हवा में जहाज की कौन सी स्पीड कही जाती है बैलगाड़ी की चाल, किस जेट की रफ्तार है सबसे तेज

क्या आपको मालूम है कि हवा में जब प्लेन उड़ता है कि तो उसकी स्पीड क्या होती है. जिस जहाज पर बैठकर आप यात्रा करते हैं, जिसे कमर्शियल प्लेन कहा जाता है, वो किस स्पीड से उड़ता है. उसकी कम से कम स्पीड क्या होती है और क्या अधिकतम स्पीड होती है. हालांकि आपको बता दें कि जिस न्यूनतम स्पीड में वो हवा में चलता है, उसको फील करके आप भी कह सकते हैं कि ये प्लेन तो बैलगाड़ी की गति से उड़ रहा है. जहाज भी कई तरह के होते हैं, एक जहाज ऐसा भी है, जिसकी हाईस्पीड से हर किसी के होश उड़ जाते हैं.
कमर्शियल हवाई जहाजों जैसे बोइंग 737 या एयरबस A320 की गति को आमतौर पर ‘क्रूजिंग स्पीड’ के रूप में मापा जाता है, जो जमीन के हिसाब से करीब 880 से 930 किमी प्रति घंटा यानि 475-500 नॉट्स के बीच होती है. इनकी गति की सीमाओं को समझना तकनीकी रूप से काफी दिलचस्प है.
किस स्पीड में उड़ते हैं कमर्शियल प्लेन
अधिकांश आधुनिक कमर्शियल विमानों की अधिकतम उड़ने की गति 950 से 1,000 किमी/घंटा के आसपास होती है. ये विमान ध्वनि की गति (Mach 1) के करीब तो पहुंचते हैं, लेकिन उसे पार नहीं करते. आमतौर पर ये मैक 0.80 से 0.85 की रफ्तार यानि पर उड़ते हैं.
अधिकांश आधुनिक कमर्शियल विमानों की अधिकतम उड़ने की गति 950 से 1,000 किमी/घंटा के आसपास होती है. ( ai image)
मैक नंबर को किलोमीटर प्रति घंटा में बदलना इस बात पर तय करता है कि विमान कितनी ऊंचाई पर उड़ रहा है. सामान्य तौर पर कमर्शियल विमान 35,000 फीट (करीब 10.6 किमी) की ऊंचाई पर उड़ते हैं. वहां के तापमान (करीब -54°C) और इस ऊंचाई पर वो आमतौर पर ध्वनि की गति यानि करीब 1,062 किमी प्रति घंटा की स्पीड से उड़ने लगते हैं. वैसे मैक 0.80 का मतलब स्पीड 850 किमी प्रति घंटा और मैक 0.85 का मतलब करीब 903 किमी प्रति घंटा. बोइंग और एयरबस जैसे विमान अपनी यात्रा के दौरान आमतौर पर 850 से 900 किमी/घंटा की रफ्तार के बीच स्थिर रहते हैं.
यदि विमान अपनी निर्धारित अधिकतम गति से तेज जाता है, तो उसके पंखों पर हवा का दबाव और कंपन इतना बढ़ सकता है कि विमान के ढांचे को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है.
कब स्पीड बैलगाड़ी वाली
अब आइए आपको बताते हैं कि कब हवा में विमान की स्पीड बैलगाड़ी वाली लगने लगती है. इसे विमान की न्यूनतम स्पीड भी कहते हैं. ये आमतौर पर हवा में 250 से 300 किमी प्रति घंटा हो सकती है. हालांकि कोई भी विमान हवा में ये स्पीड शायद ही रखता हो. लैंडिंग के समय जरूर उसकी स्पीड को कम करते हुए 240 से 260 किमी तक लाया जाता है.
अब सवाल ये है कि अगर जहाज इस न्यूनतम स्पीड से भी हवा में नीचे चला जाता है तो क्या होता है. ऐसे में पंख हवा में जरूरी ‘लिफ्ट’ पैदा करना बंद कर देते हैं और विमान गिरने लगता है. वैसे एक औसत बोइंग या एयरबस के लिए 900 किमी प्रति घंटा एक आदर्श रफ्तार है, जबकि 250 किमी से नीचे जाना उसके लिए खतरनाक हो सकता है.
सबसे तेज कमर्शियल प्लेन
हालांकि यात्रियों को बिठाकर ले जाने वाले कॉकोर्ड प्लेन की स्पीड अगर सुनेंगे तो भी हैरान हो जाएंगे. ये अब रिटायर हो चुका है लेकिन ये 2,180 किमी प्रति घंटा की स्पीड से उड़ता था. लंदन से न्यूयॉर्क की दूरी यह मात्र 3.5 घंटे में तय कर लेता था. मौजूदा समय में बॉमबार्डियर ग्लोबल 8000 नाम का प्राइवेट जेट सबसे तेज सिविल विमान माना जाता है, जिसकी टॉप स्पीड लगभग 1,152 किमी घंटा है.
ये फाइटर जेट इतना तेज उड़ता है कि…
वैसे क्या मालूम है कि विमानों की दुनिया में सबसे तेज की बादशाहत किसके पास है. आमतौर पर दुनिया के सबसे तेज प्लेन फाइटर जेट होते हैं. लाकहीड कंपनी द्वारा बनाया गया एसआर-71 ब्लैकबर्ड दुनिया का सबसे तेज विमान है. 1976 में इसने एक रिकॉर्ड बनाया, जो आज भी कायम है. तब इसने टॉप स्पीड करीब 3,530 किमी प्रति घंटा की निकाली थी. इस फाइटर जेट की ये खासियत है कि ये इतनी तेजी से उड़ता था कि हवा के घर्षण से इसका ढांचा बहुत गर्म हो जाता था. इसे मुख्य रूप से जासूसी के लिए इस्तेमाल किया जाता था. वैसे ये जहाज आज भी मौजूद है और हवा में अपनी बादशाहत दिखाता रहता है.
वो प्लेन 7000 किमी की स्पीड से उड़ा
एक और फाइटर जेट है, अब तो नहीं लेकिन पहले ये छोड़ा जाता था और इसकी स्पीड को इतिहास में किसी भी प्लेन की सबसे टॉप स्पीड माना गया. इसका नार्थ अमेरिकन एक्स-15 था. यह तकनीकी रूप से एक ‘रॉकेट प्लेन’ था. इसे एक बड़े विमान (B-52) से हवा में छोड़ा जाता था. इसकी टॉप स्पीड 7,274 किमी प्रति घंटा की होती थी. इसने अंतरिक्ष की सीमा तक उड़ान भरी थी. इसके पायलटों को ‘एस्ट्रोनॉट’ का दर्जा दिया गया था.
भारत के फाइटर जेट्स की रफ्तार
फ्रांस में बने राफेल फाइटर जेट की अधिकतम गति करीब 2,222 किमी घंटा है यानि मैक1.8. राफेल ‘सुपरक्रूज’ करने में सक्षम है, यानी यह बिना आफ्टरबर्नर जलाए भी ध्वनि की गति से तेज उड़ सकता है, जिससे ईंधन की बचत होती है.
राफेल फाइटर जेट की अधिकतम गति करीब 2,222 किमी घंटा है. ( ai image)
सुखोई भारतीय वायुसेना का सबसे भारी और शक्तिशाली मुख्य लड़ाकू विमान है. इसकी अधिकतम गति करीब 2,400 – 2500 किमी घंटा के बीच है यानि मैक 1.9 से मैक 2.0 के बीच. ये राफेल और तेजस दोनों से अधिक तेज उड़ सकता है. इसके दो शक्तिशाली इंजन इसे भारी मात्रा में हथियार ले जाने और ऊंचाई पर तेज रफ्तार पकड़ने में मदद करते हैं.
भारत में बना स्वदेशी हल्का लड़ाकू विमान तेजस की अधिकतम गति करीब 2,205 किमी प्रति घंटा है. आकार में छोटा होने के बावजूद इसकी रफ्तार राफेल के बराबर है. यह बहुत ही कम जगह में तेजी से मुड़ने की क्षमता रखता है.



