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गेहूं सरसों फसल सुरक्षा अलर्ट 2026 | Wheat and Mustard Crop Protection Tips Alwar News

Last Updated:January 04, 2026, 08:19 IST

Alwar News: खैरथल–तिजारा के किसानों को गेहूं में पीलापन रोकने के लिए यूरिया-जिंक के छिड़काव और सरसों में चेपा कीट से बचाव के लिए कीटनाशकों के प्रयोग की सलाह दी गई है. सही सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण से ही बेहतर उत्पादन संभव है.

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अलवर: राजस्थान के खैरथल–तिजारा और अलवर जिले में रबी सीजन की फसलें अब अपने महत्वपूर्ण पड़ाव पर हैं. इस समय किसान बड़े पैमाने पर गेहूं और सरसों की खेती कर रहे हैं. फसलें अब बढ़वार (Growth stage) की अवस्था में हैं, जिसके चलते खेतों में सिंचाई और देखरेख का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है. हालांकि, बढ़ते कोहरे और बदलती ठंड के बीच फसलों में पीलापन और विभिन्न कीटों के हमले की संभावना बढ़ गई है. कृषि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि इस समय उचित प्रबंधन नहीं किया गया, तो किसानों के उत्पादन पर सीधा और नकारात्मक असर पड़ सकता है.

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, कड़ाके की ठंड और पोषक तत्वों की कमी के कारण गेहूं की फसल में पीलापन देखा जा रहा है. यदि पौधे की पुरानी पत्तियां ऊपर से आधी पीली नजर आ रही हैं, तो यह मुख्य रूप से नत्रजन (Nitrogen) और जिंक की कमी का संकेत है. इससे निपटने के लिए किसानों को सलाह दी गई है कि वे 100 लीटर पानी में 2 किलो यूरिया और 500 ग्राम जिंक मिलाकर घोल तैयार करें और फसल पर स्प्रे करें. यदि स्प्रे करना संभव न हो, तो सिंचाई के साथ भी यूरिया और जिंक का छिड़काव किया जा सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस चरण में पौधों की जड़ों को मजबूत करने के लिए समय पर सिंचाई करना भी अत्यंत आवश्यक है.

सरसों पर चेपा और एफिड कीट का सायासरसों की खेती करने वाले किसानों के लिए आगामी कुछ दिन निगरानी के लिहाज से बेहद अहम हैं. इस मौसम में सरसों में ‘चेपा कीट’ (Mustard Aphid) लगने की प्रबल संभावना रहती है, जो फूलों का रस चूसकर फसल को खोखला कर देता है. यदि फसल में कीट का प्रकोप दिखाई दे, तो आसमान साफ होने पर ‘इमिडाक्लोप्रिड़’ 0.25 मि.ली. प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करना चाहिए. वहीं, ‘एफिड कीट’ के नियंत्रण के लिए डायमेथोएट 30 ईसी का उपयोग करने की सलाह दी गई है. इसके अलावा, सरसों में रंगे हुए बग और चूरा कीट की रोकथाम के लिए मैलाथियान 5% पाउडर (25 किलो प्रति हेक्टेयर) का प्रयोग प्रभावी साबित होता है.

खरपतवार नियंत्रण और सिंचाई प्रबंधनफसल की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए खरपतवार नियंत्रण अनिवार्य है. कृषि अधिकारियों ने बताया कि गेहूं की फसल में चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों के सफाए के लिए बुआई के 30-35 दिन बाद ‘2, 4-डी एस्टर’ शाकनाशी (1 लीटर प्रति हेक्टेयर) का प्रयोग करें. किसानों को यह भी हिदायत दी गई है कि सिंचाई के समय खेत में जलभराव न होने दें, क्योंकि अत्यधिक पानी से पौधों की सांस लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. सही समय पर खाद-पानी और कीटनाशकों का संतुलित प्रयोग ही बंपर पैदावार की गारंटी है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore is a multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience in digital media, social media management, video production, editing, content writing, and graphic, A MAJMC gra…और पढ़ें

Location :

Alwar,Alwar,Rajasthan

First Published :

January 04, 2026, 08:19 IST

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गेहूं-सरसों किसानों के लिए अलर्ट: पीलापन, चेपा और एफिड से बचाव जरूरी; कृषि…

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