दरगाह या मंदिर? अजमेर केस में आज सुनवाई, दोनों पक्ष रखेंगे अपने ठोस तर्क

Last Updated:April 18, 2026, 10:26 IST
Ajmer Dargah Dispute Court Hearing: अजमेर दरगाह विवाद एक बार फिर चर्चा में है, जहां आज कोर्ट में सुनवाई होगी. याचिकाकर्ता ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर मंदिर होने का दावा कर रहे हैं, जबकि दूसरी ओर दरगाह कमेटी धार्मिक स्थल की अखंडता बनाए रखने की बात कर रही है. कोर्ट ने पहले ही एएसआई और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किए हैं. सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण दलीलें सामने आ सकती हैं. संभावित तनाव को देखते हुए प्रशासन सतर्क है और पूरे मामले पर देशभर की नजर बनी हुई है.
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अजमेर दरगाह विवाद को लेकर आज कोर्ट में सुनवाई होगी
अजमेर: राजस्थान के अजमेर शरीफ दरगाह परिसर में प्राचीन संकट मोचन महादेव शिव मंदिर होने के दावे वाले संवेदनशील मामले की आज सिविल न्यायालय में एक बार फिर सुनवाई होनी है. इस मामले में हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता और महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार (दिलीप सिंह परमार) द्वारा दायर याचिकाओं पर दोनों पक्ष अपने ठोस साक्ष्य और दलीलें पेश करेंगे.विष्णु गुप्ता आज सुबह कोर्ट परिसर पहुंचे. उन्होंने कहा कि दरगाह परिसर में लगातार ऐतिहासिक साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ हो रही है.
पुराने दरवाजे तोड़ने जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने न्यायालय में इस पर अपना विस्तृत पक्ष रखने की बात कही. याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पहले भगवान शिव का मंदिर था, जिसे बाद में तोड़कर बनाया गया. महाराणा प्रताप सेना की ओर से भी कई साक्ष्य अदालत में जमा किए गए हैं. दूसरे याचिकाकर्ता दिलीप सिंह परमार भी आज कोर्ट पहुंचे और कहा, “हम न्यायालय में अपने ठोस प्रमाण रखेंगे. हिंदुस्तान को मजार-मुक्त भारत बनाने की आवश्यकता है.”
दोनों पक्षों के अधिवक्ता आज विस्तार से रखेंगे दलील
कोर्ट ने पहले ही अजमेर दरगाह कमेटी, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को नोटिस जारी कर दिए थे. दोनों पक्षों के अधिवक्ता आज विस्तार से दलीलें रखेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सिविल कोर्ट की सुनवाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है, इसलिए सुनवाई सामान्य रूप से आगे बढ़ रही है. विष्णु गुप्ता ने अतिरिक्त मांगें भी रखी हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अजमेर शहर का नाम बदलकर पुनः ‘अजमेरु’ करने का अनुरोध किया है. साथ ही संस्कृत वेद विद्यालय को पुनर्स्थापित करने और अजमेर की प्राचीन ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित रखने की मांग कोर्ट में रखने की बात कही.
2024 से चल रहा है यह मामला
यह मामला वर्ष 2024 से चल रहा है. नवंबर 2024 में विष्णु गुप्ता की याचिका स्वीकार होने के बाद जनवरी 2026 में महाराणा प्रताप सेना की याचिका भी अदालत ने स्वीकार कर ली थी. दोनों याचिकाओं को एक साथ सुनवाई के लिए रखा गया है. याचिकाकर्ता रिटायर्ड जज हरबिलास सारदा की 1911 की किताब ‘Ajmer: Historical and Descriptive’ समेत अन्य ऐतिहासिक दस्तावेजों का हवाला दे रहे हैं. धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है. एक ओर हिंदू संगठन प्राचीन मंदिर की बहाली और पूजा-अर्चना की अनुमति की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दरगाह कमेटी इसे धार्मिक स्थल की अखंडता से जोड़कर देख रही है.
कोर्ट पर आज सबकी टिकी रहेंगी निगाहें
आज की सुनवाई में क्या दलीलें रखी जाती हैं और कोर्ट क्या निर्देश जारी करता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं. यदि कोर्ट एएसआई सर्वे का आदेश देता है तो मामले की दिशा और स्पष्ट हो सकती है. इस मुद्दे पर तनाव बढ़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड पर है. सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रखी गई है. दोनों पक्ष शांतिपूर्ण तरीके से कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करें, यही अपेक्षा की जा रही है.
About the Authordeep ranjan
दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
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Location :
Ajmer,Rajasthan
First Published :
April 18, 2026, 10:26 IST



