बिना बिजली, बिना बिल… बाड़मेर के युवा ने हवा से जलाई रोशनी, 50 हजार से शुरू हुआ करोड़ों का खेल

Last Updated:April 21, 2026, 20:02 IST
Barmer Wind Turbine News: बाड़मेर के डूंगर सिंह सोढ़ा ने पोर्टेबल विंड टरबाइन तैयार किया. 1 किलोवॉट मॉडल रोज 10 से 12 यूनिट बिजली देता है. सुनविंड इनोवेटिव का टर्नओवर 100 करोड़ पार हो गया है. यह लगभग 50 देशों में बिक्री भी करता है. इसके साथ ही आम लोगों को ध्यान में रखते हुए 50 हजार रुपये का किफायती मॉडल भी तैयार किया गया है. इससे गरीब और मध्यम वर्ग के लोग भी इस तकनीक का उपयोग कर सकते हैं
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बाड़मेर. पश्चिमी सरहद पर बसे बाड़मेर में बिजली की समस्या लंबे समय से बनी हुई है. इसी परेशानी को करीब से देखते हुए एक युवा ने ऐसा समाधान तैयार किया, जो सस्ता भी है और उपयोग में आसान भी. गांवों में बिजली की कमी को समझने वाले डूंगर सिंह सोढ़ा ने हवा को ही ऊर्जा का स्रोत बना दिया. महज 50 हजार रुपये से शुरू हुआ उनका यह प्रयास आज बड़े कारोबार में बदल चुका है और बिना तार व बिल के गांव-गांव तक रोशनी पहुंचा रहा है.
सीमावर्ती गिराब क्षेत्र के सांखली गांव निवासी डूंगर सिंह ने एक पोर्टेबल विंड टरबाइन तैयार किया है, जो हवा से बिजली बनाने में सक्षम है. इसकी खास बात यह है कि इसमें जटिल वायरिंग या बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत नहीं होती. सामान्य हवा की गति में भी यह आसानी से घूमता है और बिजली पैदा करता है. इससे दूर-दराज के गांवों में भी बिजली की सुविधा पहुंच रही है.
कम लागत में बेहतर उत्पादनडूंगर सिंह के अनुसार उनका 1 किलोवॉट का टरबाइन करीब 1.50 लाख रुपये में उपलब्ध है, जो रोजाना लगभग 10 से 12 यूनिट बिजली पैदा कर सकता है. इसके साथ ही आम लोगों को ध्यान में रखते हुए 50 हजार रुपये का किफायती मॉडल भी तैयार किया गया है. इससे गरीब और मध्यम वर्ग के लोग भी इस तकनीक का उपयोग कर सकते हैं और अपने घर की बिजली जरूरत पूरी कर सकते हैं.
देश से विदेश तक पहुंची तकनीकडूंगर सिंह बताते हैं कि उनके विंड टरबाइन में लगा जनरेटर हवा की गति के अनुसार घूमता है और उसी से बिजली उत्पन्न होती है. उनकी यह तकनीक अब 50 से अधिक देशों तक पहुंच चुकी है. कंपनी का सालाना टर्नओवर 100 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है. इस पहल के जरिए करीब एक लाख युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार भी मिल रहा है.
छोटा आकार, बड़ा कामउनकी कंपनी सुनविंड इनोवेटिव ने पोर्टेबल विंड टरबाइन के क्षेत्र में एक नया विकल्प दिया है. इसका आकार लगभग एक टेबल फैन जितना छोटा है, लेकिन यह रोजाना 10 से 12 यूनिट बिजली बनाने में सक्षम है. डूंगर सिंह का कहना है कि उन्होंने दुनिया की सबसे छोटी और किफायती पोर्टेबल टरबाइन तैयार की है. इस आविष्कार का पेटेंट भी कराया गया है, जिसके बाद उन्हें देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है.
About the AuthorAnand Pandey
नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें
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Location :
Barmer,Barmer,Rajasthan
First Published :
April 21, 2026, 20:02 IST



