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बच्चों को भी पड़ रहा हार्ट अटैक, बूंदी में नहाते समय मासूम की मौत, जानें डॉक्टर क्या कह रहे?

Last Updated:December 31, 2025, 16:40 IST

Heart Attack Problems In Winter : राजस्थान के सीकर, भीलवाड़ा और बूंदी में तीन बच्चों की हार्ट अटैक से मौत ने चिकित्सा जगत को चौंकाया है. विशेषज्ञ डॉ. पुरुषोत्तम मित्तल और डॉ. शुभम जोशी ने सतर्कता की सलाह दी. यह सवाल अब तेजी से उठ रहा है कि आखिर बच्चों में हार्ट अटैक जैसी गंभीर स्थिति क्यों बन रही है और इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं.

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कोटा. राजस्थान में कम उम्र के बच्चों में हार्ट अटैक से हो रही मौतों के मामले लगातार चिंता बढ़ा रहे हैं. सीकर, भीलवाड़ा और बूंदी जिलों से सामने आए मामलों में तीन मासूम बच्चों की हार्ट अटैक से मौत हो चुकी है. बीते दिन मंगलवार को बूंदी जिले के बांसी कस्बे में एक 14 वर्षीय छात्रा की बाथरूम में नहाते समय साइलेंट अटैक से मौत हो गई. इतनी कम उम्र में दिल का दौरा पड़ना न सिर्फ परिजनों बल्कि पूरे समाज और चिकित्सा जगत के लिए भी एक गंभीर चेतावनी बनकर सामने आया है. यह सवाल अब तेजी से उठ रहा है कि आखिर बच्चों में हार्ट अटैक जैसी गंभीर स्थिति क्यों बन रही है और इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं.

राजस्थान में बच्चों में हार्ट अटैक और कार्डियक डेथ के बढ़ते मामलों को लेकर विशेषज्ञों ने गहरी चिंता जताई है. वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. पुरुषोत्तम मित्तल के अनुसार यदि किसी बच्चे को हार्ट अटैक जैसी स्थिति से पहले एक घंटे के भीतर कोई बीमारी, तकलीफ या असामान्य लक्षण दिखाई देते हैं, तो वह हृदय संबंधी समस्या का संकेत हो सकता है. उन्होंने बताया कि बच्चों में कार्डियक डेथ के कारण वॉल प्रॉब्लम, जन्मजात हृदय रोग, अनुवांशिक कारण और सांस फूलने जैसी समस्याएं हो सकती हैं. यदि परिवार में पहले किसी सदस्य को हृदय रोग रहा हो, तो बच्चों की समय रहते जांच बेहद जरूरी है. वहीं साइलेंट हार्ट अटैक की पुष्टि केवल पोस्टमार्टम के बाद ही संभव हो पाती है.

हृदय विशेषज्ञों की सलाहहृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. शुभम जोशी के अनुसार बच्चों में कम उम्र में हार्ट अटैक के मामलों के पीछे ब्लॉकेज, जन्मजात हृदय रोग या हृदय गति में गड़बड़ी जैसे कारण हो सकते हैं. उन्होंने बताया कि बच्चों के जन्म के बाद भी समय-समय पर कार्डियोलॉजिस्ट से परामर्श लेना जरूरी है. साथ ही बच्चों को नियमित शारीरिक गतिविधियों में शामिल करना चाहिए, जिससे रक्त संचार सही बना रहे और हृदय स्वस्थ रह सके.

मानसिक स्वास्थ्य भी बन रहा बड़ा कारणकाउंसलर दीप्ति श्रीवास्तव ने बताया कि बच्चों में बढ़ता मानसिक तनाव, माता-पिता की अत्यधिक अपेक्षाओं का दबाव, शारीरिक गतिविधियों की कमी, नकारात्मक सोच और लंबे समय तक चिंता में रहना दिल और दिमाग दोनों पर बुरा असर डाल सकता है. यही वजह है कि बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य भी अब उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है जितना शारीरिक स्वास्थ्य. विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते सजगता और संतुलित जीवनशैली ही इस खतरे को कम कर सकती है.

About the AuthorAnand Pandey

नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें

First Published :

December 31, 2025, 16:33 IST

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