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Summer Food | पारंपरिक छाछ-रोटी | Traditional Chhach Roti Dish | top food summer diet for health | Chhach Roti Benefits

Last Updated:April 27, 2026, 09:11 IST

Best Foods to Eat in Summer Chhach Roti: जालौर के ग्रामीण इलाकों में भीषण गर्मी से निपटने के लिए पारंपरिक डिश ‘छाछ-रोटी’ का जमकर उपयोग किया जा रहा है. ठंडी छाछ में सूखी रोटी, प्याज और मसालों को मिलाकर तैयार होने वाली यह डिश शरीर को अंदर से ठंडा रखती है और लू से बचाती है. स्थानीय लोगों के अनुसार यह भोजन सस्ता, सुपाच्य और ऊर्जा से भरपूर है, जो किसान और मजदूरों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है. आधुनिक खानपान के दौर में भी राजस्थान के गांवों में इस पारंपरिक और सेहतमंद खानपान का चलन आज भी पूरी मजबूती के साथ कायम है.

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Best Foods to Eat in Summer Chhach Roti: राजस्थान के जालौर जिले में भीषण गर्मी का असर अब साफ नजर आने लगा है. बढ़ते तापमान के साथ ही लोगों की दिनचर्या और खानपान में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. जहाँ शहरों में लोग फ्रिज के ठंडे पानी और बनावटी पेय पदार्थों (Cold Drinks) का सहारा ले रहे हैं, वहीं ग्रामीण इलाकों में आज भी पारंपरिक और प्राकृतिक खानपान का चलन बरकरार है. इन्हीं पारंपरिक व्यंजनों में सबसे खास है ‘छाछ-रोटी’, जो चिलचिलाती गर्मी में न केवल राहत देती है, बल्कि शरीर को लू से बचाने में भी कारगर साबित होती है.

ग्रामीण इलाकों में इस डिश को तैयार करने का तरीका बेहद सादा और पारंपरिक है. अक्सर घर में बची हुई सूखी रोटियों को छोटे टुकड़ों में तोड़कर उसमें ताजी और ठंडी छाछ मिलाई जाती है. स्वाद को और अधिक बढ़ाने के लिए इसमें बारीक कटा हुआ कच्चा प्याज, नमक, भुना हुआ जीरा पाउडर और हरी मिर्च का उपयोग किया जाता है. यह साधारण सा दिखने वाला भोजन स्वाद में इतना लाजवाब होता है कि इसके आगे बड़े-बड़े पकवान फीके पड़ जाते हैं. यह डिश न केवल पेट भरती है, बल्कि पाचन तंत्र को भी दुरुस्त रखती है.

सेहत और ऊर्जा का खजानागर्मियों के मौसम में जब भारी या तला-भुना खाना खाने की इच्छा नहीं होती, तब छाछ-रोटी एक बेहतरीन विकल्प बनकर सामने आती है. स्थानीय निवासी अनीता बताती हैं कि उनके घरों में यह व्यंजन पीढ़ियों से बन रहा है. छाछ शरीर की आंतरिक गर्मी को सोख लेती है और पानी की कमी को पूरा करती है, वहीं रोटी शरीर को दिनभर काम करने के लिए जरूरी ऊर्जा प्रदान करती है. यही कारण है कि कड़ी धूप में काम करने वाले किसान और मजदूर दोपहर के भोजन में इसे सबसे ज्यादा पसंद करते हैं, क्योंकि यह उन्हें लंबे समय तक तरोताजा रखता है.

परंपरा और आधुनिकता का संगमआज के आधुनिक युग में जहाँ फास्ट फूड का बोलबाला बढ़ रहा है, जालौर के ग्रामीण क्षेत्रों में ‘छाछ-रोटी’ के साथ-साथ बाजरे की राबड़ी, खीच-छाछ और माठा-चावल जैसी पारंपरिक डिशेज ने अपनी अहमियत खोई नहीं है. ये व्यंजन न केवल कम खर्चीले हैं, बल्कि शरीर को प्राकृतिक पोषण भी देते हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि सादा और संतुलित खानपान ही भीषण गर्मी से लड़ने का सबसे प्रभावी तरीका है. यही वजह है कि आज भी ग्रामीण रसोई में इन पारंपरिक व्यंजनों की खुशबू महक रही है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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Jalor,Jalor,Rajasthan

First Published :

April 27, 2026, 09:11 IST

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