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Canal Construction Project |नागौर आलनियावास नहर निर्माण

Last Updated:April 23, 2026, 08:07 IST

Nagaur Ajmer Canal Construction Project: नागौर और अजमेर जिलों के आलनियावास-गोविंदगढ़ क्षेत्र में 283 लाख रुपये की लागत से 8 किलोमीटर लंबी नहर का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है. यह योजना वर्ष 1995 से अधूरी पड़ी थी जिससे करीब एक हजार किसान प्रभावित थे. नहर के पुनरुद्धार से अब 780 हेक्टेयर भूमि को मीठा पानी मिलेगा जिससे फसलों के उत्पादन में दोगुना इजाफा होने की उम्मीद है. सिंचाई विभाग पुराने नक्शों के आधार पर मानसून से पहले इस कार्य को पूरा करने के प्रयास में जुटा है.

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नागौर में 283 लाख की लागत से नहर का काम शुरूZoomनागौर आलनियावास नहर निर्माण

Nagaur Ajmer Canal Construction Project: राजस्थान के नागौर और अजमेर जिलों के सीमावर्ती क्षेत्रों के किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है. नागौर जिले के आलनियावास और अजमेर के गोविंदगढ़ क्षेत्र में पिछले 27 वर्षों से अधूरी पड़ी सिंचाई योजना को पुनर्जीवित करने का कार्य शुरू हो गया है. लगभग 283 लाख रुपये की लागत से 8 किलोमीटर लंबी नहर का पुनर्निर्माण किया जा रहा है. इस परियोजना के पूरा होने से क्षेत्र के लगभग एक हजार किसानों को सीधा लाभ मिलेगा. विशेष रूप से उन किसानों के लिए यह योजना वरदान साबित होगी जो अब तक पूरी तरह से केवल वर्षा जल पर निर्भर थे.

इतिहास पर नजर डालें तो साबरमती नदी पर गोविंदगढ़ में वर्ष 1995 में 155 एमसीएफटी क्षमता वाला एक बांध बनाया गया था. इस बांध का मुख्य उद्देश्य आसपास के गाँवों में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना था. हालांकि प्रशासनिक खामियों और कम वर्षा के चलते यह योजना कभी सफल नहीं हो सकी. स्थिति इतनी खराब रही कि वर्ष 2019 और 2021 में अच्छी बारिश होने के बावजूद नहर का पानी आलनियावास क्षेत्र के अंतिम छोर तक नहीं पहुँच पाया. लंबे समय तक पानी न आने के कारण कई स्थानों पर किसानों ने नहर को समतल कर उसे अपने खेतों का हिस्सा बना लिया था.

पुनर्निर्माण में तकनीकी चुनौतियांकरीब तीन दशकों से बंद पड़ी इस नहर का अस्तित्व लगभग समाप्त हो चुका था जिससे विभाग के सामने कई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं. नहर के मूल स्वरूप को पहचानना अब एक कठिन कार्य बन गया है. विभाग के सुपरवाइजर रामलाल गुर्जर पुराने सरकारी नक्शों और राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर नहर का मार्ग तय कर रहे हैं. सिंचाई विभाग का लक्ष्य है कि आगामी मानसून की बारिश शुरू होने से पहले निर्माण कार्य को हर हाल में पूरा कर लिया जाए ताकि किसानों को इसी सीजन से पानी मिलना शुरू हो सके.

आर्थिक उन्नति और फसल उत्पादन में वृद्धिइस परियोजना के सफल क्रियान्वयन से लगभग 780 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई की सुविधा मिलेगी. किसानों को नहर के माध्यम से मीठा पानी मिलने से रबी और खरीफ दोनों फसलों के उत्पादन में भारी वृद्धि होने का अनुमान है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित सिंचाई सुविधा मिलने से पैदावार दो गुनी तक बढ़ सकती है. सिंचाई की इस समस्या के समाधान से न केवल स्थानीय किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा बल्कि क्षेत्र में हरियाली और कृषि विकास को भी नई गति मिलेगी.

. नागौर-अजमेर क्षेत्र में शुरू हुई इस नहर परियोजना की मुख्य विशेषताएं क्या हैं?: इस परियोजना के तहत नागौर के आलनियावास और अजमेर के गोविंदगढ़ क्षेत्र के बीच करीब 8 किलोमीटर लंबी नहर का निर्माण किया जा रहा है. इस पर लगभग 283 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं. यह नहर वर्षों से अधूरी पड़ी योजना को पुनर्जीवित करेगी और क्षेत्र के लगभग 1000 किसानों को सिंचाई का स्थायी साधन उपलब्ध कराएगी.

यह सिंचाई योजना पिछले 27 वर्षों से अधूरी क्यों पड़ी थी?: यह योजना वर्ष 1995 में साबरमती नदी पर बने बांध के साथ शुरू हुई थी लेकिन प्रशासनिक खामियों और कम वर्षा के कारण इसे पूरा नहीं किया जा सका. कई बार अच्छी बारिश होने के बावजूद नहर का पानी अंतिम छोर तक नहीं पहुंच पाया. लंबे समय तक उपेक्षा के कारण नहर का स्वरूप भी लगभग समाप्त हो गया था.

. इस परियोजना से किसानों और कृषि क्षेत्र को क्या लाभ होगा?: इस नहर के बनने से लगभग 780 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई का पानी मिलेगा. इससे किसानों को वर्षा पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और रबी तथा खरीफ दोनों फसलों का उत्पादन बढ़ेगा. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नियमित पानी मिलने से पैदावार दोगुनी तक हो सकती है जिससे किसानों की आय में बड़ा सुधार आएगा.

. नहर के पुनर्निर्माण में किन तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है?: लगभग 27 वर्षों से बंद पड़ी नहर का मूल मार्ग पहचानना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है. कई जगह किसानों ने नहर को समतल कर खेत बना लिया था. अब विभाग पुराने नक्शों और राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर नहर का रास्ता तय कर रहा है ताकि सही दिशा में निर्माण कार्य पूरा किया जा सके.

. इस परियोजना को कब तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है?: सिंचाई विभाग का लक्ष्य है कि इस नहर का निर्माण कार्य आगामी मानसून से पहले हर हाल में पूरा कर लिया जाए. ताकि इस बार की बारिश के साथ ही नहर में पानी छोड़ा जा सके और किसानों को तुरंत लाभ मिलना शुरू हो जाए. इससे वर्षों का इंतजार खत्म होगा और क्षेत्र में खेती को नई दिशा मिलेगी.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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Location :

Nagaur,Nagaur,Rajasthan

First Published :

April 23, 2026, 08:05 IST

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