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संगीत जगत का चमकता सितारा, जिसकी आवाज ने राज कपूर को बनाया स्टार, एसडी बर्मन के थे असिस्टेंट

Last Updated:May 01, 2026, 03:31 IST

मन्ना डे भारतीय संगीत जगत के एक कालजयी कलाकार थे, जिन्होंने शास्त्रीय संगीत को फिल्मी सिनेमाा के साथ बखूबी जोड़ा. कोलकाता में जन्मे मन्ना डे ने अपने चाचा केसी डे और एसडी बर्मन के असिस्टेंट के रूप में मुंबई में अपना सफर शुरू किया. हालांकि, उन्होंने कई फिल्मों में संगीत निर्देशन किया, लेकिन उन्हें असली पहचान एक प्लेबैक सिंगर के रूप में मिली. उन्होंने राज कपूर और बलराज साहनी जैसे दिग्गजों के लिए कई अमर गीत गाए. उन्होंने हिंदी के अलावा कई लोकल भाषाओं और हरिवंश राय बच्चन की ‘मधुशाला’ को भी स्वर दिया. पद्म भूषण और दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित इस महान गायक का निधन 2013 में हुआ.

नई दिल्ली: भारतीय सिनेमा के इतिहास में मन्ना डे एक ऐसा नाम है, जो अपनी सुरीली आवाज और शास्त्रीय गायन के लिए हमेशा याद किए जाएंगे. उनका जन्म 1 मई 1919 को कोलकाता में हुआ था. बचपन में उनका नाम प्रबोध चंद्र डे था, लेकिन दुनिया उन्हें ‘मन्ना डे’ के नाम से जानती है.

संगीत उन्हें विरासत में मिला था. उनके चाचा केसी डे उस जमाने के मशहूर संगीतकार थे. मन्ना डे पर अपने चाचा का गहरा असर था और उन्हीं से उन्होंने संगीत की शुरुआती बारीकियां सीखीं. वह अपने स्कूल और कॉलेज में संगीत के सबसे होनहार छात्र माने जाते थे.

मन्ना डे पढ़ाई में भी अच्छे थे, लेकिन उनका दिल हमेशा सुरों में ही बसता था. स्कूल की गायन प्रतियोगिताओं में वह लगातार तीन साल तक पहले नंबर पर आए. कॉलेज के दिनों में भी वह सांस्कृतिक इवेंट की जान हुआ करते थे. उनकी प्रतिभा बचपन से ही चमकने लगी थी.

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साल 1942 में मन्ना अपने चाचा के साथ मुंबई आ गए. करियर की शुरुआत में उन्होंने कड़ा स्ट्रगल किया. उन्होंने पहले अपने चाचा और फिर दिग्गज संगीतकार सचिन देव बर्मन के असिस्टेंट के रूप में काम किया. यहीं से उनके पेशेवर संगीत के सफर की मजबूत नींव पड़ी.

मन्ना डे ने शुरुआत में कई फिल्मों में बतौर संगीतकार काम किया. ‘महापूजा’ और ‘घर-घर की बात’ जैसी फिल्मों में उन्होंने धुनें तैयार कीं. लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. वह संगीत निर्देशन से कहीं ज्यादा अपनी गायकी के लिए मशहूर हो गए और प्लेबैक सिंगर में नाम कमाया.

मन्ना डे की सबसे बड़ी ताकत शास्त्रीय संगीत पर उनकी पकड़ थी. उन्होंने उस्ताद अमान अली खान जैसे दिग्गजों से तालीम ली थी. यही वजह थी कि वह कठिन से कठिन रागों को फिल्मी गीतों में बहुत आसानी से ढाल लेते थे. उनके गाए गीतों में एक अलग ही गहराई होती थी.

मन्ना डे ने राज कपूर से लेकर बलराज साहनी जैसे बड़े अभिनेताओं के लिए आवाज दी. उनके गाए गाने जैसे ‘ये रात भीगी भीगी’ और ‘ऐ मेरी जोहरा जबीं’ आज भी उतने ही लोकप्रिय हैं. उन्होंने किशोर कुमार और मोहम्मद रफी जैसे महान गायकों के साथ भी कई यादगार गाने गाए.

मन्ना डे ने सिर्फ हिंदी ही नहीं, बल्कि कई अन्य भाषाओं में भी अपनी आवाज का जादू बिखेरा. उन्होंने हरिवंश राय बच्चन की ‘मधुशाला’ को अपनी आवाज देकर अमर कर दिया. भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण और दादासाहेब फाल्के जैसे बड़े पुरस्कारों से नवाजा. 24 अक्टूबर 2013 को यह महान कलाकार दुनिया को अलविदा कह गया.

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