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नागौर में सौंफ की फसल पर झुलसा रोग का हमला, उत्पादन में 50 फीसदी की बड़ी गिरावट

Last Updated:April 23, 2026, 13:01 IST

Nagaur Fennel Crop Damage Blight Disease: नागौर जिले में इस बार सौंफ की बुवाई का रकबा बढ़कर 14,375 हेक्टेयर पहुँच गया लेकिन झुलसा रोग के कारण उत्पादन में 50% की गिरावट आई है. बेमौसम बारिश और कोहरे के कारण जमीन में नमी बढ़ने से ‘रेमुलेरिया’ फफूंद सक्रिय हो गई जिससे फसल काली पड़कर सूख गई. किसानों का कहना है कि प्रति बीघा उत्पादन 4 क्विंटल से घटकर मात्र डेढ़ क्विंटल रह गया है जिससे लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है. मंडी में सही दाम न मिलने और कम पैदावार के कारण नागौर के सौंफ उत्पादक किसान गहरे आर्थिक संकट में हैं.

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Nagaur Fennel Crop Damage Blight Disease: राजस्थान के नागौर जिले, विशेषकर मेड़ता क्षेत्र के किसानों के लिए इस बार रबी सीजन की सौंफ की खेती घाटे का सौदा साबित हो रही है. बेहतर मुनाफे की उम्मीद में किसानों ने इस बार पिछले साल की तुलना में करीब डेढ़ गुना ज्यादा क्षेत्र में सौंफ की बुवाई की थी. कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार जहाँ गत वर्ष जिले में 9,041 हेक्टेयर में सौंफ बोई गई थी वहीं इस बार यह रकबा बढ़कर 14,375 हेक्टेयर तक पहुँच गया. लेकिन फसल पकने के समय हुए झुलसा रोग के प्रकोप ने किसानों की सारी मेहनत पर पानी फेर दिया है. रोग के कारण उत्पादन में 50 फीसदी तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है.

किसानों के अनुसार फसल खराब होने का मुख्य कारण मौसम में आया बदलाव है. पकने की अवस्था के दौरान हुई बेमौसम बारिश और उसके बाद छाए घने कोहरे ने जमीन में नमी की मात्रा को अत्यधिक बढ़ा दिया. नमी बढ़ने के कारण सौंफ की फसल में ‘रेमुलेरिया’ नामक फफूंद सक्रिय हो गई जिससे झुलसा रोग फैल गया. इस रोग की वजह से सौंफ का दाना काला पड़कर अधपका ही सूखने लगा है. इससे न केवल उत्पादन कम हुआ है बल्कि सौंफ की गुणवत्ता भी बुरी तरह प्रभावित हुई है जिसके कारण मंडी में किसानों को सही दाम नहीं मिल पा रहे हैं.

लागत निकालना भी हुआ चुनौतीपूर्णकिसानों की आर्थिक स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले साल जहाँ प्रति बीघा 4 क्विंटल तक उत्पादन हो रहा था वहीं इस बार यह सिमटकर डेढ़ से दो क्विंटल रह गया है. किसान किशनाराम ने बताया कि उन्होंने 8 बीघा में सौंफ बोई थी लेकिन मात्र 8 क्विंटल ही पैदावार हुई. मंडी में सौंफ 8 हजार रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बिकी जिससे कुल 64 हजार रुपये मिले. किसान का कहना है कि बुवाई से लेकर फसल की कटाई तक का खर्च ही इससे कहीं ज्यादा हो चुका है. ऐसे में मुनाफा तो दूर की बात है अब किसानों के सामने अपनी लागत वसूलने का भी संकट खड़ा हो गया है.

सावधानी और वैज्ञानिक सलाह की जरूरतकृषि विशेषज्ञों का मानना है कि झुलसा रोग जैसी समस्याओं से बचने के लिए किसानों को फसल की निरंतर निगरानी करनी चाहिए. रोगों के शुरुआती लक्षण दिखते ही फफूंदनाशक दवाओं का उचित मात्रा में छिड़काव कर इसे नियंत्रित किया जा सकता था. हालांकि मौसम की मार के आगे किसान बेबस नजर आ रहे हैं. वर्तमान में मंडी में सौंफ के भाव 6,000 से 13,000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच चल रहे हैं जो पिछले सालों की तुलना में काफी अस्थिर हैं. किसानों ने प्रशासन से मुआवजे और भविष्य के लिए बेहतर मार्गदर्शन की मांग की है ताकि उन्हें इस आर्थिक भार से राहत मिल सके.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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Location :

Nagaur,Nagaur,Rajasthan

First Published :

April 23, 2026, 13:01 IST

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