनवाई प्रभावित हो सकती है. वहीं, अदालत इस बात का भी ध्यान रखेगी कि धार्मिक परंपराओं का उल्लंघन न हो और सभी पक्षों के अधिकार सुरक्षित रहें.

प्रधानमंत्री और वीआईपी चादर पर रोक की मांग

वादी विष्णु गुप्ता ने न्यायालय में एप्लीकेशन दायर कर उर्स के दौरान प्रधानमंत्री और अन्य वीआईपी की चादर पेश न करने की मांग की. उनका कहना है कि चादर पेश होने से मामले में साक्ष्य प्रभावित हो सकते हैं और इस पर अदालत को रोक लगाने का निर्देश देना चाहिए. अदालत ने इस मुद्दे पर भी दोनों पक्षों से विचार-विमर्श किया और फिलहाल फैसला सुरक्षित रखा. सुनवाई के बाद यह स्पष्ट हो गया कि विवाद केवल मंदिर और दरगाह तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब यह वीआईपी चादर की परंपरा तक पहुंच गया है. अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी कानूनी पहलुओं का अध्ययन करने का संकेत दिया है.

About the Authordeep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें

Location :

Ajmer,Rajasthan

First Published :

December 18, 2025, 14:36 IST

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विवाद अब दरगाह में पेश होने वाली VIP चादर तक पहुंचा, जानें इसके पीछे की वजह

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