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अरविंद केजरीवाल क्यों नहीं रोक पाए बगावत, मनाने को क्या-क्या पापड़ बेले, राघव चड्ढा से बड़ा झटका किसने दिया?

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी में बगावत हो चुकी है. राघव चड्ढा समेत कई राज्यसभा सांसद भाजपा में जा चुके हैं. अब सवाल है कि क्या अरविंद केजरीवाल को इसकी भनक नहीं थी? क्या अरविंद केजरीवाल ने स्थिति को संभालने की कोशिश की? क्या उन्होंने अपने सांसदों को रोकने की कोशिश की? राघव चड्डा से अधिक झटका अरविंद केजरीवाल को किसने दिया? इन सवालों के अब जवाब भी मिलने लगे हैं. जी हां, अरविंद केजरीवाल को जब पता चला कि उनकी पार्टी के कई राज्यसभा सांसद भाजपा में शामिल होने के लिए आम आदमी पार्टी छोड़ सकते हैं तो उन्होंने तुरंत कदम उठाए. फोन कॉले से लेकर मीटिंग तक की. अरविंद केजरीवाल ने अंत-अंत तक स्थिति को संभालने की आखिरी कोशिशें कीं. उन्होंने ज्यादातर सांसदों से संपर्क साधा, लेकिन यह कोशिश बहुत कम और बहुत देर से की गई साबित हुई.

टीओआई की खबर के मुताबिक, राघव चड्ढा प्रकरण की जानकारी रखने वालों ने इसकी इनसाइड स्टोरी बताई है. उन्होंने बताया कि संदीप पाठक का भी राघव चड्ढा वाले गुट में शामिल होना अरविंद केजरीवाल के लिए सबसे बड़ा झटका था, क्योंकि अरविंद केजरीवाल संदीप को वफादार मानते थे. अरविंद केजरीवाल को यकीन था कि चाहे कुछ भी हो जाए, मगर संदीप पाठक पाला नहीं बदलेंगे. मगर उनकी उम्मीदों को बड़ा झटका तब लगा, जब वह भी राघव चड्ढा के साथ भाजपा में शामिल हो गए.

आम आदमी पार्टी ने क्या उठाया कदम

बहरहाल, आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि उन्होंने राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन को एक अर्जी दी है. इसमें उन सात आम आदमी पार्टी के सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग की गई है जो भाजपा में शामिल हो गए हैं. उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो पार्टी कानूनी कार्रवाई भी करेगी. दावा किया कि यह कदम दलबदल विरोधी कानून का उल्लंघन है. संजय सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों ने यह साफ कर दिया है कि इस तरह के दलबदल से अयोग्यता कैसे हो सकती है.

कब से एक्टिव हो गए थे अरविंद केजरीवाल

इस बीच दलबदल से पहले की घटनाओं का क्रम दिखाता है कि अरविंद केजरीवाल ने 22 अप्रैल से ही आप सांसदों से संपर्क साधना शुरू कर दिया था. सूत्रों के मुताबिक, अरविंद केजरीवाल ने कम से कम विक्रमजीत सिंह साहनी, अशोक मित्तल और संदीप पाठक को फोन किया. इतना ही नहीं, उनके साथ बैठकें भी हुईं. हरभजन सिंह मुंबई में थे, लेकिन पता चला है कि अरविंद केजरीवाल ने उनसे भी बात की थी.

फोन पर बात और मुलाकात की कहानी

जब 22 अप्रैल को विक्रमजीत साहनी केजरीवाल से मिले तो आम आदमी पार्टी के मुखिया ने उनसे पूछा कि क्या उन पर कोई दबाव है और क्या उन्हें भाजपा में शामिल होने के लिए कोई फोन आया है? सूत्रों ने बताया कि अरविंद केजरीवाल ने संदीप पाठक से भी डेढ़ घंटे तक मुलाकात की और बैठक से बाहर निकलते समय उन्हें पूरा भरोसा था कि पाठक पाला नहीं बदलेंगे.

और राघव चड्ढा ने कर दी प्रेस कॉन्फ्रेंस

अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को फिर विक्रमजीत साहनी से बात की और सांसद से शाम को उनसे मिलने को कहा. हालांकि, दोपहर में राघव चड्ढा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी और अरविंद केजरीवाल को बड़ा झटका दे दिया. जी हां, राघव चड्ढा ने आप के सांसदों के भाजपा में शामिल होने की घोषणा कर दी. इस बात से कि अरविंद केजरीवाल की कोशिशें कामयाब नहीं हुईं, यह संकेत मिलता है कि आम आदमी पार्टी के भीतर यह संकट काफी समय से पनप रहा था.

बहुत पहले से लिखी जा रही थी कहानी

सूत्रों की मानें तो केवल राघव चड्ढा ही नहीं, बल्कि संदीप पाठक भी काफी समय से अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी से नाराज चल रहे थे. दोनों ने पंजाब में पार्टी की जीत में अहम भूमिका निभाई थी. हालांकि, दिल्ली चुनावों में पार्टी की हार के बाद संदीप पाठक को धीरे-धीरे हाशिए पर धकेला जाने लगा. बहरहाल, अब देखने वाली बात होगी कि आम आदमी पार्टी ने जो इन सांसदों के खिलाफ कदम उठाया, उसका क्या अंजाम होता है.

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