ना कोचिंग… ना बड़े संसाधन! यूट्यूब के दम पर रेखाराम बने स्कूल व्याख्याता, 20वीं रैंक लाकर सबको चौंकाया

Last Updated:April 20, 2026, 07:07 IST
Rekha Ram Success Story: बाड़मेर के चौहटन क्षेत्र के रेखाराम ने महज 22 साल की उम्र में स्कूल व्याख्याता भर्ती परीक्षा में हिंदी विषय में 20वीं रैंक हासिल कर मिसाल पेश की है. सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने बिना कोचिंग केवल यूट्यूब और नोट्स के सहारे तैयारी की. कापराउ गांव के रहने वाले रेखाराम ने लगातार मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर यह सफलता पाई. उनके पिता मजदूरी कर परिवार चलाते हैं. रेखाराम की यह उपलब्धि ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है और साबित करती है कि मेहनत से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.
ख़बरें फटाफट
बाड़मेर. जहां लाखों युवा प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए वर्षों तक कोचिंग और महंगे संसाधनों के पीछे दौड़ते हैं, वहीं बाड़मेर जिले के चौहटन क्षेत्र के रेखाराम ने महज 22 साल की उम्र में बड़ी उपलब्धि हासिल कर सबको चौंका दिया है. सीमित संसाधनों और साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि के बावजूद उन्होंने बिना किसी बड़ी कोचिंग के सिर्फ यूट्यूब के सहारे तैयारी की और स्कूल व्याख्याता भर्ती परीक्षा में हिंदी विषय में 20वीं रैंक प्राप्त की.
कापराउ गांव के रहने वाले रेखाराम की यह सफलता उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो संसाधनों की कमी को अपनी कमजोरी मानते हैं. उन्होंने साबित कर दिया कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत में निरंतरता हो, तो सफलता जरूर मिलती है. कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने आत्मविश्वास और लगन बनाए रखी. उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बन गई है.
रेखाराम का सफर नहीं था आसान
रेखाराम का सफर आसान नहीं था. आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होने के कारण वे महंगी कोचिंग या बड़े शहरों में जाकर तैयारी नहीं कर सके, लेकिन उन्होंने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. उन्होंने अपने पास उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग किया और मोबाइल फोन व इंटरनेट के जरिए पढ़ाई शुरू कर दी. रेखाराम की प्रारंभिक शिक्षा चौहटन से हुई और फिर मोतीलाल नेहरू कॉलेज से ग्रेजुएशन किया.
बाड़मेर के महेश कॉलेज से की बीएड
बाड़मेर के महेश कॉलेज से रेखाराम ने बीएड की और फिर वर्धमान महावीर ओपन यूनिवर्सिटी कोटा से एमए करने के बाद स्कूल व्याख्याता की तैयारी शुरू कर दी. रेखाराम ने अपने भाई के नोट्स देखकर और यूट्यूब से अपनी पढ़ाई की है. मजदूरी कर पिता ने दोनों भाइयों को पढ़ाया है. रेखाराम बताते है कि पहले प्रयास में उन्होंने हिंदी विषय से 20वी रैंक हासिल की है.
पिता ने मजदूरी कर बेटे को बनाया व्याख्याता
रेखाराम बताते है कि सफ़लता का कोई शॉर्टकट नहीं होता है. उन्होंने घर पर रहकर ही तैयारी की और लगातार 12 घंटे नियमित अध्ययन से यह मुकाम हासिल किया है. रेखाराम की उम्र महज 22 साल है और उन्होंने कम उम्र में ही सफलता के झंडे गाड़ दिए है. रेखाराम के मुताबिक, उनकी माता निरक्षर हैं जबकि पिता दसवीं पास हैं. इसके बावजूद उनके परिवार ने उन्हें पढ़ाया और इस काबिल बनाया है. वे बताते हैं कि पहले पिता मजदूरी कर उन्हें पढ़ाया है. वे बताते है कि वे अपने परिवार में पहले सरकारी कर्मचारी है.
About the Authordeep ranjan
दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
न्यूजलेटर
अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज
खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में
सबमिट करें
Location :
Barmer,Rajasthan
First Published :
April 20, 2026, 07:07 IST



