Rajasthan

पत्थर फेंको, किस्मत आजमाओ… जालौर किले की रहस्यमयी परंपरा क्यों खींच रही भीड़

Last Updated:April 28, 2026, 20:24 IST

Jalore Malik Shah Fort Story: जालौर किले में मलिक शाह की जुती और खान के बूट नाम के पत्थरों पर पत्थर टिकाने की मान्यता से मुराद पूरी होने की आस्था, पर्यटकों और स्थानीयों में खास आकर्षण. लोक मान्यता के अनुसार, जो भी व्यक्ति इन पत्थरों पर निशाना लगाकर पत्थर फेंकता है और अगर वह पत्थर ऊपर टिक जाता है, तो उसकी मनोकामना पूरी हो जाती है. यही वजह है कि यहां हर उम्र के लोग, चाहे स्थानीय निवासी हों या बाहर से आए पर्यटक, बड़ी उत्सुकता के साथ इस परंपरा में हिस्सा लेते नजर आते हैं.

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जालौर. जालौर किले में इतिहास सिर्फ दीवारों में ही नहीं, बल्कि यहां की परंपराओं में भी जिंदा नजर आता है. इन्हीं परंपराओं में से एक है ‘मलिक शाह की जुती’ और ‘खान के बूट’ नाम के दो रहस्यमयी पत्थर, जो आज भी लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. किले में आने वाला हर पर्यटक इन पत्थरों को देखने जरूर पहुंचता है. खास बात यह है कि यहां सिर्फ देखने का नहीं, बल्कि अपनी किस्मत आजमाने का भी मौका मिलता है.

मान्यता और रोमांच का अनोखा संगमलोक मान्यता के अनुसार, जो भी व्यक्ति इन पत्थरों पर निशाना लगाकर पत्थर फेंकता है और अगर वह पत्थर ऊपर टिक जाता है, तो उसकी मनोकामना पूरी हो जाती है. यही वजह है कि यहां हर उम्र के लोग, चाहे स्थानीय निवासी हों या बाहर से आए पर्यटक, बड़ी उत्सुकता के साथ इस परंपरा में हिस्सा लेते नजर आते हैं. पत्थर फेंकते समय उनके चेहरे पर उम्मीद और उत्साह साफ दिखाई देता है, मानो एक छोटे से प्रयास में बड़ी उम्मीद छुपी हो.

इतिहास से ज्यादा लोक विश्वास का असरइतिहासकारों के अनुसार, इस परंपरा का कोई ठोस ऐतिहासिक या धार्मिक प्रमाण नहीं मिलता, लेकिन लोक विश्वास ने इसे आज भी जीवित रखा है. समय के साथ यह परंपरा किले की पहचान बन चुकी है, जो यहां आने वालों के लिए एक अलग अनुभव लेकर आती है. यही कारण है कि सोशल मीडिया पर भी यह परंपरा तेजी से चर्चा में है और लोग इसे देखने और आजमाने के लिए जालौर किले तक पहुंच रहे हैं.

स्थानीय लोग भी निभा रहे परंपरास्थानीय निवासी नूर मोहम्मद ने बताया कि वे बचपन से लोगों को यहां पत्थर फेंकते हुए देख रहे हैं. मान्यता है कि अगर पत्थर टिक जाए तो मुराद पूरी होती है. दूर-दूर से लोग यहां आते हैं और अपनी किस्मत आजमाते हैं. यह एक पुरानी परंपरा है, जो आज भी उसी तरह जारी है.

जालौर किले की यह अनोखी परंपरा इतिहास, आस्था और रोमांच का ऐसा संगम है, जो हर किसी को अपनी ओर खींच लेता है. यहां आने वाला लगभग हर शख्स एक बार पत्थर फेंककर अपनी किस्मत जरूर आजमाता है, क्योंकि कौन जानता है कि अगला निशाना उसी का सही बैठ जाए.

About the AuthorAnand Pandey

आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें

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Location :

Jalor,Jalor,Rajasthan

First Published :

April 28, 2026, 20:24 IST

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