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उदयपुर के शिल्पग्राम में महाराष्ट्र की लोककला का रंग, सोंगी मुखौटा डांस ने बटोरी खूब तालियां

Last Updated:December 24, 2025, 15:46 IST

Shilpgram Festival in Udaipur : उदयपुर के शिल्पग्राम महोत्सव में महाराष्ट्र की एक दुर्लभ लोककला ने दर्शकों को चौंका दिया. लावणी से अलग पहचान रखने वाला सोंगी मुखौटा नृत्य रंग-बिरंगे मुखौटों, दमदार अभिनय और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप के साथ मंच पर उतरा. इस प्रस्तुति ने बच्चों से लेकर युवाओं तक सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया.

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उदयपुर : शिल्पग्राम महोत्सव में इस बार महाराष्ट्र से आए कलाकारों ने अपनी अनूठी लोककला से दर्शकों का दिल जीत लिया.आमतौर पर महाराष्ट्र की पहचान लावणी नृत्य से होती है, लेकिन इस महोत्सव में एक ऐसा पारंपरिक डांस फॉर्म देखने को मिला, जिसने लोगों को हैरान भी किया और रोमांचित भी. यह डांस है सोंगी मुखौटा नृत्य, जिसे तमाशा लोककला का ही एक खास रूप माना जाता है.

शिल्पग्राम के मुक्ताकाशी मंच पर जब महाराष्ट्र के कलाकारों ने हाथों से बने रंग-बिरंगे मुखौटे पहनकर प्रस्तुति दी, तो पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा. इस नृत्य में कलाकार अलग-अलग तरह के मुखौटे पहनते हैं, जिनमें भगवा रंग का शेर, देवी-देवताओं के चेहरे और लोकजीवन से जुड़े कई प्रतीक शामिल होते हैं. इन मुखौटों को कलाकार स्वयं तैयार करते हैं, जो लकड़ी, कपड़े और प्राकृतिक रंगों से बनाए जाते हैं.

शिल्पग्राम में सोंगी मुखौटा नृत्य का जादूसोंगी मुखौटा नृत्य की खास बात यह है कि इसमें केवल नृत्य ही नहीं, बल्कि अभिनय, भाव-भंगिमा और संगीत का भी अनूठा संगम देखने को मिलता है. ढोलक, हलगी और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर कलाकार मंच पर उतरते हैं और मुखौटों के जरिए कहानी को जीवंत कर देते हैं. पहले यह नृत्य मुख्य रूप से महाराष्ट्र के तटीय इलाकों में रहने वाले मछुआरा समुदाय द्वारा किया जाता था. यह नृत्य उनके जीवन, संघर्ष, आस्था और प्रकृति से जुड़ाव को दर्शाता है.

महाराष्ट्र की लोकसंस्कृति से रूबरू शिल्पग्रामसमय के साथ यह लोककला मनोरंजन का एक लोकप्रिय माध्यम बन गई और अब इसे मंचीय प्रस्तुतियों के रूप में देश-विदेश में दिखाया जाने लगा है. उदयपुर के शिल्पग्राम में भी जब यह प्रस्तुति हुई, तो दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए. खासकर बच्चों और युवाओं में इस डांस को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला.

सोंगी नृत्य ने जोड़ा युवा पीढ़ी को जड़ों सेमहाराष्ट्र से आए कलाकारों ने बताया कि इस तरह के महोत्सव लोककलाओं को जीवित रखने में बड़ी भूमिका निभाते हैं. शिल्पग्राम जैसे मंच कलाकारों को अपनी परंपरा दिखाने का अवसर देते हैं और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं. उदयपुर की धरती पर मिली सराहना से कलाकार भी उत्साहित नजर आए.शिल्पग्राम महोत्सव में सोंगी मुखौटा नृत्य न सिर्फ मनोरंजन का साधन बना, बल्कि महाराष्ट्र की समृद्ध लोकसंस्कृति की एक झलक भी लोगों के सामने लेकर आया.

About the AuthorRupesh Kumar Jaiswal

A Delhi University graduate with a postgraduate Diploma in Journalism and Mass Communication, I work as a Content Editor with the Rajasthan team at India Digital. I’m driven by the idea of turning raw in…और पढ़ें

Location :

Udaipur,Rajasthan

First Published :

December 24, 2025, 15:46 IST

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शिल्पग्राम महोत्सव उदयपुर में महाराष्ट्र का सोंगी मुखौटा नृत्य आकर्षण.

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