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आखिरी बार कौन सा संविधान संशोधन हुआ था पास, किस पार्टी के पास थे दो तिहाई सदस्‍य? – which party last time had 2 third majority in parliament

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आखिरी बार कौन सा संविधान संशोधन हुआ पास, किस पार्टी के पास थे दो तिहाई सदस्‍य?

Last Updated:April 18, 2026, 10:15 IST

Parliament News: सरकार महिला आरक्षण कानून में संशोधन के लिए लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक लाई थी. इसके लिए दो तिहाई सदस्‍यों का समर्थन जरूरी था. मौजूदा सरकार के पास इतना संख्‍याबल नहीं था. 17 अप्रैल 2026 को घंटों की बहस के बाद इसपर मतदान हुआ और संविधान संशोधन विधेयक गिर गया. मतलब बिल को पास कराने के लिए जरूरी सदस्‍यों का समर्थन नहीं मिल सका, पर क्‍या आपको मालूम है कि आखिरी बार किस पार्टी को दो तिहाई बहुमत हासिल हुआ था…आखिरी बार कौन सा संविधान संशोधन हुआ पास, किस पार्टी के पास थे दो तिहाई सदस्‍य?Zoomसंसद में आखिरी बार राजीव गांधी के नेतृत्‍व में कांग्रेस पार्टी को लोकसभा में दो तिहाई बहुमत हासिल हुआ था. (फाइल फोटो)

Parliament News: लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के खारिज होने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. विपक्षी दलों ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया और भाजपा सरकार पर परिसीमन के जरिए दक्षिणी राज्यों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया. यह संशोधन विधेयक संविधान के अनुच्‍छेद 368 के तहत लोकसभा में लाया गया था. विधेयक को पास कराने के दो तिहाई सदस्‍यों की जरूरत थी. 540 सदस्‍यों के हिसाब से देखें तो 360 मेंबर्स की जरूरत थी, लेकिन मौजूदा सरकार के पास कुल मिलाकर 293 सदस्‍य ही थे. विधेयक गिरने के बाद सरकार की तरफ से विपक्ष के सवाल का मुकम्‍मल जवाब दिया गया. खैर ये तो राजनीतिक आरोप-प्रत्‍यारोप की बात है, पर असल सवाल यह है कि आखिरी बार कब और किस सरकार के पास लोकसभा में दो तिहाई बहुमत यानी 360 सदस्‍य थे और उस सरकार ने अपने दम पर संविधान संशोधन विधेयक को पास करवाया था.

दरअसल, भारत की संसदीय राजनीति में संविधान संशोधन जैसे अहम फैसलों के लिए व्यापक सहमति की परंपरा पिछले चार दशकों में और मजबूत हुई है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि 1984 के बाद से किसी भी एक दल को लोकसभा में अपने दम पर दो तिहाई बहुमत हासिल नहीं हुआ है. आखिरी बार ऐसा 1984 के आम चुनाव में देखने को मिला था, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने ऐतिहासिक 414 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया था. इस भारी जनादेश के आधार पर सरकार ने 1985 में 52वां संविधान संशोधन पारित किया, जिसे दलबदल विरोधी कानून के रूप में जाना जाता है. इस संशोधन ने भारतीय राजनीति में दल-बदल की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने का प्रयास किया.

इंदिरा गांधी की हत्‍या के बाद साल 1984 में हुए आम चुनाव में राजीव गांधी की अगुआई में कांग्रेस पार्टी को कुल 414 सीटें हासिल हुई थीं. (फाइल फोटो/Reuters)

…पर इसे पास नहीं करवा सके थे राजीव गांधी

हालांकि, लोकसभा में भारी बहुमत होने के बावजूद राजीव गांधी सरकार को हर मोर्चे पर सफलता नहीं मिली. साल 1989 में पंचायतों को संवैधानिक दर्जा देने के उद्देश्य से लाया गया 64वां संविधान संशोधन विधेयक राज्यसभा में पारित नहीं हो सका. यह उदाहरण इस बात को बताता है कि केवल लोकसभा में बहुमत पर्याप्त नहीं होता, बल्कि संसद के दोनों सदनों में समर्थन जरूरी है. बता दें कि संविधान के अनुच्‍छेद 368 के तहत संशोधन करने के लिए दो तिहाई सदस्‍यों (कुल सदस्‍यों में या उस दौरान उपस्थित सदस्‍यों के लिहाज से) का समर्थन जरूरी होता है. मौजूदा सरकार ने महिला आरक्षण कानून में संविधान संशोधन करने क लिए विधेयक पेश किया था, पर लोकसभा में सरकार के पास दो तिहाई बहुमत नहीं था. इसपर सदन में आम सहमति भी नहीं बन सकी, जिस वजह से विधेयक गिर गया.

गठबंधन का दौर

राजीव गांधी के बाद 1990 के दशक में गठबंधन राजनीति का दौर शुरू हुआ, जिसने सहमति आधारित निर्णयों को और जरूरी बना दिया. 1992 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव की अल्पमत सरकार ने विभिन्न दलों के बीच आम राय बनाकर पंचायत राज व्यवस्था को संवैधानिक दर्जा दिलाया. यह 73वां संविधान संशोधन के रूप में पारित हुआ, जिसने ग्रामीण स्वशासन को नई मजबूती दी. इस तरह लोकसभा में प्रचंड बहुमत होने के बावजूद जो काम राजीव गांधी नहीं करवा सके थे, उसे नरसिंह राव की अल्‍पमत सरकार ने आम सहमति के जरिये करवा दिया. 1984 के बाद से किसी भी दल को अपने दम पर दो तिहाई बहुमत न मिलने के कारण संविधान संशोधन अब व्यापक राजनीतिक सहमति का विषय बन गया है. यही कारण है कि हाल के वर्षों में भी बड़े संवैधानिक बदलावों के लिए सरकारों को विपक्षी दलों के साथ संवाद और समर्थन जुटाने की आवश्यकता पड़ती है.

About the AuthorManish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें

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New Delhi,Delhi

First Published :

April 18, 2026, 07:48 IST

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