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India FDI rules change | China investment India | चीन के साथ पटरी पर लौट रहे रिश्ते, सरकार ने खोल दिया नया द्वार, अब भर-भरकर आएगा पैसा

चीन के साथ भारत के संबंध अब पटरी पर लौटते दिख रहे हैं. इसी के साथ केंद्र सरकार ने विदेशी निवेश (FDI) से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है. इससे अब चीन से जुड़ी कंपनियों के लिए भारत में निवेश करना पहले के मुकाबले आसान हो जाएगा. वित्त मंत्रालय ने शनिवार को फेमा (Foreign Exchange Management Act) के तहत नए नियमों को नोटिफाई किया, जो 1 मई से लागू हो गए हैं.

नए नियमों के मुताबिक, अगर किसी विदेशी कंपनी में चीन या हॉन्गकॉन्ग की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत तक है, तो वह कंपनी भारत में उन सेक्टरों में ऑटोमैटिक रूट के जरिये निवेश कर सकेगी, जहां पहले से एफडीआई की अनुमति है. यानी अब ऐसे मामलों में सरकार से अलग से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी.

हालांकि, यह छूट सीधे तौर पर चीन, हॉन्गकॉन्ग या भारत से लगती सीमा वाले देशों में रजिस्टर्ड कंपनियों को नहीं मिलेगी. साफ शब्दों में कहें तो अगर कंपनी खुद चीन या किसी पड़ोसी देश में रजिस्टर्ड है, तो उसे अभी भी पहले की तरह सरकारी मंजूरी लेनी होगी.

कोरोना काल में सरकार ने की थी सख्ती

दरअसल 2020 में कोरोना महामारी के दौरान सरकार ने FDI नियमों को सख्त कर दिया था. उस समय यह नियम बनाया गया था कि भारत से सीमा साझा करने वाले किसी भी देश की कंपनी को निवेश से पहले सरकारी अनुमति लेनी होगी. इन देशों में चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार और अफगानिस्तान शामिल हैं.

अब सरकार ने इस नियम में ढील देते हुए ‘बेनेफिशियल ओनर’ (असल मालिक) की परिभाषा को आधार बनाया है. यानी अगर किसी कंपनी में इन देशों की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से कम है, तो उसे प्रतिबंधित नहीं माना जाएगा. यह परिभाषा मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के नियमों के अनुसार तय की गई है, जिसमें 10 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सेदारी को नियंत्रणकारी माना जाता है.

वित्त मंत्रालय के अधीन आर्थिक मामलों के विभाग (DEA) ने स्पष्ट किया है कि अब निवेश के मामलों में इसी ‘बेनेफिशियल ओनर’ की पहचान के आधार पर नियम लागू होंगे. साथ ही, ऐसे निवेशों को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के तय रिपोर्टिंग नियमों का पालन करना होगा.

सरकार ने यह भी साफ किया है कि जिन मल्टीलेटरल बैंकों या फंड्स में भारत सदस्य है, उन्हें किसी एक देश से जुड़ा नहीं माना जाएगा. यानी ऐसे संस्थानों के निवेश पर ये नियम लागू नहीं होंगे.

बीमा सेक्टर में 100 फीसदी विदेशी निवेश का रास्ता साफ

इस बीच, सरकार ने बीमा सेक्टर में भी बड़ा फैसला लिया है. अब बीमा कंपनियों और इंटरमीडियरी (जैसे ब्रोकर्स) में 100 प्रतिशत तक विदेशी निवेश ऑटोमैटिक रूट के तहत किया जा सकेगा. हालांकि, भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के लिए यह सीमा 20 प्रतिशत ही रहेगी.

आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2000 से दिसंबर 2025 तक भारत में कुल FDI में चीन की हिस्सेदारी सिर्फ करीब 2.51 अरब डॉलर यानी महज 0.32 प्रतिशत रही है. सरकार के इस कदम को निवेश को बढ़ावा देने और नियमों को व्यावहारिक बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है.

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