ना बड़ी फैक्ट्री, ना मशीन…फिर भी बाड़मेर की महिलाएं बना रहीं ‘लोकल से ग्लोबल’ पहचान, विदेशों तक छाया हुनर

Last Updated:May 01, 2026, 17:33 IST
women empowerment Rajasthan : बाड़मेर के ग्रामीण इलाकों में महिलाएं सुई-धागे के हुनर से आत्मनिर्भर बन रही हैं. कुशन कवर, पिलो कवर और बेडशीट तैयार कर वे घर बैठे कमाई कर रही हैं. स्वयं सहायता समूह और सोशल मीडिया ने उन्हें नया मंच दिया है, जिससे उनके प्रोडक्ट्स अब देश-विदेश तक पहुंच रहे हैं और आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है.
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बाड़मेर : पश्चिम सरहद पर बसे बाड़मेर जिले के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं की जिंदगी अब तेजी से बदल रही है. सुई-धागे से शुरू हुआ छोटा सा काम आज उनके लिए रोजगार का बड़ा साधन बन गया है. हैंडवर्क से कुशन कवर, पिलो कवर और बेडशीट बनाकर महिलाएं न सिर्फ अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं बल्कि आत्मनिर्भर भी बन रही हैं.
महिलाओं के हाथों की कला अब उनकी तकदीर लिख रही है. पारंपरिक सिलाई और कढ़ाई का हुनर अब रोजगार में बदल गया है. महिलाएं घर बैठे ही कुशन कवर, पिलो कवर और बेडशीट तैयार कर रही हैं, जिनकी बाजार में अच्छी मांग है. इस काम की खास बात यह है कि इसमें ज्यादा निवेश की जरूरत नहीं होती है. स्थानीय बाजारों के साथ-साथ अब ये प्रोडक्ट्स ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी बेचे जा रहे हैं. सोशल मीडिया के जरिए महिलाएं सीधे ग्राहकों तक पहुंच बना रही हैं जिससे उनकी आमदनी में लगातार इजाफा हो रहा है.
सुई-धागे का कमाल, हाथ का हुनर बना कमाई का जरियासुई-धागा, कपड़ा और थोड़ी सी मेहनत के साथ महिलाएं अपने घरों में ही यह काम शुरू कर रही हैं. कई जगह स्वयं सहायता समूह के माध्यम से महिलाओं को ट्रेनिंग दी जा रही है जिससे उनके काम में गुणवत्ता और डिजाइन दोनों में सुधार हो रहा है. अनिता चौधरी सरीखी सैकड़ो महिलाएं स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपने हाथों का हुनर दिखा रही है.
स्वयं सहायता समूह के जरिए मिल रहा मंचस्वयं सहायता समूह की अनिता चौधरी आकर्षक डिजाइन के कुशन कवर, पिलो कवर और बेडशीट तैयार करती हैं जिसकी डिमांड जापान,अमेरिका सहित अन्य विदेशो में रहती है. बाड़मेर की अनिता चौधरी ने साबित कर दिया कि अगर हौसला हो तो सुई-धागा भी तकदीर बदल सकता है. आज उनके हाथों की कला सिर्फ कपड़े नहीं सजाती बल्कि पूरे परिवार की जिंदगी संवार रही है.
हैंडवर्क से महिलाएं कमा रही मुनाफाअनिता के मुताबिक पहले सोचा भी नहीं था कि सिलाई-कढ़ाई से कमाई हो सकती है. धीरे-धीरे काम सीखा और अब हर महीने अच्छा पैसा कमा लेती हूं. वे बताती है कि इससे घर का खर्च चलाने में काफी मदद मिलती है और उनके हाथों का हुनर विदेशो में खूब सुर्खियां बटोर रहा है. अनिता बाड़मेर सहित जोधपुर, जयपुर,उदयपुर और दिल्ली में मेला लगाकर इन्हें बेचती है जहां अच्छा मुनाफा मिल जाता है.
About the AuthorRupesh Kumar Jaiswal
A Delhi University graduate with a postgraduate Diploma in Journalism and Mass Communication, I work as a Content Editor with the Rajasthan team at India Digital. I’m driven by the idea of turning raw in…और पढ़ें
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