Rajasthan

Mandar Shiva Temple | Rajasthan

Last Updated:July 02, 2026, 20:08 IST

Sirohi famous temple : सिरोही के मंदार में 84 फीट ऊंचा स्वयंभू शिवलिंग है. भक्तों ने श्रमदान कर गमानिया कुंड को साफ किया. मंदिर में पाप-पुण्य गली और गंगा कुंड भी हैं. स्थानीय भक्त सोमाराम ने बताया कि यह मंदिर बेहद प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहर है. मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार जब लंकापति रावण मंदा शिखर को लंका ले जा रहे थे, तब रास्ते में भगवान विष्णु ने ग्वाले का रूप धारण कर रावण के हाथों से शिवलिंग नीचे रखवा दिया.

सिरोही. जिले की गुजरात सीमा से सटे मंदार कस्बे की एक पहाड़ी पर लीलाधारी महादेव विराजमान हैं. इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां कोई मानवनिर्मित शिवलिंग नहीं है, बल्कि पहाड़ी में ही स्वयंभू 84 फीट ऊंचे शिवलिंग की पूजा की जाती है. इसके अलावा मंदिर परिसर में गंगा कुंड, गमानिया कुंड और पाप-पुण्य गली प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं.

गमानिया कुंड पिछले कुछ वर्षों से झाड़ियों से ढक जाने के कारण जल संरक्षण के लिए उपयोगी नहीं रह गया था. इस पर स्थानीय भक्तों ने श्रमदान कर पहाड़ी पर बने इस कुंड की साफ-सफाई की और इसे दोबारा जल संरक्षण के योग्य बनाया. जहाज की आकृति वाला यह कुंड काफी पवित्र माना जाता है. भक्तों की मान्यता है कि इस कुंड के पानी से कई तरह की परेशानियां दूर होती हैं. वहीं मंदिर परिसर में स्थित गंगा कुंड का पानी कभी समाप्त नहीं होता. पूरे वर्ष इस कुंड में पानी भरा रहता है. मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को 286 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं.

जहां रावण ने रखा शिवलिंग, वहीं स्वयंभू रूप में विराजमान हुए महादेव

स्थानीय भक्त सोमाराम ने बताया कि यह मंदिर बेहद प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहर है. मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार जब लंकापति रावण मंदा शिखर को लंका ले जा रहे थे, तब रास्ते में भगवान विष्णु ने ग्वाले का रूप धारण कर रावण के हाथों से शिवलिंग नीचे रखवा दिया. इसके बाद भगवान शिव स्वयंभू शिवलिंग के रूप में यहीं विराजमान हो गए. इसी मंदा शिखर के कारण समय के साथ इस कस्बे का नाम अपभ्रंश होकर मंदार से मंडार हो गया.

पाप-पुण्य गली को लेकर है अनोखी मान्यता

मंदिर परिसर में दो चट्टानों के बीच एक संकरी गली बनी हुई है, जिसे पाप-पुण्य गली के नाम से जाना जाता है. इस गली को लेकर मान्यता है कि पाप करने वाला व्यक्ति इस गली से निकल नहीं पाता और बीच में ही फंस जाता है. वहीं पुण्य करने वाला या जिसके मन में कोई पाप न हो, वह आसानी से इस गली को पार कर मंदिर के दूसरे हिस्से में पहुंच जाता है. मंदिर में निसंतान दंपत्ति संतान प्राप्ति की मनोकामना लेकर आते हैं और इच्छा पूरी होने पर यहां घंटी चढ़ाते हैं. मंदिर के गर्भगृह में स्वयंभू शिवलिंग के साथ मां पार्वती, भगवान गणेश और मां गंगा की प्रतिमाएं भी विराजमान हैं. इस मंदिर में राजस्थान के अलावा गुजरात और महाराष्ट्र से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

About the AuthorAnand Pandey

आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें

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Location :

Sirohi,Sirohi,Rajasthan

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